देश के कई हिस्सों में मानसून का मूड अचानक ज्यादा आक्रामक नजर आ रहा है. भारतीय मौसम विभाग यानी IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स में अगले 24 घंटों के दौरान 19 राज्यों में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट बताया गया है. साथ ही 16 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी भी दी गई है.
यूपी, बिहार समेत 19 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट, 85 किमी की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं!
Heavy Rain and Storm Alert: IMD के मौसम पूर्वानुमान के बीच यूपी, बिहार, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल समेत कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी, वज्रपात और पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड के खतरे को समझिए. जानिए चक्रवाती परिसंचरण और बदलते मानसून पैटर्न का इस मौसम पर क्या असर है और किसानों, मछुआरों तथा आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

आगे बढ़ने से पहले ये बात जान लेना जरूरी है कि अलग-अलग समय विंडो और क्षेत्रों के कारण आंकड़े अलग हैं. लिहाजा इसे एक ही समय का एक जैसा अलर्ट समझना ठीक नहीं होगा. एक और जरूरी बात पहले. 19 राज्यों के लिए 85 किमी प्रति घंटे तक की हवा वाला अलर्ट जरूर रिपोर्ट किया गया है, लेकिन हर राज्य के लिए IMD का रेड अलर्ट हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
मौसम विभाग की चेतावनी में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट अलग-अलग जोखिम स्तर बताते हैं. इसलिए इस खबर में "रेड अलर्ट" को पूरे 19 राज्यों पर लागू मानना सही नहीं होगा. असली बात ये है कि कई इलाकों में बारिश के साथ तेज हवा, बिजली गिरने और स्थानीय स्तर पर अचानक जलभराव जैसे खतरे बने हुए हैं.
यूपी और बिहार में क्या होगा
उत्तर प्रदेश और बिहार इस पूरे मौसम सिस्टम के अहम हिस्से हैं. दोनों राज्यों में कई इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना बताई गई है. सड़कों पर निकलने वालों के लिए सबसे बड़ा जोखिम सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि अचानक कम विजिबिलिटी, पानी भरने और पेड़ या बिजली के खंभे गिरने जैसी घटनाएं हैं.
यूपी के बड़े शहरों में भी मौसम का असर ट्रैफिक पर पड़ सकता है. लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर और आसपास के इलाकों में स्थानीय मौसम की स्थिति कुछ घंटों के भीतर तेजी से बदल सकती है. इसलिए लंबी दूरी की यात्रा करने वालों को निकलने से पहले IMD का जिला स्तर का पूर्वानुमान देखना ज्यादा समझदारी होगी.
बिहार में भी बारिश के साथ बिजली गिरने का खतरा नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. खेतों में काम कर रहे लोगों के लिए खास सावधानी जरूरी है. खुले मैदान, पेड़ के नीचे खड़ा होना या बिजली चमकने के दौरान पानी के पास रहना जोखिम बढ़ा सकता है.
दिल्ली-NCR में क्या सावधानी रखें
दिल्ली-NCR में मानसून के दौरान भारी बारिश का सबसे तत्काल असर ट्रैफिक और जलभराव पर पड़ता है. 17 अगस्त के मौसम अपडेट में दिल्ली को भी उन इलाकों में शामिल किया गया है, जहां तेज बारिश और आंधी की संभावना है.
दफ्तर या जरूरी काम से निकल चुके लोगों के लिए सलाह सीधी है. अगर बारिश अचानक बहुत तेज हो जाए तो सड़क के किनारे किसी सुरक्षित जगह रुकना, अंडरपास से बचना और खुले मैदान में खड़े होने के बजाय पक्की इमारत में जाना बेहतर है. बाइक सवारों के लिए तेज हवा और फिसलन वाली सड़क का कॉम्बिनेशन खास तौर पर खतरनाक हो सकता है.
उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश का मतलब सिर्फ बारिश नहीं
मैदानी इलाकों में तेज बारिश का मतलब ट्रैफिक जाम या जलभराव हो सकता है, लेकिन पहाड़ों में तस्वीर अलग होती है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क टूटने, पहाड़ी नालों में अचानक पानी बढ़ने और चट्टान गिरने का खतरा बढ़ जाता है. 17 अगस्त के मौसम अपडेट में दोनों राज्यों को तेज बारिश और आंधी वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है.
इसलिए पहाड़ी रास्तों पर यात्रा कर रहे लोगों के लिए सबसे जरूरी सलाह है कि स्थानीय प्रशासन और हाईवे एजेंसियों के अपडेट को प्राथमिकता दें. बारिश के दौरान पहाड़ी सड़क पर सिर्फ मौसम देखकर आगे बढ़ जाना ठीक नहीं. रास्ता खुला दिखाई दे रहा हो, तब भी ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा हो सकता है.
