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आंबेडकर ने नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया था? किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं

Kiren Rijiju ने इस बारे में कहा कि तत्कालीन कैबिनेट में BR Ambedkar को अर्थव्यवस्था और योजना मंत्रालय नहीं दिया गया था. रिजिजू ने कहा कि आंबेडकर को केवल कानून मंत्रालय दिया गया था. नेहरू पर और क्या बड़े आरोप लगा दिए कानून मंत्री ने?

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किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर सवाल उठाए हैं. (तस्वीर: इंडिया टुडे आर्काइव/PTI)

लोकसभा में संविधान पर चर्चा का दूसरा दिन है. इसी क्रम में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने पूछा है कि बाबासाहब भीमराव आंबेडकर (Bhimrao Ambedkar Resignation) ने नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया था? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने साजिश के तहत आंबेडकर को लोकसभा चुनाव में हराया था. उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने खुद को भारत रत्न दिया था. लेकिन 1990 तक भीमराव आंबेडकर को भारत रत्न क्यों नहीं दिया?

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किरेन रिजिजू ने कहा,

“संविधान के 75 साल पूरे हुए हैं और एक आदिवासी महिला भारत के राष्ट्रपति के रूप में काम कर रही हैं. भारत अल्पसंख्यकों को न केवल कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि इसमें सकारात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है. कांग्रेस पार्टी के नेता नेहरू ने कभी भी अनुसूचित जाति (SC) के कल्याण के बारे में बात नहीं की और इससे हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि पंडित नेहरू हमेशा मुसलमानों के लिए खड़े थे.”

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एक RTI एप्लीकेशन के हवाले से छपी द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के राष्ट्रपति ने 11 अक्टूबर, 1951 को कानून मंत्री के पद से डॉ. आंबेडकर का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था. हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि उनके पास उस इस्तीफे की कॉपी उपलब्ध नहीं है. इसी रिपोर्ट में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के एक बयान का भी जिक्र किया गया है. साल 2016 में कोविंद बिहार के राज्यपाल थे. इसी दौरान एक सेमिनार में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था,

“डॉ. आंबेडकर ने जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था. क्योंकि सरकार ने सुधारवादी हिंदू कोड बिल का समर्थन करने से इनकार कर दिया था.”

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Ambedkar को योजना मंत्रालय नहीं मिला?

रिजिजू ने इस बारे में कहा कि तत्कालीन कैबिनेट में बीआर आंबेडकर को अर्थव्यवस्था और योजना मंत्रालय नहीं दिया गया था. रिजिजू ने कहा कि आंबेडकर को केवल कानून मंत्रालय दिया गया था. उन्होंने आगे कहा,

“…मैं ऐसे क्षेत्र से आता हूं जहां मैंने पहले हवाई जहाज देखे और बाद में कार देखी. क्योंकि मेरे सांसद बनने के बाद ही कारों के लिए सड़कें बनीं. प्रधानमंत्री ने मुझे उस जगह बैठने का मौका दिया जहां बाबासाहब भीमराव आंबेडकर बैठे थे. मैं इस देश का कानून मंत्री बना. कानून मंत्री का पद संभालने से पहले मैंने सबसे पहले ये समझने की कोशिश की थी कि बाबासाहब आंबेडकर क्या चाहते थे? उनके मन में कौन सी बातें थीं जो वो नहीं कर पाए? पहली बात जो मेरे दिमाग में आई, वो ये थी कि वो इस देश के पहले कानून मंत्री बने. लेकिन उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया? इस बारे में अक्सर लोगों के सामने चर्चा नहीं होती. मैंने वो पत्र पढ़ा जो उन्होंने पंडित नेहरू को लिखा था जो उस समय प्रधानमंत्री थे… हमारा संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे सुंदर संविधान भी है.”

आंबेडकर ने 1952 के प्रथम आम चुनाव में बम्बई उत्तर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन अपने पूर्व सहायक और कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार नारायण सदोबा काजरोलकर से हार गए थे.

कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “तत्कालीन रक्षामंत्री ने कहा था कि पूर्वोत्तर राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें नहीं बनाई जाएंगी, ताकि चीनी घुसपैठ को रोका जा सके.” इस बयान पर लोकसभा में हंगामा शुरू हो गया और विपक्षी सांसदों ने खड़े होकर अपने तर्क रखे.

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