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रिहायशी नक्शा पास हुआ, बना दी कमर्शियल बिल्डिंग, लखनऊ अग्निकांड ने LDA की पोल खोल दी

Lucknow Fire: लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) के दस्तावेजों में यह प्रॉपर्टी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और उनके भाइयों- सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज है. 2014 से इस बिल्डिंग का इस्तेमाल कमर्शियल कॉम्प्लैक्स के तौर पर होने लगा. लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) की भी बड़ी लापरवाही सामने आई है.

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लखनऊ की इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत. (PTI/Google Maps)

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  • लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक इमारत में 22 जून को लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई, जिसमें तीन महिलाएं शामिल थीं और सभी मृतकों की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच थी।
  • बिल्डिंग का नक्शा आवासीय था लेकिन उसका उपयोग 2014 से कमर्शियल कॉम्प्लैक्स के रूप में किया जा रहा था, जिसमें सुरक्षा इंतजाम जैसे इमरजेंसी एग्जिट की कमी थी।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के बाद एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए और गिरफ्तारियां भी हुईं।
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संतोष शर्मा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आग के कारण 15 लोगों की जान चली गई. पता चला कि जिस कॉम्प्लैक्स में आग लगी, उसका नक्शा एक रेजिडेंशियल बिल्डिंग के तौर पर पास था. 15 जिंदगियां खत्म होने के बाद लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) की कथित लापरवाही सामने आई. पुलिस ने चार लोगों- बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनिमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के फाउंडर तुषांक कृष्णा जायसवाल, एनिमेशन स्टूडियो के मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया है.

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22 जून के लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं. सभी मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच है. आजतक से जुड़े संतोष शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल्डिंग का नक्शा आवासीय भवन के तौर पर पास कराया गया था. बाद में इसका इस्तेमाल एक कमर्शियल बिल्डिंग की तरह किया जाने लगा.

लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) की नाक के नीचे लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में आवासीय इमारत में एक कमर्शियल कॉम्प्लैक्स चलता रहा. आग लगी, 15 मौतें हुईं, तब जाकर शासन-प्रशासन की आंख खुली. अग्निकांड के बाद जिस तरह की तेजी दिखाई जा रही है, अगर वैसी तत्परता पहले दिखाई जाती, तो ये घटना टल सकती थी.

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इमरजेंसी एग्जिट गेट नहीं था

बिल्डिंग के सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल हैं. आरोप है कि जिस इमारत में आग लगी, उसमें ना तो इमरजेंसी एग्जिट था, और ना ही पीछे की तरफ से बाहर निकलने का रास्ता था. आग लगने पर लोग धुएं और आग की लपटों से बचने के लिए पीछे की तरफ भागने लगे, लेकिन बाहर नहीं निकल पाए. माना जा रहा है कि धुएं की चपेट में आ गए, और दम घुटने की वजह से कई लोगों की मौत हो गई.

2014 से कमर्शियल एक्टिविटी चल रही

LDA के दस्तावेजों में यह प्रॉपर्टी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और उनके भाइयों- सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज है. वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, रामेश्वरम इंजीनियरिंग कॉलेज के संचालक हैं. 2014 से इस बिल्डिंग का इस्तेमाल कमर्शियल कॉम्प्लैक्स के तौर पर होने लगा. जांच की जा रही है कि इमारत चलाने और इसके इस्तेमाल को लेकर सभी जरूरी इजाजत ली गई थीं या नहीं.

Lucknow Fire Building
लखनऊ नगर निगम द्वारा जारी हाउस टैक्स बिल. (ITG)
CM योगी ने SIT का गठन किया

22 जून को हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तुरंत अलीगढ़ से वापस लखनऊ लौट गए. उन्होंने घटनास्थल का मुआयना किया और अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए.

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मुख्यमंत्री ने एक दो सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है, जिसमें अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग) और प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन शामिल हैं.

वीडियो: लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों ने क्या बताया?

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