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CM सरमा ने बीफ बैन किया तो उन्हीं की पार्टी के नेता ने कहा, "खाने की आजादी..."

केरल बीजेपी के नेता मेजर रवि ने बीफ बैन के फैसले का समर्थन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि इससे समाज में 'गलत संदेश जाएगा और सांप्रदायिक तनाव फैलेगा'.

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केरल बीजेपी उपाध्यक्ष मेजर रवि ने हिमांता बिस्वा सरमा के फैसले का विरोध किया है. (तस्वीर:इंडिया टुडे)

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बीफ बैन वाले फैसले के खिलाफ बीजेपी में ही विरोध के सुर उठ गए हैं. केरल में बीजेपी के उपाध्यक्ष मेजर रवि ने असम सरकार के बीफ पर बैन फैसले का समर्थन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि इससे समाज में ‘गलत संदेश जाएगा और सांप्रदायिक तनाव फैलेगा’. बीती 4 दिसंबर को असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने बीफ की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.

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बीफ बैन पर बीजेपी में ही फूट

हालांकि मेजर रवि ने असम सरकार के फैसले का समर्थन नहीं किया, लेकिन साथ में ये भी कहा कि बीफ और गाय में अंतर है. उन्होंने समाचार एजेंसी ANI से कहा,

“सबसे पहले हमें यह समझना जरूरी है कि बीफ क्या है और गोमांस क्या है. बीफ भैंस और बैल का मांस होता है. अगर कोई उसे खाना चाहता है तो उसे खाने देना चाहिए. लोगों क्या खाना चाहते हैं उसकी स्वतंत्रता उन्हें मिलनी चाहिए. अगर आप अचानक से बीफ पर बैन लगा देंगे तो इससे समाज में कई लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा.”

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उन्होंने कहा,

“हिंदू धर्म के लोगों के लिए गाय का एक भावनात्मक स्थान हैं. हम गाय की पूजा करते हैं. मैंने ऐसी कोई जगह नहीं देखी है जहां गाय काटी जाती है. हमें लोगों को गलत संदेश नहीं देना चाहिए नहीं तो समाज में सांप्रदायिक तनाव फैलेगा.”

यह भी पढ़ें:असम सरकार ने गोमांस बेचने पर लगाया बैन, फैसले का विरोध शुरू

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इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 दिसंबर को राज्य में गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया. उन्होंने बताया था कि असम कैबिनेट ने प्रदेश के होटलों, रेस्त्रां और सार्वजनिक स्थानों पर गोमांस की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है. असम के मुख्य विपक्षी दल AIUDF ने राज्य सरकार के इस फैसले को लेकर सवाल उठाए थे. 

मुख्यमंत्री हिमंता ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करके फैसले का एलान किया. लिखा,

“हम तीन साल पहले गोहत्या को रोकने के लिए कानून लाए थे. इस दौरान हमें काफी सफलता मिली. अब हमने इसी कड़ी में आगे जाकर निर्णय किया है कि असम में गोमांस किसी भी होटल या रेस्टोरेंट में परोसा नहीं जाएगा. इसके साथ ही किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम या जगह पर भी गोमांस को परोसना प्रतिबंधित होगा.”

असम सरकार गोहत्या को रोकने के लिए साल 2021 में एक कानून लाई थी. असम मवेशी संरक्षण अधिनियम 2021. इसके तहत उन इलाकों में मवेशियों की हत्या और गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध है जहां हिंदू, जैन और सिख बहुसंख्यक रहते हैं और किसी मंदिर के पांच किलोमीटर के दायरे में हैं. लेकिन 4 दिसंबर को लिए गए फैसले के बाद अब इस दायरे में सभी सार्वजनिक स्थान आ जाएंगे.

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