नौकरी की पहली सैलरी मिलते ही ज़्यादातर लोग अनाश-शनाप खर्चों और नई चीजों को खरीदने की प्लानिंग में लग जाते हैं. लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट मानते हैं कि करियर की शुरुआत में लिए गए सही फैसलों से आर्थिक रूप से भविष्य सुरक्षित होता है. इनका कहना है कि नौकरी शुरू होते ही अगर आपने ये तीन काम कर लिये तो पैसे की कभी दिक्कत नहीं आएगी. जानकार कहते हैं कि आमतौर पर लोग नौकरी के शुरुआती सालों में बचत को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही समय सबसे अहम होता है. अगर शुरुआत में ही टर्म इंश्योरेंस, इंप्लायी प्रॉविडेंट फंड (EPF) के साथ वॉल्यूंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) और नेशनल पेंशन फंड (NPS) जैसे कदम उठा लिये जाएं, तो भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो जाती है. आइए जानते हैं .
पहली नौकरी मिलते ही कीजिए ये 3 काम, जिंदगी बन जाएगी, कभी हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे
पहली नौकरी की पहली सैलरी मिलते ही ज़्यादातर लोग अनाश-शनाप खर्चों और नई चीजों को खरीदने की प्लानिंग में लग जाते हैं. लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट मानते हैं कि करियर की शुरुआत में लिए गए सही फैसलों से आर्थिक रूप से भविष्य सुरक्षित होता है.
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नौकरी की शुरुआत में टर्म इंश्योरेंस जरूर लें. अगर कोई आदमी टर्म इंश्योरेंस लेता है और बीमाधारक की असमय मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी बीमाधारक के परिवार या नॉमिनी को पूरी बीमा राशि दे देती है. लेकिन अगर पॉलिसी अवधि पूरी होने तक व्यक्ति जीवित रहता है, तो बीमा कंपनी पैसा नहीं देती है. ऐसा इसलिए कि यह केवल सुरक्षा के लिए होता है. मान लीजिए आपने 30 साल के लिए 1 करोड़ रुपये का टर्म इंश्योरेंस लिया है. इस दौरान आप बीमा का प्रीमियम समय से चुकाते हैं लेकिन अगर 30 साल के अंदर आपकी असमय मृत्यु हो जाती है तो आपके परिवार को बीमा कंपनी 1 करोड़ रुपये देगी. वहीं अगर 30 साल बाद भी आप जीवित रहते हैं तो पॉलिसी खत्म हो जाएगी. हालांकि आप अपनी सुविधा मुताबिक बीमा पॉलिसी चुन सकते हैं.
निवेश सलाहकार विनोद रावल का कहना है कि नौकरी की शुरुआत में ही टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) लेना काफी फायदेमंद होता है. इसकी वजह है कि जितनी जल्दी टर्म प्लान खरीदेंगे उतना ही कम प्रीमियम (बीमा की किस्त) चुकाना होगा. टर्म इंश्योरेंस की सबसे खास बात ये है कि बहुत कम प्रीमियम देकर बड़ी बीमा राशि का कवर लिया जाता है. ऐसे में कम उम्र में टर्म इंश्योरेंस खरीदकर परिवार को आर्थिक सुरक्षा दे सकते हैं. आम तौर पर आपका बीमा कवर आपकी सालाना कमाई का 10–15 गुना होना चाहिए.
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EPF के साथ VPF में निवेश बढ़ाएंप्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले लोगों का EPF यानी इंप्लायी प्रॉविडेंट कटता है. इसमें कर्मचारी की सैलरी का करीब 12% हर महीने अपने आप जमा होता है. कंपनी भी लगभग उतना ही योगदान देती है. इस पैसे पर सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है और लंबे समय में यह एक बड़ा रिटायरमेंट फंड बन जाता है. फिलहाल ईपीएफ पर 8.25 परसेंट का ब्याज मिलता है. वहीं, वीपीएफ EPF का ही विस्तार है. इसमें कर्मचारी चाहें तो ईपीएफ के 12% योगदान के अलावा अपनी सैलरी का अतिरिक्त हिस्सा जमा कर सकता है. इस अतिरिक्त राशि पर भी EPF के बराबर ही ब्याज मिलता है.
