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लीलावती अस्पताल ट्रस्ट ने HDFC के CEO को हटाने की मांग की, लगाए पैसों की धोखाधड़ी के आरोप

Lilavati Trust के आरोपों का जवाब HDFC Bank की तरफ से दिया गया है. HDFC बैंक के प्रवक्ता ने कहा है कि बैंक के CEO शशिधर जगदीशन की छवि बिगाड़ने के लिए प्रशांत किशोर मेहता इस तरह के आरोप लगा रहे हैं. आखिर ये मामला है क्या?

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लीलावती ट्रस्ट ने HDFC बैंक के CEO पर गंभीर आरोप लगाए हैं. (फाइल फोटो: PTI)

लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट (LKMM Trust) ने HDFC बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जगदीशन पर ट्रस्ट से संबंधित पैसों की धोखाधड़ी के कई मामलों में शामिल होने के आरोप लगे हैं. ट्रस्ट ने जगदीशन को तत्काल निलंबित करने और उन पर मुकदमा चलाने की मांग की है. HDFC के प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन किया है और ट्रस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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LKMM Trust में कैसा झगड़ा चल रहा है?

इस ट्रस्ट के पुराने और नए ट्रस्टियों के बीच सालों से झगड़ा चल रहा है. किशोर मेहता ने 1997 में अपनी मां के नाम पर लीलावती अस्पताल की स्थापना की. कुछ समय बाद उनके छोटे भाई विजय मेहता के परिवार के लोग भी ट्रस्टियों के बोर्ड में शामिल हुए. लेकिन साल 2002-03 में विवाद हो गया. आरोप लगे कि किशोर मेहता विदेश में इलाज कराने गए थे, इसी दौरान विजय मेहता के परिवार ने ट्रस्ट पर अपना नियंत्रण बनाने के लिए बोर्ड मेंबर्स के जाली हस्ताक्षर किए. बाद में किशोर और विजय दोनों की मौत हो गई लेकिन ये लड़ाई चलती रही.

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साल 2023 में ट्रस्ट का कंट्रोल किशोर मेहता के परिवार को दिया गया.

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शशिधर जगदीशन और ट्रस्ट के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जड़ें यहीं से जुड़ी हैं. दरअसल, नए ट्रस्टियों ने आरोप लगाया है कि घोटाले के एक मामले में पुराने ट्रस्टियों ने पैसों का गबन किया और इसमें शशिधर जगदीशन भी शामिल थे.

लीलावती ट्रस्ट ने जगदीशन के निलंबन की मांग की

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, LKMM ट्रस्ट ने शशिधर जगदीशन पर आरोप लगाते हुए कहा,

बॉम्बे मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर FIR नंबर 818/2025 दर्ज की गई थी. जब्त की गई कैश डायरी से पता चला कि कुछ ट्रस्टियों ने 14.42 करोड़ रुपये का गबन किया था. इनमें से 2.05 करोड़ रुपये जगदीशन को मिले थे. इससे पता चलता है कि वो प्रत्यक्ष रूप से इस गड़बड़ी में शामिल थे.

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LKMM ट्रस्ट ने ये भी बताया कि इस मामले में सात अन्य आरोपी भी हैं. ट्रस्ट ने पैसों से जुड़े कई अन्य मामलों में भी जगदीशन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ट्रस्ट ने कहा है,

अस्पताल के कर्मचारियों को CSR फंड के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया. इससे सबूतों को नष्ट करने और न्याय की प्रक्रिया में बाधा डालने की मंशा का पता चलता है. मामले में कई शिकायतों के बाद भी HDFC बैंक ने कार्रवाई नहीं की.

ट्रस्ट ने अपने बयान में आगे कहा है,

हम HDFC बैंक, RBI, SEBI और वित्त मंत्रालय से मांग करते हैं कि वो जगदीशन को सस्पेंड करें. उनको सभी कार्यकारी और बोर्ड की भूमिकाओं से तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए. 

ट्रस्ट ने जगदीशन पर RBI के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है.

ये भी पढ़ें: मुंबई के चर्चित लीलावती अस्पताल में 1250 करोड़ के गबन का आरोप, 'काला जादू' वाला क्या एंगल है?

HDFC बैंक ने क्या कहा?

HDFC बैंक के प्रवक्ता ने कहा है कि जगदीशन की छवि बिगाड़ने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने LKMM ट्रस्टी प्रशांत किशोर मेहता और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशांत और उनके परिवार के लोगों पर HDFC बैंक का काफी पैसा बकाया है.

बैंक ने कहा कि प्रशांत से पैसे वसूलने के लिए पिछले दो दशक से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन हर बार कोई न कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है. HDFC प्रवक्ता ने कहा,

सुप्रीम कोर्ट सहित सभी स्तरों पर निराशा हाथ लगने के बाद, अब प्रशांत ने ये तरीका खोजा है. वो बैंक के MD और CEO पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं. इसका एकमात्र उद्देश्य है बैंक को डराना और धमकाना, ताकि पैसे वसूलने की प्रक्रिया को बाधित किया जा सके.

प्रवक्ता ने कहा कि वो अपने MD की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.

प्रशांत मेहता ने क्या कहा?

इस मामले पर ट्रस्टी प्रशांत मेहता की भी प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा है कि ये कोई निजी झगड़ा नहीं है, ये चैरिटी लॉ, सार्वजनिक धन और कानून के साथ विश्वासघात है. उन्होंने कहा कि जगदीशन ने सच्चाई को दबाने के लिए अपने संस्थागत पद का दुरुपयोग किया है.

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