केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) की जगह 'महाकाल स्टैंडर्ड टाइम' (MST) लाने की बात कही है. विपक्ष ने उनके इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है. कांग्रेस नेता उदित राज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई भी चीज आस्था पर नहीं चलती. वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि बीजेपी के लिए विकास का मतलब बस यही है कि दूसरों की बनाई गई सड़कों और शहरों के नाम बदल दिए जाएं.
'ग्रीनवीच नहीं, महाकाल टाइम', धर्मेंद्र प्रधान के प्रस्ताव पर कांग्रेस का तंज, 'इन्हें यही आता है'
कांग्रेस नेता उदित राज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कोई भी चीज आस्था पर नहीं चलती है. वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि बीजेपी के लिए विकास का मतलब बस यही है कि दूसरों की बनाई गई सड़कों और शहरों के नाम बदल दिए जाएं.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उज्जैन ही दुनिया में समय की गणना का केंद्र रहा है. उज्जैन वह जगह है जहां से कर्क रेखा गुजरती है और प्राचीन काल में यहीं से पूरी दुनिया के लिए समय की गणना की जाती थी. शुक्रवार, 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 'महाकाल: द मास्टर ऑफ़ टाइम' में प्रधान ने यह बात कही. आगे कहा,
“अब वह समय आ गया है जब GMT की जगह महाकाल स्टैंडर्ड टाइम को स्थापित किया जाए. आधुनिक AI टूल्स भी इस बात को मानते हैं कि समय की गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र ही है. उज्जैन एक ऐसी जगह है जहां आध्यात्मिकता और विज्ञान के बीच की दूरी मिट जाती है.”
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों उज्जैन, काशी, कांची और पुरी धाम को 'जीवित प्रयोगशालाएं' (लिविंग लैब्स) बताया. उन्होंने उज्जैन साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया और शहर के तारामंडल में एक विज्ञान प्रदर्शनी की शुरुआत की.
सीएम मोहन यादव क्या बोले?
इस मौके पर बोलते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा,
प्राचीन काल से ही उज्जैन समय की गणना और खगोल विज्ञान का एक ग्लोबल सेंटर रहा है. उज्जैन में समय की गणना केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैज्ञानिक भी है. टाइम और स्पेस आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं.
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विपक्ष ने साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रतिक्रिया दी. न्यूज एजेंसी IANS से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों (महाकाल स्टैंडर्ड टाइम) पर ग्लोबल सहमति भी चाहिए. बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये (बीजेपी नेता) समय-समय पर शिगूफा छोड़ते हैं. उन्होंने आगे कहा,
“कोई भी चीज आस्था पर नहीं चलती है. वैज्ञानिक और तार्किक रूप से इसे सिद्ध करें. हो सकता है कि यह सही हो तो हम समर्थन करेंगे. यहां विश्वगुरु बनते हैं कि पूरी दुनिया हमसे ही चल रही है. प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जरी थी और पूरी दुनिया को ज्ञान हमने दिया है. लेकिन यह ज्ञान कहीं नहीं दिखता है.”
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने प्रधान के MST प्रस्ताव का मजाक उड़ाया. अल्वी ने तंज कसते हुए कहा,
"बीजेपी के लिए विकास का मतलब बस यही है कि दूसरों की बनाई गई सड़कों और शहरों के नाम बदल दिए जाएं. अब वे समय के मानक को बदलना चाहते हैं, क्योंकि उनकी नजर में भारतीय सभ्यता का मतलब बस इतना ही है. लेकिन सिर्फ यहीं तक क्यों रुकें? अपने मोबाइल फोन फेंक दें, टेलीफोन पर बैन लगा दें और बिजली का इस्तेमाल करने के बजाय दीये जलाएं."
उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि बीजेपी का विकास एजेंडा कितना दिवालिया हो चुका है.
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