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Air India की फ्लाइट हवा में हो गई थी आउट ऑफ कंट्रोल? Black Box जांच में बड़ा खुलासा

Phuket से Delhi आ रही Air India की फ्लाइट 4 अगस्त को अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. अब Airbus की शुरुआती Black Box जांच में सामने आया है कि विमान के तीनों Hydraulic System एक साथ फेल हो गए थे.

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एयर इंडिया की फ्लाइट को भारी टर्बुलेंस से गुजरना पड़ा था (PHOTO - India Today)

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  • 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ फेल हो गए थे, जिससे फ्लाइट करीब 4 सेकंड के लिए पायलट के नियंत्रण से बाहर हो गई।
  • जांच में पता चला कि हाइड्रोलिक सिस्टम के प्रेशर सेंसर या प्रेशर स्विच की खराबी संभावित कारण हो सकती है, जिसके चलते फ्लाइट के कंट्रोल में गड़बड़ी आई।
  • इस घटना के बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के लिए रोजाना ड्रग टेस्ट का आदेश दिया है और जांच एजेंसी AAIB मामले की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है।

थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट के साथ 4 अगस्त को एक घटना हुई थी. जिसमें फ्लाइट अचानक से करीब 300 फीट नीचे आ गई थी. इस मामले की जांच चल रही है. जांच में कई हैरान करने वाले खुलासे अब तक हो चुके हैं. ऐसा ही एक और खुलासा अब सामने आया है. एयरबस की शुरुआती ब्लैक बॉक्स जांच में ये सामने आया है कि फ्लाइट के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ फेल हो गए थे. इस वजह से 4 सेकंड तक फ्लाइट पायलट के कंट्रोल से बाहर थी. 

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हाइड्रोलिक सिस्टम क्या होता है?

अगर एक लाइन में समझें, तो ये फ्लाइट को चलाने में मदद करता है. जांच के मुताबिक, विमान जब 300 फीट नीचे गोते लगा रहा था इसी दौरान फ्लाइट का ऑटोपायलट भी डिस्कनेक्ट हो गया. विमान का कंट्रोल बिगड़ गया था. इसके बाद फ्लाइट करीब 300 फीट नीचे आ गया. इस दौरान यात्रियों और केबिन क्रू को झटके लगे थे. कई लोग विमान की छत से जा टकराए. 24 लोग पैसेंजर घायल हो गए.

एयरबस की शुरुआती रीडिंग के मुताबिक, A320 नियो के एलिवेटर्स और एलेरॉन्स पर एक साथ नियंत्रण खत्म हो गया था. एलिवेटर्स वो होता है जो फ्लाइट नोज कोन (Flight Nose Cone) को ऊपर-नीचे करने में मदद करता है. जबकि एलेरॉन्स फ्लाइट को दाएं-बाएं मोड़ने में मदद करते हैं. इसी दौरान स्पॉयलर्स ने भी काम करना बंद कर दिया. बताया गया कि फ्लाइट के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में एक साथ खराबी आई थी. फिर कुछ सेकंड बाद तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम दोबारा काम करने लगे. इसके बाद विमान को कंट्रोल में लिया गया और फ्लाइट की दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई.

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यानी यह कहना सही नहीं होगा कि 4 सेकंड तक फ्लाइट का नोज-डाउन था. सही बात यह है कि करीब 4 सेकंड तक विमान के अहम फ्लाइट कंट्रोल्स ने काम नहीं किया. इसी दौरान पायलट का नोज-डाउन इनपुट भी तुरंत एक्टिव नहीं हो सका. हाइड्रोलिक सिस्टम के दोबारा एक्टिव होने के बाद फ्लाइट ने तेज नोज-डाउन ट्रैजेक्टरी पकड़ी और करीब 300 फीट नीचे आया.

प्रेशर स्विच की खराबी?

एयरबस की शुरुआती जांच में संभावित हाइड्रोलिक प्रेशर सेंसर या प्रेशर स्विच की खराबी की ओर इशारा किया गया है. लेकिन इसे घटना की अंतिम वजह नहीं माना गया है. एयरबस और फ्रांस की बीईए की एक्सपर्ट टीम भी जांच में मदद कर रही हैं. टेक्निकल जांच के निष्कर्ष भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानी एएआईबी को दिए जा रहे हैं.

अब ये भी जान लेते है कि इस पूरे केस में एयरबस क्यों जांच में मदद कर रहा है. एयरबस इस जांच में इसलिए शामिल है क्योंकि विमान उसी कंपनी ने बनाया है. इस पूरे केस में भारत की जांच एजेंसी AAIB मामले की जांच कर रही है. एयरबस फ्लाइट के तकनीकी सिस्टम और ब्लैक बॉक्स के डेटा को समझने में मदद कर रहा है. शुरुआती जांच में एयरबस ने हाइड्रोलिक सिस्टम के प्रेशर सेंसर में खराबी की आशंका जताई है. लेकिन इसकी पक्की वजह अभी सामने नहीं आई है.

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(यह भी पढ़ें: एयर इंडिया की फ्लाइट हवा में 300 फीट नीचे कैसे पहुंची, टर्बुलेंस या कोई और तकनीकी खामी?)

सवालों के घेरे में पायलट

इस पूरे एक्सीडेंट की जांच में पायलट भी सवालों के घेरे में है. फ्लाइट के पैसेंजर ने आरोप लगाया था कि पायलट नशे में था. जिसके बाद मामले की जांच हुई,  पायलट के दो ड्रग्स टेस्ट हुए. दोनों टेस्ट के रिजल्ट पॉजिटिव थे. एक रिपोर्ट में गांजा पीने की भी पुष्टि हुई थी. इस हादसे के बाद ये फैसला हुआ कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों की अब रोज जांच होगी. जिसमें ये पता लगाया जाएगा कि उन्होंने प्रतिबंधित दवाइयां या कोई नशीले पदार्थों का नशा तो नहीं किया है. फिलहाल पूरे मामले की जांच चल रही है.  

AAIB ने कहा कि जांच पूरी होने तक कोई नतीजा नहीं निकाला जाना चाहिए. अब जांच में जो भी फाइनल रिपोर्ट आएगी उसके बाद भी साफ हो पाएगा कि फुकेट-दिल्ली फ्लाइट हादसे की असल वजह क्या थी. 

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