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बिल्ली पालने का शौक है तो Cat Scratch Disease भी जान लें, 8 साल का बच्चा मरते-मरते बचा है

Cat-scratch disease: कोलकाता में एक बच्चे को बिल्ली के खरोंचने से 'कैट-स्क्रैच बीमारी' हो गई. शुरू में डॉक्टर्स को समझ नहीं आ रहा था कि बच्चे को हुआ क्या है. उसे बस दौरे पड़े जा रहे थे. लेकिन जब उसकी हिस्ट्री देखी, तो पता लगा कि उसे क्या हुआ है.

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माता-पिता ने बताया कि बच्चा बिल्ली के साथ सोता था. (फोटो-Pexels)

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  • कोलकाता में 8 साल के बच्चे को पालतू बिल्ली के पंजा लगने के बाद 'कैट-स्क्रैच डिजीज' हुई, जिससे बच्चे को गंभीर न्यूरोलॉजिकल दौरे पड़े और उसे ICU में भर्ती करना पड़ा।
  • कैट-स्क्रैच डिजीज बिल्लियों के खरोंचने, काटने या उनके लार के संपर्क में आने से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण है, जिसे पहचानने में डॉक्टर्स को काफी समय लगा।
  • बच्चे के इलाज के बाद उसे वेंटिलेटर से हटाकर 10 दिन में घर भेजा गया, और इस बीमारी से बचाव के लिए पालतू जानवरों के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

‘बिल्ली ने मारा पंजा…’ सिर्फ बच्चों को बहलाने वाली कविता का हिस्सा भर नहीं है. ये पंजा सच में लग जाए तो मामला गंभीर हो सकता है. कोलकाता में 8 साल के एक बच्चे को बिल्ली का पंजा लग गया. इसके बाद उसे ऐसी रेयर बीमारी हुई जिसका कई दिनों तक पता ही नहीं चला. बच्चे को ICU में भर्ती तक करवाना पड़ा.

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बाद में माता-पिता से बातचीत के दौरान सामने आया कि बिल्ली के खरोंचने की वजह से बच्चों को एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी हो गई. इसे ‘कैट-स्क्रैच डिजीज’ कहा जाता है. ये बैक्टीरियल इन्फेक्शन बिल्ली के काटने, खरोंचने या उसके सलाइवा के संपर्क में आने से हो सकता है.

शुरू में डॉक्टर्स भी नहीं समझ पा रहे थे कि आखिर बच्चे को हुआ क्या है. कई टेस्ट हुए पर रिपोर्ट्स से कुछ साफ पता नहीं चला. डॉक्टर्स अलग-अलग बीमारियों की आशंका जता रहे थे. मगर जब उन्हें पता चला कि बच्चा अपनी पालतू बिल्ली के साथ सोता है, तो उन्हें शक हुआ कि उसे कैट-स्क्रैच बीमारी हो सकती है. टेस्ट करने पर ये कंफर्म भी हो गई.

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बच्चे को पड़ा था दौरा

मामला दक्षिण कोलकाता का है. 10 जुलाई को बच्चे को घर पर दौरा पड़ा था. माता-पिता उसे दिखाने के लिए हॉस्पिटल ले गए. शुरू में सभी को आम न्यूरोलॉजिकल समस्या लग रही थी. लेकिन जल्दी ही ये केस 'स्टेटस एपिलेप्टिकस' में बदल गया. स्टेटस एपिलेप्टिकस एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें मरीज को लंबे समय तक दौरे पड़ते रहते हैं. बिना होश में आए भी उसे दौरे आते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बच्चे को कई एंटी-सीजर दवाएं दी गईं. लेकिन कोई आराम नहीं हुआ. बच्चे की हालत बिगड़ती देख उसको पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) में शिफ्ट किया. वहां उसे वेंटिलेटर पर गहरी बेहोशी में रखा गया और सांस लेने के लिए गले में एक पतली ट्यूब डाली गई.

मामले को समझने के लिए अस्पताल की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने संक्रामक और ऑटोइम्यून बीमारियों की जांच शुरू की. ब्रेन MRI और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड का टेस्ट हुआ. मगर इंफेक्शन का कोई सटीक कारण पता नहीं चला.

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दौरा पड़ने से पहले हुए थे रैशेज

इसके बाद डॉक्टर को 'न्यू-ऑनसेट रिफ्रैक्टरी स्टेटस एपिलेप्टिकस' (NORSE) का शक हुआ. यह एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल सिंड्रोम है जिसमें अचानक गंभीर दौरे पड़ने लगते हैं. इनका इलाज मुश्किल होता है.

ट्रीटमेंट के दौरान बच्चे को बुखार भी आ गया. जिसके बाद पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी और संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञों से सलाह ली गई. बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टर्स को बताया कि दौरे पड़ने से लगभग दस दिन पहले उसके पैरों पर हल्के गुलाबी रंग के चकत्ते पड़ गए थे. उसकी बाईं बगल में लिम्फ नोड्स का आकार भी काफी बढ़ गया था. तब डॉक्टर्स को 'कैट-स्क्रैच बीमारी' का शक हुआ.

बच्चे का एंटीबॉडी टेस्ट हुआ, जिससे पता चला कि इंफेक्शन का कारण 'बार्टोनेला' (Bartonella) बैक्टीरिया है. बार्टोनेला संक्रमण बैक्टीरिया के एक समूह के कारण होता है जो जानवरों (बिल्ली, कुत्ता, चूहा आदि) के खरोंचने या काटने से फैलता है. यह पिस्सू और जूं जैसे कीड़ों से भी फैल सकता है. 

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पैरेंट्स ने डॉक्टर्स को बताया कि बच्चा बिल्ली के साथ सोता था. हो सकता है खेल-खेल में या अनजाने में उसने बच्चे को पंजा मार दिया हो. बीमारी का पता लगने के बाद बच्चे का इलाज सही दिशा में चला. 5 दिन बाद उसे वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया गया और लगभग 10 दिन बाद घर भेज दिया गया.  

कितनी खतरनाक है कैट-स्क्रैच बीमारी?

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पीएन रेनजेन ने बताया कि कैट स्क्रैच बीमारी में मुख्य रूप से खरोंच वाली जगह के पास लिम्फ नोड्स में सूजन, बुखार और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कुछ दुर्लभ मामलों में इससे गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं. इनमें एन्सेफेलोपैथी भी शामिल है. एन्सेफेलोपैथी होने पर दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता.

कैट स्क्रैच बीमारी के लक्षणों में कन्फ्यूजन, दौरे पड़ना, तेज सिरदर्द और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं. संक्रमण से बचने के लिए बिल्लियों के साथ जोर-जबरदस्ती वाले खेल न खेलें. पालतू जानवरों पर पिस्सुओं (fleas) का कंट्रोल करना भी जरूरी है, क्योंकि बिल्लियों में इस बैक्टीरिया को फैलाने में पिस्सुओं की अहम भूमिका होती है.

बिल्ली के खरोंचने या काटने के बाद लगातार बुखार, लिम्फ नोड्स में सूजन या न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे असामान्य लक्षण दिखने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें.

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