सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान उनके वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि सोनम वांगचुक को वो वीडियोज नहीं दिखाए गए जिनके आधार पर उनको हिरासत में लिया गया है. कपिल सिब्बल के मुताबिक सोनम वांगचुक को केवल वीडियो वाले फोल्डर्स के ‘थंबनेल दिखाए गए’.
सोनम वांगचुक के किस वीडियो पर सरकारी वकील सुप्रीम कोर्ट में 'हां' के बाद 'नहीं' बोले?
केंद्र सरकार ने Supreme Court में दावा किया था कि सोनम वांगचुक कोर्ट में झूठ बोल रहे हैं कि उन्हें वो सामग्रियां नहीं दी गई हैं जिनके आधार पर उनको हिरासत में लिया गया है. इनमें विशेष तौर पर वो चार वीडियोज हैं, जिनमें उनके कथित भड़काऊ भाषण हैं.


लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एंगमो की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच से कहा कि वीडियो उपलब्ध नहीं कराना सलाहकार बोर्ड के साथ-साथ सरकार के समक्ष प्रभावी प्रतिनिधित्व के वांगचुक के अधिकार का उल्लंघन है.
वांगचुक की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा,
सरकार का कहना है कि DIG लैपटॉप लेकर आए थे और उन्होंने चार वीडियो दिखाए थे. 5 अक्टूबर को बंदी को लैपटॉप दिया गया था. लेकिन वो चार वीडियो उसमें मौजूद नहीं थे. मान लीजिए कि उन्होंने इसे दिखा दिया, लेकिन कानून के अनुसार उन्हें वह सामग्री मुझे उपलब्ध कराई जानी चाहिए. यह उपलब्ध कराना उनका संवैधानिक कर्तव्य है. केवल सामग्री दिखाया जाना पर्याप्त नहीं है.
कपिल सिब्बल की सहायता कर रहे एक और वकील ने कोर्ट को बताया,
29 सितंबर को DIG लैपटॉप लेकर आए और सोनम वांगचुक के सामने ही पेन ड्राइव को लैपटॉप में डाला. पेन ड्राइव लगाने पर फोल्डर थंबनेल के रूप में दिखाई देते हैं. वीडियो वास्तव में चलाए नहीं गए. किसी भी थंबनेल पर क्लिक नहीं किया गया.
उन्होंने आगे बताया कि 40 मिनट की वीडियोग्राफी से इस बात का सबूत मिल जाएगा. उनके उलट एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि DIG और बंदी की बातचीत वाले वीडियो से सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा.
इसके बाद जस्टिस अरविंद कुमार ने ASG से पूछा कि क्या इस वीडियो में दिख रहा है कि बंदी को वीडियो दिखाया गया है. इसके जवाब में पहले तो उन्होंने हामी भरी, लेकिन फिर उन्होंने कहा,
नहीं, नहीं, वे (DIG और वांगचुक) अगल-बगल बैठे थे और केवल सामने से ही तस्वीर खींची गई थी. फिर बातचीत रिकॉर्ड हुई और उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग देखेगा, जिसमें पुलिस अधिकारियों और बंदी के बीच हुई बातचीत का 40 मिनट का वीडियो भी शामिल है. इस मामले में अगली सुनवाई अब 23 फरवरी को होगी.
केंद्र सरकार ने वांगचुक पर झूठ बोलने का आरोप लगाया था
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि सोनम वांगचुक कोर्ट में झूठ बोल रहे हैं कि उन्हें वो सामग्रियां नहीं दी गई हैं जिनके आधार पर उनको हिरासत में लिया गया है. इनमें विशेष तौर पर वो चार वीडियोज हैं, जिनमें उनके कथित भड़काऊ भाषण हैं. केंद्र सरकार ने बताया था कि DIG वांगचुक से मिलने गए थे और उनको उनके हिरासत आदेश से जुड़ी सामग्रियां दिखाई गई थीं और इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी.
वीडियो: '3 मिनट का भाषण, 8 मिनट का अनुवाद', सोनम वांगचुक मामले में SC ने किसे सुनाया?
















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