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रात में पायल की आवाज, हंसी और फिर रोना… भूत की अफवाह में पूरा गर्ल्स हॉस्टल खाली हो गया

महाराष्ट्र के अमरावती में एक सरकारी हॉस्टल है. यहां कुछ छात्राओं ने ऐसी आवाजें सुनने का दावा किया, जिनसे पूरा हॉस्टल डर गया. इनका कहना है कि किसी को पायल की झनकार सुनाई दी, तो किसी ने हंसने और रोने की आवाज सुनी. बात इतनी फैली कि 608 बच्चे हॉस्टल छोड़कर अपने घर चले गए.

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हॉस्टल में भूत के डर से 608 बच्चे घर लौट गए (PHOTO- AI)

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  • महाराष्ट्र के अमरावती स्थित सरकारी बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल में छात्राओं द्वारा पायल की झनकार, हंसने और रोने की आवाजें सुनने की शिकायत के बाद मानसिक रोग विशेषज्ञ को बुलाकर काउंसलिंग शुरू की गई।
  • छात्राओं की अजीब आवाजों की शिकायतों के बाद हॉस्टल में भय का माहौल बन गया, जिससे 608 छात्र डर के कारण हॉस्टल छोड़कर घर लौट गए और इस घटना को सामूहिक डर (Mass Hysteria) माना जा रहा है।
  • स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अफवाहों को रोकने हेतु काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए हैं तथा पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित सरकारी बोर्डिंग स्कूल से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां लोग एक स्कूल के हॉस्टल में भूत-प्रेत जैसी चीजें होने का दावा कर रहे हैं. मामला तब सामने आया जब कुछ छात्राओं ने हॉस्टल के अंदर अजीब आवाज़ें सुनने की शिकायत की. उन्होंने दावा किया कि उन्हें हॉस्टल में पायल की झनकार, हंसने और रोने की आवाजें सुनाई देती हैं. जैसे-जैसे यह बात फैली, बाकी स्टूडेंट्स में डर और बढ़ गया. नतीजा ये हुआ कि डर के कारण सैकड़ों छात्र हॉस्टल छोड़कर घर लौट गए हैं. हालांकि इस मामले को Mass Hysteria यानी सामूहिक डर भी कहा जा रहा है. ये एक मानसिक स्थिति है जिसमें बहुत सारे लोग एक कॉमन चीज पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वो सच हो.

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500 से अधिक स्टूडेंट्स घर लौट गए

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हॉस्टल में डर का माहौल है. ऐसे में पेरेंट्स अपने बच्चों को वापस बुला रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक भूत की अफवाह फैलने के बाद से लगभग 608 स्टूडेंट्स हॉस्टल छोड़ चुके हैं. इसमें 263 लड़के और 345 लड़कियां शामिल हैं. वहीं स्कूल के हेडमास्टर संजय चौधरी के मुताबिक इन शिकायतों के बाद मैनेजमेंट ने छात्राओं की काउंसलिंग के लिए एक मानसिक रोग विशेषज्ञ (साइकियाट्रिस्ट) को बुलवाया है. हेडमास्टर ने कहा,

‘कुछ छात्राओं ने पायल की आवाज और हंसने-रोने जैसी आवाजें सुनने की शिकायत की थी. हम छात्राओं को अस्पताल ले गए और मनोरोग विशेषज्ञ से उनकी जांच करवाई. जांच के बाद डॉक्टर ने कहा कि ये लक्षण गंभीर हिस्टीरिया जैसी स्थिति से जुड़े हो सकते हैं.’

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उन्होंने आगे बताया कि स्टूडेंट्स के डर को दूर करने और उनमें कॉन्फिडेंस बहाल करने के लिए उनकी काउंसलिंग की जा रही है. उन्हें भरोसा दिलाया जा रहा है कि भूत-प्रेत जैसा कुछ नहीं होता.

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स्वास्थ्य विभाग की अपील

इस मामले पर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी अभिषेक नायडू का बयान भी आया है. उन्होंने सभी स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स से अपील की कि वे इस घटना को भूत-प्रेत या किसी अलौकिक घटना से न जोड़ें. उन्होंने कहा,

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'यह एक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है. इसमें और कुछ भी शामिल नहीं है. लोगों को अफवाहें नहीं फैलानी चाहिए. बच्चों और उनके अभिभावकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है.

प्रशासन का कहना है कि छात्रों के डर को कम करने के कदम उठाए गए हैं. ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए. इसके लिए और भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. साथ ही हानिकारक अंधविश्वासों और रीति-रिवाजों को खत्म करने के लिए काम करने वाली संस्था 'महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति' भी डरे हुए बच्चों की काउंसलिंग कर रही है.

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