पूर्वी भारत में बिजली का खतरा
पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा महत्वपूर्ण है. ऐसे मौसम में खेत, खुले मैदान, नदी या तालाब के किनारे मौजूद लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
बिजली चमकने के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता. अगर सुरक्षित इमारत उपलब्ध है तो वहां जाना बेहतर है. ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए मौसम की चेतावनी मोबाइल पर देखना और स्थानीय प्रशासन के संदेशों को गंभीरता से लेना जरूरी है.
किसानों के लिए क्या संदेश है
IMD के मौसम जर्नल के मुताबिक बारिश किसानों के लिए हमेशा बुरी खबर नहीं होती. मानसून की अच्छी बारिश खेती और जल संसाधनों के लिए जरूरी है. समस्या तब पैदा होती है जब कम समय में बहुत ज्यादा पानी गिरता है. खेत में पानी की निकासी खराब हो तो फसल को नुकसान हो सकता है.
किसानों को भारी बारिश के दौरान खेतों में अनावश्यक सिंचाई से बचना चाहिए और जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए. कटी हुई फसल या खुले में रखा कृषि उत्पाद है तो उसे सुरक्षित और सूखी जगह पर रखना बेहतर होगा. IMD की कृषि मौसम सेवाएं जिला और फसल स्तर पर उपयोगी सलाह उपलब्ध कराती हैं.
मछुआरों के लिए समुद्र में खतरा
समुद्री इलाकों में मौसम की चेतावनी का मतलब और ज्यादा गंभीर हो जाता है. IMD अलग से मछुआरों के लिए समुद्री क्षेत्र, तटीय इलाकों और तेज हवाओं को लेकर चेतावनियां जारी करता है. बंगाल की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक अलग-अलग तटीय क्षेत्रों के लिए Marine Forecast और Fishermen Warning सिस्टम उपलब्ध है.
इसलिए मछुआरों को सामान्य बारिश के अनुमान के आधार पर समुद्र में जाने का फैसला नहीं करना चाहिए. स्थानीय समुद्री चेतावनी और बंदरगाह प्रशासन की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है.
आखिर मानसून इतना अग्रेसिव क्यों हो रहा है
अब आते हैं उस बड़े सवाल पर, जो सिर्फ आज के मौसम से आगे जाता है. अचानक इतनी बारिश क्यों?
मानसून कोई एक मशीन नहीं है. इसके पीछे हवा, समुद्र, नमी, कम दबाव के क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण और मानसून ट्रफ जैसे कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं. जब किसी इलाके में नमी से भरी हवा ऊपर उठती है और वातावरण में अस्थिरता बढ़ती है, तो कुछ घंटों में जोरदार बादल विकसित हो सकते हैं. यही वजह है कि सुबह सामान्य मौसम के बाद दोपहर या शाम को अचानक तेज बारिश और आंधी आ सकती है.
जलवायु परिवर्तन इस तस्वीर को और जटिल बना रहा है. IMD से जुड़े एक हालिया अध्ययन में 1971 से 2020 के बीच मध्य भारत में बहुत भारी और अत्यधिक भारी बारिश की घटनाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अध्ययन में भारी बारिश की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति के साथ मानसूनी डिप्रेशन और चक्रवाती सिस्टम में बदलाव की भी चर्चा की गई है.
IPCC के आकलन भी बताते हैं कि गर्म होती जलवायु में दक्षिण एशिया और भारत में मानसूनी वर्षा की तीव्रता और बारिश की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी का खतरा है.
मतलब साफ है. हर तेज बारिश को सीधे जलवायु परिवर्तन का नतीजा कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा, लेकिन ऐसे चरम बारिश वाले एपिसोड जिस बड़े मौसम और जलवायु सिस्टम का हिस्सा हैं, उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता.
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फिलहाल 17 अगस्त की दोपहर में सबसे जरूरी बात यही है कि मौसम को हल्के में न लिया जाए. बाहर निकलना जरूरी है तो स्थानीय मौसम अपडेट देखें, पहाड़ी इलाकों में रास्ते की जानकारी लें, बिजली चमकने पर खुले स्थानों से दूर रहें और समुद्र में जाने वाले लोग IMD की Marine Warning को प्राथमिकता दें. मानसून इस वक्त सिर्फ बारिश नहीं बरसा रहा, बल्कि ये याद भी दिला रहा है कि बदलते मौसम में कुछ घंटे की चेतावनी कई बार बहुत बड़ी सुरक्षा साबित हो सकती है.
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