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'औकात में रहना', विधानसभा में नेता विपक्ष से बोले कैलाश विजयवर्गीय, फिर सीएम ने मांगी माफ़ी

MP Vidhansabha row: मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच सत्र के दौरान तीखी बहस हुई. बहस के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने माफ़ी मांगी, लेकिन विजयवर्गीय के तेवर जस के तस बने रहे. बोले, 'मोहन यादव कप्तान हैं, माफ़ी मांग ली तो क्या हो गया.'

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मध्य प्रदेश में विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय (left) और उमंग सिंघार (right) के बीच हुई तीखी बहस.

मध्य प्रदेश का बजट सत्र चल रहा था. इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में बहस तेज़ हुई और एक नेता ने औकात दिखाने की बात कह दी. ये बयान मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का है. ये पहले भी कई विवादित बयानों के लिए सुर्खियां बटोर चुके हैं. सत्र के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को ‘औकात में रहने की' हिदायत दे डाली. जिसके जवाब में उमंग सिंघार ने कहा ‘मैं तुम्हें औकात दिखा दूंगा’.

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ये सब विधानसभा के अंदर हुआ. जहां जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को कानून बनाने और ज़रूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. वहां इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया. आजतक से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक़, 19 फरवरी को सिंगरौली ज़िले में बिजली खरीद को लेकर चर्चा चल रही थी. इस बीच नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि सरकार अडानी ग्रुप को सवा लाख करोड़ रुपये देने की तैयारी में है.

इसपर बहस शुरू हुई. सत्ता पक्ष ने उनके आरोपों को झूठा बताया, जिसपर उमंग सिंघार ने सरकार के खिलाफ सबूत देने की बात कह दी. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि इसी पल माहौल गर्म हो गया. जिसके बाद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार आपस में भिड़ गए. 

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कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी से विपक्षी दल के विधायक बिफर पड़े और विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग करते हुए खूब हंगामा भी किया. सदन की कार्यवाही भी कई बार स्थगित करनी पड़ी. जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने अफसोस जाहिर किया. 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में हुई बहस को मर्यादा का उल्लंघन बताया है. उन्होंने माफ़ी मांगते हुए कहा,

जाने-अनजाने में कोई शब्द निकले हों तो मैं माफी मांगता हूं. पक्ष विपक्ष दोनों तरफ के नेताओं को भावनाओं पर कंट्रोल करना चाहिए और मर्यादा में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए. 

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विधानसभा अध्यक्ष ने दुख जाहिर किया, मुख्यमंत्री को माफी मांगनी पड़ी लेकिन कैलाश विजयवर्गीय के तेवर जस के तस बने रहे. सदन में हुए हंगामे के बाद विजयवर्गीय जब मीडिया के सामने आए तो उन्होंने कहा, 

कई बार हो जाता है यार. ये बहुत सामान्य बात है. उनका अलग अंदाज़ है, वो नेता प्रतिपक्ष हैं. हम सत्ता में हैं, हम जवाबदारी के साथ खड़े रहते हैं.

सीएम की ओर से मांगी गई माफी पर विजयवर्गीय ने कहा कि वो कप्तान है माफी मांग ली तो क्या हो गया. इस पूरे प्रकरण के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मीडिया से मुखातिब हुए. उन्होंने कहा,

देखिए वो मंत्री हैं. अगर वो इस तरह की बात कहेंगे तो विधायकों को क्या मैसेज जाएगा. मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ी गंभीरता से बात करनी चाहिए. 

पहले भी रह चुके हैं विवादों में

इसी साल जनवरी में जब इंदौर में दूषित पानी से कई लोगों की मौत हुई थी. तब आम लोगों की जान से जुड़े सवालों पर कैलाश विजयवर्गीय ने ‘घंटा’ जैसे असभ्य शब्द का इस्तेमाल किया था. पिछले साल उन्होंने राहुल और प्रियंका गांधी पर भी अशोभनीय टिप्पणी की थी. कहा था कि ,'आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन लेते हैं.' 

साल 2023 में उन्होंने लड़कियों पर भी अभद्र टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि 'लड़कियां भी इतने गंदे कपड़े पहनकर निकलती हैं कि उनमें देवी का स्वरूप नहीं दिखता. शूर्पणखा लगती हैं.' उनके विवादित बयानों की लिस्ट बहुत लंबी है.

वीडियो: SDM ने कैलाश विजयवर्गीय का "घंटा" वाला बयान सरकारी आदेश में लिखा, क्या एक्शन हुआ?

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