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष और सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर संजीत संजीत सिंह ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि जो लोग प्राइवेट नौकरी करते हैं और अपना आर्थिक भविष्य सुरक्षित करना चाहते हैं ऐसे लोगों को ईपीएफ के साथ वीपीएफ में भी निवेश जितनी जल्दी हो सके शुरू कर देना चाहिए. उनका कहना है कि वीपीएफ में पैसा जमा करवाने से आपका रिटायरमेंट कॉर्पस बहुत बड़ा हो सकता है. ऐसे में जब आप रिटायर होंगे तो आपके पास अच्छी खासी राशि एकत्र हो जाएगी और रिटायरमेंट के बाद आपको किसी के सामने हाथ फैलाने की नौबत नहीं आएगी.
प्रोफेसर संजीत का कहना है कि रिटायरमेंट ही नहीं नौकरी जाने पर या कई जरूरतों के समय भी ये पैसा काफी काम आ सकता है. वीपीएफ पर ब्याज दर आमतौर पर FD से ज्यादा होती है. EPF की तरह ही फिलहाल VPF पर सालाना 8.25 पर्सेंट का ब्याज मिल रहा है. लेकिन ध्यान रहे कि EPF वाला ब्याज तो मिलता है लेकिन सरकार अपना अंशदान नहीं करती है. हालांकि ईपीएफ की ब्याज दरें हर साल तय होती हैं. वीपीएफ की खास बात ये है कि सब कुछ आपके मौजूदा EPF अकाउंट में ही जमा होगा. कोई नया अकाउंट नहीं खोलना पड़ता. इस तरह से आप ईपीएफ और वीपीएफ के जरिये सुरक्षित तरीके से काफी मोटा पैसा जोड़ सकते हैं.
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NPS में निवेश शुरू करेंतीसरा जरूरी कदम है NPS में निवेश. नेशनल पेंशन सिस्टम एक सरकारी रिटायरमेंट निवेश योजना है. इसे खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों के लिए बनाया गया है. इसमें आप हर महीने या सालाना कुछ पैसा निवेश करते हैं. दिल्ली यूनीवर्सिटी के माता सुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्वार्थ राठौर ने बताया कि यह पैसा शेयर (equity), सरकारी बॉन्ड और दूसरे सुरक्षित साधनों में लगाया जाता है. इसके पीछे मकसद ये रहता है कि एनपीएस में निवेश करने वालों के लिए रिटायरमेंट तक एक बड़ा फंड तैयार हो सके. मान लीजिए अगर आप 25 साल की उम्र में हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो 60 साल की उम्र तक एक बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बन सकता है. सिद्वार्थ का कहना है कि एनपीएस में जमा पैसा सीधे सरकार निवेश नहीं करती, बल्कि इसे पेंशन फंड रेगुलेटरी एवं अथॉरिटी द्वारा अधिकृत पेंशन फंड मैनेजर निवेश करते हैं. जब निवेशक 60 साल की उम्र तक पहुंचता है, तो वह जमा फंड का एक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकता है और बाकी पैसे से पेंशन मिलती रहती है.
इस स्कीम की एक और खास बात ये है कि इसमें निवेश करने पर टैक्स में अतिरिक्त छूट भी मिलती है, इसलिए इसे रिटायरमेंट प्लानिंग का एक अच्छा विकल्प माना जाता है. टैक्स एक्सपर्ट विपिन जैन ने लल्लनटॉप को बताया कि एनपीएस में निवेश पर इनकम टैक्स की धारा 80CCD (1B) के तहत 50,000 रुपये तक अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है.
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