जनता की अदालत में सरकारों की परीक्षा पांच साल में होती है. लेकिन हर साल की बरसात भी उनके लिए एक चुनौती साबित होती है. इसमें उनके बनाए सड़क, स्कूल और अस्पतालों का रियलिटी चेक हो जाता है. मध्य प्रदेश के पन्ना में कुछ ऐसा ही हुआ. सीजन की शुरुआती बरसात में ही जिला अस्पताल का ड्रेनेज सिस्टम फेल कर गया, जिससे सर्जिकल वार्ड और डिलीवरी वार्ड में घुटनों भर पानी भर आया.
अस्पताल में पानी या पानी में अस्पताल, मरीज अपने-अपने बेड पर 'फंस' गए
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के सर्जिकल वार्ड और डिलीवरी वार्ड में घुटने भर पानी भर आया है. आलम ये है कि अस्पताल के सर्जिकल वार्ड और डिलीवरी वार्ड में मरीज और उनके परिवार वाले अपने बेड पर ही फंस गए हैं.


वार्ड में फंसे मरीज और उनके परिजन
आलम ये है कि अस्पताल के सर्जिकल वार्ड और डिलीवरी वार्ड में मरीज और उनके परिवार वाले अपने बेड पर ही फंस गए हैं. गंभीर रूप से बीमार मरीजों को दवा लेने, इंजेक्शन लगवाने और टॉयलेट जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नवजात शिशुओं और उनकी मांओं के लिए बने डिलीवरी वार्ड की गैलरी में पानी भरने से इंफेक्शन का खतरा तेजी से बढ़ गया है.
स्थानीय निवासियों और मरीजों का कहना है कि ये मंजर नया नहीं है. हर साल बरसात में अस्पताल में कुछ इसी तरह का नजारा होता है. लेकिन जिला प्रशासन, सरकार के स्थानीय नुमाइंदों और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के कान पर जूं नहीं रेंगती. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कुछ नहीं किया जाता.
सिविल सर्जन ने बताया फंड की है कमी
अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर आलोक गुप्ता ने बताया,
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग वॉटर लेवल से 5 फीट नीचे हैं. आगे नई बिल्डिंग का कंस्ट्रक्शन चल रहा है. इसकी वजह से नाली ब्लॉक हो गई है. इसके चलते पानी का बैक-फ्लो हो रहा है. इस समस्या के समाधान के लिए अलग से कोई बजट नहीं है. उन्होंने ये भी बताया कि भोपाल हेडक्वार्टर से इसके लिए फंड की मांग की गई है. कंस्ट्रक्शन एजेंसी को भी लेटर लिखा गया है.
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यानी कि मामला कागजों पर दौड़ रहा है और समस्या जमीन पर है. अब कागज जमीन पर तो नहीं चलता. अधिकारियों की टेबल से कागज जमीन पर देख भी नहीं पाता. अगर देख पाता तो मामले की गंभीरता समझा पाता.
बहरहाल सिविल सर्जन ने आगे बताया कि पूरी मुस्तैदी से पानी निकालने का काम चल रहा है और जल्दी ही कैंपस से पानी निकाल दिया जाएगा. बाकी समस्या का समाधान कब तक होगा, इस पर बहुत भरोसे से वे कुछ भी नहीं बता सके.
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