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एंबुलेंस वाले ने ऑक्सीजन नहीं दी, जब दी तो खत्म हो गई, बेटा मां-बाप की बाहों में दम तोड़ गया

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में 108 नंबर एंबुलेंस का ऑक्सीजन खत्म होने के चलते 21 साल के एक युवक की मौत हुई. अजीत नाम का युवक किडनी की बीमारी से जूझ रहा था. 31 जुलाई को उसका डायलिसिस होना था. उसके पिता ने अस्पताल जाने के लिए एंबुलेंस मंगाया, लेकिन रास्ते में ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन खत्म हो गया.

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मध्य प्रदेश में एंबुलेंस का ऑक्सीजन खत्म होने के चलते एक युवक की जान चली गई. (तस्वीरें- X)

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  • मध्य प्रदेश के मंडला जिले में 21 वर्षीय अजीत बरया की सरकारी एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की गैस खत्म होने के कारण रास्ते में मृत्यु हो गई।
  • अजीत के डायलिसिस के समय अस्पतालों में शिफ्ट उपलब्ध न होने पर पिता ने 108 एंबुलेंस को बुलाया, लेकिन ऑक्सीजन न मिलने और अस्पताल ले जाने में देरी के कारण स्थिति बिगड़ी।
  • मृत्यु के बाद अस्पताल प्रभारी ने एंबुलेंस सेवा पर शिकायत स्वीकार की, पर शिकायत के लिए भोपाल जाना बताया, जिससे ग्रामीण जनता तक मदद पहुँचने में कठिनाई होती है।

कभी-कभी लगता है भारत में इलाज की व्यवस्था खुद एक बीमारी बन चुकी है. यूं तो सूरतेहाल करीब-करीब हर जगह  कमोबेश एक जैसे हैं. लेकिन ये खबर मध्य प्रदेश से है. यहां 21 साल के एक नौजवान की सांसें उसकी पिता की बाहों में थम गईं, क्योंकि सरकारी एंबुलेंस की ऑक्सीजन बीच रास्ते खत्म हो गई. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. एंबुलेंस के ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रेशर गेज शून्य (यानी खाली) दिख रहा है. युवक अपने माता-पिता के बीच बेसुध है और वे लाचारी से उसे मरते हुए देख रहे हैं.

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ऑक्सीजन खत्म होने के चलते गई जान

इंडिया टुडे से जुड़े सैयद जावेद अली की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला मध्य प्रदेश के मंडला जिले का है. यहां के सुनहरा माल गांव के अजीत बरया को किडनी की बीमारी थी. 21 साल के अजीत का डायलिसिस चल रहा था. सांस लेने में दिक्कत होने पर उनके पिता अमन बरया ने 108 नंबर एंबुलेंस को फोन किया. बेटे को ऑक्सीजन की जरूरत बताते हए जल्दी आने की गुहार लगाई. एंबुलेंस आई तो सही, लेकिन एक घंटे बाद. तब तक अजीत की तबीयत बिगड़ गई.

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जब एंबुलेंस आई तो अजीत के पिता ने उसमें ऑक्सीजन लगाने और जिला अस्पताल ले जाने को कहा. लेकिन एंबुलेंस का ड्राइवर जिला अस्पताल ले जाने की जगह पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गया. आरोप है कि उसने पिता की प्रार्थना के बावजूद अजीत को ऑक्सीजन नहीं लगाई. कथित तौर पर उसका कहना था कि डॉक्टर के कहने पर ही ऑक्सीजन लगाएगा. बाद में अजीत के पिता अमन बरया ने बताया, 

31 जुलाई को शाम 6 बजे मेरे बेटे का डायलिसिस था. लेकिन उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. मैंने जिला अस्पताल में फोन करके दिन में 2 बजे की शिफ्ट मांगी. लेकिन वहां से जवाब आया कि हमारे पास टाइम नहीं है. जिस टाइम में है, उसी में कराना होगा. इसके बाद मैंने डायलिसिस सेंटर में फोन किया. वहां से भी यही जवाब मिला. इसके बाद मैंने 108 नंबर एंबुलेंस बुलाया.

सामुदायिक केंद्र पहुंचने पर मरीज की हालत देख डॉक्टर ने उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाने को कहा. डॉक्टर ने एंबुलेंस के स्टाफ को ऑक्सीजन नहीं लगाने के लिए फटकार भी लगाई. और कहा कि इस बार ऑक्सीजन लगाकर ले जाया जाए.

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अब एंबुलेंस मंडला जिला अस्पताल की ओर बढ़ी. अजीत की हालत बिगड़ती ही जा रही थी. उसे देखकर मां-बाप की सांसें भी अटकी हुई थीं. मन में बेटे के सही सलामत बचने की दुआ मांगते हुए जा रहे थे कि तभी सिलेंडर का ऑक्सीजन खत्म हो गई. जिला अस्पताल पहुंचने के पहले ही अजीत की सांस की डोर टूट गई. 

जवान बेटे की मौत के बाद पिता अजीत ने बताया,

 गाड़ी चलने के 3 किलोमीटर बाद ही ऑक्सीजन सिलेंडर का गैस खत्म हो गया. अगर वह पहले से ऑक्सीजन लगाते तो मुझको जानकारी हो जाती. मैं बम्हनी से गैस सिलेंडर डलवा देता. मेरा बेटा सांस की वजह से तड़पते तड़पते मंडला पहुंचा और दम तोड़ दिया.

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जिला अस्पताल प्रभारी ने एंबुलेंस सर्विस पर फोड़ा ठीकरा

मंडला जिला अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर पीएल कोरी ने इस मामले में जवाब दिया है. उन्होंने बताया,

 108 नंबर एंबुलेंस सर्विस भोपाल से ऑपरेट होता है. हमलोग खुद ही कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं. 108 नंबर के ड्राइवर मरीज के साथ सहयोग नहीं करते हैं, गाड़ी में पूरी व्यवस्था भी नहीं होती है.

डॉक्टर कोरी ने आगे बताया कि ये पहला मौका नहीं है, जब इस तरह की शिकायत आई है. पहले भी एंबुलेंस दो-दो घंटे की देरी से मरीजों के पास पहुंची है. उनका कहना है कि किसी तरह की शिकायत करनी है तो भोपाल जाकर शिकायत करनी होगी. अब उन्हें कौन बताए कि भोपाल तक आम आदमी की दर्द पीड़ा पहुंच ही नहीं पाती. बीच रास्ते ही दम तोड़ देती है, जैसे अजीत ने दम तोड़ दिया.

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