मध्य प्रदेश में किसान सड़कों पर हैं. वजह- मूंग की फसल की 100 फीसदी MSP खरीद की मांग. लेकिन किसानों का ये प्रदर्शन बड़े ही रोचक तरीके से चल रहा है. किसान सड़क किनारे कंडों की आग पर दाल-बाटी बना रहे हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी दाल-बाटी खाने का न्योता दिया है. किसानों का कहना है कि अगर किसान खुद भूखा रहेगा तो आंदोलन कैसे करेगा. इसलिए इस बार वे सिर्फ अपनी मांगें ही नहीं, बल्कि कई दिनों तक सड़क पर डटे रहने का पूरा इंतजाम भी साथ लेकर आए हैं.
भोपाल में 'दाल-बाटी आंदोलन'! सड़क पर चूल्हा जलाकर क्यों बैठे प्रदेश के किसान?
मध्य प्रदेश के किसान सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं. 100 फीसदी MSP की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने नायाब तरीका भी ढूंढ़ा है. सड़क पर ही चूल्हा बनाकर किसान दाल बाटी बना रहे हैं और उन्होंने सीएम को भी न्योता दिया.

नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, विदिशा जिलों समेत मालवा और नर्मदापुरम संभाग के 19 किसान संगठनों के बैनर तले किसान भोपाल पहुंच चुके हैं. फिलहाल प्रदर्शनकारी भोपाल के वीर सावरकर सेतु के पास डेरा डाले हुए हैं. किसानों ने सड़क पर ही कंडों-गोइठों की आग पर बाटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं और दाल बनाई जा रही है. उनके साथ राशन, बर्तन, पानी और जरूरी सामान भी मौजूद है. ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में गद्दे और बिस्तर लगाए गए हैं. किसानों का कहना है कि रास्ते में ट्रॉलियों में रखे खाने के पैकेट से काम चला रहे हैं, लेकिन लगातार आगे बढ़ रहे हैं. किसानों का कहना है कि जहां पुलिस रोकेगी या रात होगी, वहीं ट्रॉली में सो जाएंगे. लेकिन मांगें पूरी हुए बिना वापस नहीं लौटेंगे. प्रदर्शन के दौरान आजतक से बात करते हुए एक किसान कहते हैं,
किसान को बहुत पीड़ा और परेशानी है. पिछले साल सरकार ने 4 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी थी, जो कि बहुत कम थी. इस साल हमें उम्मीद थी कि कम से कम 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी. लेकिन सरकार ने उल्टा काम किया कि वो 1 क्विंटल 20 किलो प्रति एकड़ खरीदने लगी. इससे हमको 12-15 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हुआ.
आजतक से जुड़े पत्रकार रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP 8,668 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. लेकिन समर्थन मूल्य पर खरीद की सीमा प्रति एकड़ सिर्फ 1 क्विंटल 20 किलो रखी गई है. किसानों का कहना है कि एक एकड़ में औसतन 4 से 5 क्विंटल मूंग की पैदावार होती है. ऐसे में बाकी 3 से 4 क्विंटल उपज उन्हें खुले बाजार में बेचनी पड़ती है.
किसानों के मुताबिक खुले बाजार में मूंग का भाव सिर्फ 4,000 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है. यानी हर क्विंटल पर करीब 3,000 से 4,000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसी वजह से उनकी मांग है कि मूंग की पूरी उपज की खरीद MSP पर की जाए.
कैसे शुरू हुआ आंदोलन?इस आंदोलन की शुरुआत संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हुई. किसानों ने नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरना दिया, हनुमान चालीसा का पाठ किया और तिरंगा लेकर 'जय जवान, जय किसान' के नारे लगाते हुए भोपाल के लिए मार्च शुरू किया. देर शाम वे सीहोर जिले के बुधनी पहुंचे. बुधनी सीट से ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 6 बार विधायक रह चुके हैं. इन किसानों को रास्ते में प्रशासन ने रोकने की कोशिश भी की. नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा और एसपी साईकृष्ण एस. थोटा ने नेशनल हाईवे पर किसानों से बातचीत की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी और मार्च जारी रहा.
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इस बीच मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीद की सीमा बढ़ाने की मांग की है. मंत्री कंषाना ने ये भी कहा कि मंत्रालय में किसान प्रतिनिधियों से बातचीत हुई है. उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है. मंत्री के मुताबिक, मूंग खरीदी समेत किसानों की प्रमुख मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई है और सरकार किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखेगी. हालांकि किसानों का रुख फिलहाल नहीं बदला है. उनका कहना है कि जब तक मूंग की 100 फीसदी खरीद MSP पर करने का स्पष्ट भरोसा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
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