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मणिपुर: लूटे गए हथियारों को सरेंडर करने की डेडलाइन खत्म, आवाजाही चालू कराने की पूरी तैयारी में सुरक्षाबल

Manipur News: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने आदेश दिया था कि मणिपुर में सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित किया जाए. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से राज्य में 'लॉ एंड ऑर्डर' की जिम्मेदारी राज्यपाल Ajay Bhalla के पास है.

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सरेंडर किए गए हथियारों के साथ सुरक्षाकर्मी. (तस्वीर: PTI, 6 मार्च)

मणिपुर (Manipur) में अवैध रूप से रखे गए लूटे हुए हथियार सुरक्षा बलों को सौंपे गए. इसमें आग्नेयास्त्र (फायरआर्म्स), विस्फोटक हथियार और गोला-बारूद शामिल हैं. इसकी शुरुआत 20 फरवरी को हुई थी. राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया था, जिसे बाद में 6 मार्च तक बढ़ा दिया गया.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक हजार आग्नेयास्त्र वापस किए गए. राज्य के विभिन्न पुलिस स्टेशनों से 6,000 से अधिक आग्नेयास्त्र और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद लूट लिए गए थे. पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई हथियार बरामद कर लिए गए हैं, लेकिन उन्होंने सटीक संख्या बताने से इनकार कर दिया.

इस अभियान के आखिरी दिन, 6 मार्च की शाम को CRPF, BSF, सेना, असम राइफल्स, RAF और जिला पुलिस ने कई जगहों पर फ्लैग मार्च किया. इसमें मोइरांग, कुनबी और बिष्णुपुर जिले का नंबोल इलाका शामिल था. फ्लैग मार्च का उद्देश्य लोगों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करना था.

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अमित शाह का आदेश

इससे पहले केंद्र सरकार ने आदेश दिया था कि 8 मार्च से राज्य की सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाए. मैतेई और कुकी समुदायों के बीच आपसी टकराव के कारण राज्य के हाईवे पर आवागमन बाधित था. दोनों समुदायों के बीच मई 2023 से संघर्ष जारी है, जिसमें अब तक 258 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 60,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं.

मैतेई सिविल सोसायटी ग्रुप COCOMI और महिला संगठन (वुमन ऑर्गेनाइजेशन) ने इस कदम का स्वागत किया है. उन्होंने पहले भी गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी. वहीं, कुकी समूह CoTU ने इस आदेश को लेकर चेतावनी दी है. उनका कहना है कि पहले उनकी मांगों पर विचार किया जाए, फिर इस आदेश को लागू किया जाए.

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फरवरी महीने में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. इसके बाद से मणिपुर में 'लॉ एंड ऑर्डर' की जिम्मेदारी राज्यपाल के पास है. 4 मार्च को उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी. उन्होंने गृह मंत्री के उस आदेश पर चर्चा की, जिसके तहत राज्य में लोगों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जानी है.

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