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ममता बनर्जी को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, ऋतब्रत ही होंगे बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष

Ritabrata Banerjee ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे. Calcutta High Court ने 18 जून को स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

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ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. (फाइल फोटो: आजतक)

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  • कलकत्ता हाईकोर्ट ने 18 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को लेकर चल रहे विवाद में स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को नेता विपक्ष बनाये रखने का निर्णय दिया।
  • तृणमूल कांग्रेस में बगावत और दो गुटों के बीच विरोध के कारण शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी थी, और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसके बाद सुनवाई जारी है।
  • हाईकोर्ट के फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में नेता विपक्ष के रूप में काम करेंगे, और अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, जिससे ममता बनर्जी के राजनीतिक संघर्ष और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
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संजय शर्मा

ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. चुनावी नतीजों के बाद शुरू हुई बगावत अब अदालत तक पहुंच चुकी है. 18 जून को कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को लेकर चल रहे विवाद पर फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. यानी ऋतब्रत बनर्जी ही विपक्ष के नेता बने रहेंगे. 

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क्या है पूरा मामला?

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सीनियर नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी थी. टीएमसी की तरफ से दो नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए गए थे. शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव टीएमसी नेतृत्व यानी ममता बनर्जी के गुट की तरफ से भेजा गया, जबकि पार्टी के बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम भेजा था. 

ऋतब्रत का नाम पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बसु ने स्वीकार किया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया. इसके बाद शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह स्पीकर के फैसले पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं कर रहे हैं. जस्टिस कृष्णा राव ने दोनों पक्षों को विरोध में हलफनामा दाखिल करने और दो हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है. अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी.

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ममता बनर्जी के गुट ने क्या तर्क दिया?

टीएमसी ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि स्पीकर ने राजनीतिक दल के आधिकारिक फैसले और व्हिप की अनदेखी कर संवैधानिक सिद्धांतों के ख‍िलाफ काम किया है. साथ ही यह भी कहा कि स्पीकर ने पार्टी के फैसले के बजाय केवल एक गुट की संख्या के आधार पर फैसला किया, जो गलत है. इस मामले पर 17 जून को भी सुनवाई हुई थी. उस दौरान कोर्ट ने स्पीकर के फैसले पर सख्त टिप्पणियां की थीं. 

कोर्ट ने कहा था कि स्पीकर को अंतिम फैसले पर पहुंचने से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुननी चाहिए थी. कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया था कि क्या केवल जालसाजी के आरोपों के आधार पर मूल प्रस्ताव को दरकिनार किया जा सकता है? क्या दावों की जांच पूरी किए बिना स्पीकर स्वतंत्र रूप से बहुमत का फैसला कर सकते हैं? इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अब इस पर 18 जून को फैसला सुनाया गया है.  

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ऋतब्रत बनर्जी ही होंगे नेता प्रतिपक्ष

कलकत्ता हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी के लिए विधानसभा में नेता विपक्ष के तौर पर कामकाज संभालने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. वे पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र में विपक्ष के नेता के तौर पर में हिस्सा ले पाएंगे. 

वहीं, ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं. एक तरफ विधानसभा में करीब 60 विधायक बागी गुट के साथ हैं. वहीं, लोकसभा में भी 20 सांसदों ने एक अलग पार्टी NCPI जॉइन कर NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है.

वीडियो: बंगाल चुनाव के पहले राहुल ने ममता को क्या अलर्ट दिया था?

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