‘टोरंटो में बर्तन मांजने के कितने पैसे मिलते है?’ ये कॉमेंट आया था झारखंड की उस लड़की की पोस्ट पर, जो टोरंटो में काम करती है. व्लॉगिंग का शौक है तो दिन भर के काम का वीडियो सोशल मीडिया पर भी डालती है. उसके ऐसे ही किसी पोस्ट पर एक यूजर ने ये कॉमेंट किया.
झारखंड की लड़की से पूछा, ' टोरंटो में बर्तन मांजने का कितना मिलता है?' जवाब सुन ट्रोल गड़ गए
टोरंटो में काम करने वाली झारखंड की रेचल को एक यूजर ने नीचा दिखाने के लिए पूछा कि वहां बर्तन मांजने के कितने पैसे मिलते हैं. रेचल ने गुस्सा करने के बजाय अपने कॉर्पोरेट ऑफिस का पूरा दिन दिखाते हुए ऐसा व्यंग्यात्मक जवाब दिया कि वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

लेकिन ये सवाल ‘सामान्य ज्ञान’ बढ़ाने के लिए नहीं था. न उसे टोरंटों में बर्तन धोने की नौकरी ही चाहिए थी. ये सवाल लड़की को नीचा दिखाने के लिए किया गया था. अक्सर आप ऐसे ट्रोल करने वाले लोगों को जवाब नहीं देना चाहते, लेकिन कई बार पानी सिर के ऊपर से गुजर जाता है.
फिर जवाब देना जरूरी हो जाता है. लड़की ने भी इस कॉमेंट पर जवाब दिया. लेकिन गुस्सा जताने के बजाय जवाब देने का जो तरीका उसने इस्तेमाल किया, उसने सबका दिल जीत लिया. देखते ही देखते ये खास तरीका सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग उसके इस तरीके के मुरीद हो गए.
हुआ ये कि रेचल नाम की एक युवती सोशल मीडिया पर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के वीडियो शेयर करती हैं. उनके ऐसे ही किसी एक पोस्ट पर एक यूजर ने कॉमेंट किया
जवाब वायरल हो गया‘टोरंटो में बर्तन मांजने के कितने पैसे मिलते हैं?’
देखने में तो ये सवाल ऐसा है, जैसे सच में कोई नौकरी की जानकारी मांग रहा है. लेकिन अंदाज ऐसा था कि मंशा साफ समझ आती है. ये सवाल कम था. ताना ज्यादा था. लेकिन लड़की ने भी तय कर लिया. गुस्सा नहीं करना है, लेकिन जवाब ऐसा देना है कि बिना अपना लेवल गिराए सवाल पूछने वाले का ओछापन दुनिया के सामने आ जाए. रेचल ने तय किया कि जवाब कॉमेंट बॉक्स में नहीं दिया जाएगा. वीडियो बनाकर दिया जाएगा.
इसके बाद रेचल ने उस नफरत भरे सवाल को अपने अगले व्लॉग का 'थीम' बना लिया. फिर शुरू हुई ‘टोरंटो में बर्तन धोने की दास्तानगोगई’. वीडियो की शुरुआत में रेचल बड़े ही शांत और ताने वाले लहजे में कहती हैं, ‘तो आज हम देखेंगे कि टोरंटो में बर्तन कैसे मांजते (धोते) हैं.’ इसके बाद शुरू होती है ‘बर्तन मांजने’ वाली नौकरी, जिसमें पहले तो रेचल एकदम टिप-टॉप ड्रेस पहनकर घर से निकलती हैं. फिर टोरंटो की चमचमाती सड़कों पर बस पकड़ी जाती है. मेट्रो का सफर किया जाता है. गगनचुंबी बिल्डिंगों के बीच से गुजरते हुए वह एक शानदार कॉर्पोरेट ऑफिस पहुंचती हैं.
