‘दीप से दीप जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो.’ ये गाना लिखने वाले कवि को क्या पता था कि आने वाले समय में दीप से दीप जलाना प्रेम की गंगा नहीं बहाएगा, विवाद की धुंध जरूर फैला देगा. केरल में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग (IUML) की महिला विधायक हैं फातिमा थाहलिया. वह एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन कार्यक्रम में गई थीं. प्रोग्राम की शुरुआत ही दीप प्रज्ज्वलन यानी दीप जलाकर की गई. मुख्य अतिथि फातिमा के हाथों कार्यक्रम के संचालकों ने दीप जलवा दिया. इसने केरल के ही एक प्रमुख मुस्लिम संगठन को नाराज कर दिया.
मुस्लिम महिला MLA के दीप जलाने पर भड़का इस्लामी संगठन, लोगों ने पूछा- 'गलत क्या किया?'
केरल की IUML विधायक फातिमा थाहलिया ने एक कार्यक्रम में निलाविलक्कु (दीप) जलाया तो विवाद हो गया. समस्ता केरल जमिय्यतुल उलमा ने इस पर आपत्ति जताई है. संगठन का कहना है कि मुसलमानों को अन्य धर्मों की धार्मिक परंपराओं में भाग लेने से बचना चाहिए.


संगठन ने एक बयान जारी कर फातिमा के दीप जलाने पर सवाल उठाए और नसीहत दी कि मुसलमानों को ऐसे कामों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए, जो दूसरे धर्मों से जुड़ी परंपराएं हैं और इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित नहीं हैं.
मुस्लिम विधायक के दीप जलाने पर विवादकेरल में सुन्नी-शाफी इस्लामी विद्वानों का एक संगठन है- समस्ता केरल जमिय्यतुल उलमा. इस संगठन ने दीया जलाने पर फातिमा की आलोचना करते हुए कहा कि मुसलमानों को उन समारोहों में हिस्सा लेने से बचना चाहिए जो इस्लाम की शिक्षाओं पर आधारित नहीं हैं और जो दूसरे धर्म के लोग अपनी जरूरी परंपरा के रूप में मनाते हैं.
केरल में दीप को निलाविलक्कु कहते हैं. उलेमा ने कहा कि निलाविलक्कु जलाने की प्रथा मुसलमानों की नहीं है. यह गैर मुस्लिम समुदाय की एक खास परंपरा है. ये उनका धार्मिक समारोह है. ऐसे में मुसलमानों को बाकी धर्मों के लोगों से सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए.
संगठन के एक नेता अब्दुल हमीद फैजी ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी लिखी. यहां भी उन्होंने संगठन की बातें दोहराईं. फैजी ने कहा कि इस्लाम अन्य धर्मों के लोगों से अच्छे संबंधों की वकालत करता है. लेकिन धार्मिक रीति-रिवाज अपनाने के मामले में इसका रुख साफ है.
फैजी ने कहा, “इस्लाम का कानून साफ और स्पष्ट है. यह अपने फॉलोअर्स को बाकी धर्मों के लोगों से दोस्ती और सद्भाव का सख्त निर्देश देता है. पैगंबर मोहम्मद ने अपने साथियों और परिवारों से कहा था कि जब भी किसी बकरे की कुर्बानी दी जाए और उसे पकाया जाए तो मांस का पहला हिस्सा किसी यहूदी पड़ोसी को दिया जाना चाहिए. लेकिन इस्लाम अपने अनुयायियों को अन्य धर्मों के रीति-रिवाजों की प्रैक्टिस करने से रोकता है.”
फातिमा वाले मामले पर बोलते हुए फैजी ने कहा कि इस केस की विस्तार से जांच की गई. अगर कोई मुसलमान इस तरह के समारोह में शामिल होता है तो इस्लाम के दायरे से बाहर निकलने वाला काम माना जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि अगर ऐसा काम बिना किसी मान्यता को कबूल किए या सिर्फ इसलिए किया गया है कि आप गैर-मुसलमान लोगों की तरह दिखें, तब तो यह 'पाप' है. फैजी ने ये जरूर साफ किया कि निलाविलक्कू को रोशनी करने के लिए इस्तेमाल करने पर रोक नहीं है.
सोशल मीडिया पर आलोचनासमस्ता केरल जमिय्यतुल उलमा के इस टेक पर सोशल मीडिया ने भी प्रतिक्रिया दी है. मुस्लिम नाम वाले कई यूजर्स ने इसे लेकर संगठन की आलोचना की है. कई लोगों ने तर्क दिया है कि दीप जलाना इस्लाम के खिलाफ नहीं है. फेसबुक यूजर सिराजुद्दीन शेख ने लिखा,
उद्घाटन का दीपक जलाना बिल्कुल भी गुनाह नहीं है. मैंने ऐसे दीप कई भारतीय मस्जिदों में देखे हैं. मुसलमानों को गर्व होना चाहिए कि एक मुस्लिम बेटी ने इस समारोह में हिस्सा लिया.
ओमैर आलम ने कहा कि दीया जलाना कब से इस्लाम विरोधी हो गया? मतलब कुछ भी. कई और यूजर्स ने भी ये तर्क दिया कि दीया जलाने को किसी के लिए भी वर्जित नहीं माना जाना चाहिए. क्योंकि कई मस्जिदों और दरगाहों में भी दीप जलाए जाते हैं.
कौन हैं फातिमा थाहलिया?फातिमा थाहलिया यानी केरल की जिन विधायक को लेकर ये विवाद हुआ है, वह मुस्लिम लीग की पहली महिला विधायक हैं. वामपंथ का गढ़ मानी जाने वाली पेरामब्रा सीट पर उन्होंने भारी उलटफेर करते हुए सीपीएम नेता और पूर्व मंत्री रामकृष्णन को 5 हजार से ज्यादा वोटों से हरा दिया था. फातिमा पेशे से वकील हैं. कोझिकोड लॉ कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (एमएसएफ) के साथ जुड़कर अपनी राजनीति शुरू की थी. वो एमएसएफ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं.
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