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एक्टर बालचंद्र मेनन के मामले में बोला हाई कोर्ट, "सिर्फ महिला नहीं पुरुषों की भी गरिमा होती है"

केरल हाई कोर्ट ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर बालचंद्र मेनन को जमानत देते हुए ये टिप्पणी की है. जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच ने मेनन को दो हफ्ते के भीतर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के सामने पेश होने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

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अदालत ने मेनन को ये आदेश भी दिया कि वो गवाहों को प्रभावित न करें या किसी भी तरह से जांच में बाधा न डालें. (फोटो- X)

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर बालचंद्र मेनन को केरल हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने एक महिला एक्टर की 'गरिमा को ठेस पहुंचाने' के आरोप के मामले में मेनन को जमानत दी है. आदेश देते हुए कोर्ट ने एक टिप्पणी की जिसकी काफी चर्चा है. कोर्ट ने कहा, “महिलाओं की तरह पुरुषों में भी गर्व और गरिमा की भावना होती है.”

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मामला 2007 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई घटना से जुड़ा है. बालचंद्र मेनन पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला कलाकार की ‘गरिमा को ठेस’ पहुंचाई थी. लेकिन इसकी शिकायत दर्ज होने में सालों लग गए. केरल फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोषण की शिकायतों की जांच करने वाली जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद इस साल सितंबर में ये केस दर्ज किया गया था. 

मामले की सुनवाई जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच कर रही थी. इंडिया टुडे से जुड़ीं दीप्ति राव की रिपोर्ट के मुताबिक एक्टर बालचंद्र मेनन की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर करते हुए बेंच ने भी कहा कि आरोप कथित घटना के 17 साल बाद लगाए गए थे. 

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केरल हाई कोर्ट में दायर याचिका में मेनन ने कहा था कि शिकायत दर्ज करने में देरी का उद्देश्य उनकी ‘प्रतिष्ठा को नीचे दिखाना’ था. रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने मेनन के इस दावे को स्वीकार करते हुए कहा,

"ये एक तथ्य है कि पीड़िता ने कथित घटना के 17 साल बाद शिकायत दर्ज कराई थी. एक महिला के बयान के आधार पर, वो भी 17 साल बाद ये मामला दर्ज कराया गया है. सभी को ये याद रखना चाहिए कि गौरव और गरिमा केवल महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी है."

जमानत देते हुए जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की बेंच ने मेनन को दो हफ्तों के भीतर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के सामने पेश होने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है. बेंच ने कहा कि अगर पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने का फैसला करती है, तो उन्हें 50,000 रुपये के बॉन्ड और दो सॉल्वेंट श्योरिटीज़ पर रिहा किया जाएगा. इतना ही नहीं, अदालत ने मेनन को ये आदेश भी दिया कि वो गवाहों को प्रभावित न करें या किसी भी तरह से जांच में बाधा न डालें.

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इस मामले में महिला की शिकायत के आधार पर ‘गरिमा को ठेस पहुंचाने’ के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग करने, महिला की गरिमा का अपमान करने और आपराधिक धमकी से जुड़ी IPC की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी. 30 अक्टूबर को मेनन को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया था. बाद में इसे उनकी याचिका के बाद अंतिम आदेश आने तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था.

एक्टर बालचंद्र मेनन पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हैं. वो 40 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं. उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है और जांच में सहयोग करने की बात कही है.

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