स्मार्ट लिफ्ट में अपना एक्सेस कार्ड स्वाइप कर वह सीधे High-rise टावर की ऊपरी मंजिल पर पहुंचती हैं. अब ‘बर्तन मांजने’ के काम के लिए एनर्जी भी तो चाहिए. तो रेचल पहला काम करती हैं अपने ऑफिस के पैंट्री एरिया में जाने का. यहां ऑटोमैटिक कॉफी मशीन लगी है. वो बटन दबाती हैं. 'कैफ़े लाते' (Latte) कॉफी झट से तैयार हो जाती है. कॉफी की चुस्कियों के साथ रेचल अपनी कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठ जाती हैं. बैकग्राउंड में चुटकी लेते हुए लिखती हैं, ‘अब ये पार्ट-टाइम जॉब कर लेती हूं!’ यानी कॉर्पोरेट की 9 से 5 वाली नौकरी तो बस साइड जॉब है. असली काम तो बर्तन धोना है.
ये भी पढ़ेंः छोटी उंगली में चोट लगी थी, सिस्टम ने सड़ाकर हाथ ही काट दिया, शुभेंदु की कहानी दर्दनाक है
रेचल इसके बाद लंच ब्रेक में नूडल्स और झींगे के चॉपस्टिक से लुत्फ उठाती हैं. दोबारा कॉफी पीती हैं. फिर खिड़की से बाहर का टोरंटो की झील और आसमान छूती इमारतें दिखाती हैं. चुटकी लेते हुए कहती है, ‘फ्रेंड्स, मेरे मालिक के घर का व्यू देख लो.’
बर्तन मांजने का काम!पूरा दिन बीत जाने के बाद रेचल को अचानक याद आता है कि ‘अरे. मैं तो भूल ही गई. मुझे तो बर्तन मांजना था.’ इसके बाद वो अपने हाथ में कॉफी का खाली मग लेकर कॉरिडोर से होती हुई किचन पैंट्री की तरफ बढ़ती हैं. वहां रखा है एक मॉडर्न 'डिशवॉशर' यानी बर्तन धोने वाली मशीन. रेचल अपना खाली कप उसी में रख देती हैं और बटन ऑन करती हैं.
लो भाई. हो गया ‘बर्तन मांजने का काम’.
वीडियो के अंत में रेचल अपना बैग और लंच बॉक्स समेटकर लिफ्ट में आते हुए वह मुस्कुराकर कहती है,
लोगों ने की तारीफबाय फ्रेंड्स, अब अगले दिन बर्तन मांजने आऊंगी.
झारखंड की रहने वाली रेचल ने ट्रोल को बिना गाली-गलौज या गुस्से के ऐसा जवाब दे दिया, जो उसे जिंदगी भर याद रहेगा. लोगों ने भी उनकी जमकर तारीफ की है और कॉमेंट करने वाले ‘गुल-गुलशन-गुलफाम’ को ऐसा धोया है कि जब तक उसे ये याद रहेगा वो किसी की पोस्ट पर नफरती कॉमेंट करने से डरेगा.
गुंजन सैनी नाम की एक यूजर ने लिखा, “वे किसी दूसरे देश जाकर अपनी जिंदगी बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकते. असुरक्षा की भावना कड़वी बातों के रूप में बाहर निकलती है. तुम पर गर्व है.”
क्राफ्ट पेपरी नाम के यूजर ने लिखा, “नफरत करने वाले आपको स्लो नहीं करते. वो आपको याद दिलाते हैं कि आप पर ध्यान दिया जा रहा है. जो लोग खुद कुछ नहीं कर पाते, वो अक्सर दूसरों की आलोचना करने में व्यस्त रहते हैं.”
द पर्पल क्रिएटर ने लिखा कि कुछ लोग इतने खाली और जलनखोर होते हैं कि खुद तो आगे बढ़ नहीं पाते, इसलिए दूसरों को नीचे गिराने के लिए ऐसे कॉमेंट करते हैं.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट में आर्थिक आधार पर उपकोटा की मांग, केंद्र ने दिया जवाब












