उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदला गया है. अब इसे ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ नाम से जाना जाएगा. शुक्रवार, 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया है.
जेवर एयरपोर्ट अब कहलाएगा ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’
Narendra Modi International Airport: उत्तर प्रदेश के नोएडा एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ कर दिया गया है. 28 मार्च को पीएम मोदी ने इस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीएम योगी ने इसकी जानकारी दी. इससे पहले 2021 में गुजरात के अहमदाबाद में क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी स्टेडियम किया गया था.
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रधानमंत्री की ओर से यूपी को एक बड़ा तोहफा है. ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की सेवा को सम्मान है.
7 अक्टूबर को पीएम मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे किए थे.
सीएम योगी ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये एयरपोर्ट राज्य की अर्थव्यवस्था, उद्योग, पर्यटन और ग्लोबल कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. उन्होंने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को राज्य का सबसे बड़ा एयरपोर्ट भी बताया.
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने एयरपोर्ट का नाम बदलने पर दैनिक भास्कर से बात की. उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी का आभार जताया. कहा,
इसी साल हुआ एयरपोर्ट का उद्घाटन“यह फैसला सिर्फ एयरपोर्ट के नामकरण तक सीमित नहीं है. यह जेवर जैसे ग्रामीण इलाके को इंटरनेशनल एविएशन और इंडस्ट्रियल मैप पर स्थापित करने वाले नेतृत्व के सम्मान का प्रतीक है.”
28 मार्च, 2026 को पीएम मोदी ने जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था. जून से कमर्शियल ऑपरेशन शुरू हुए थे. नोएडा एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड एविएशन प्रोजेक्ट है. इस एयरपोर्ट को पूरे उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में डेवलप किया जा रहा है. यह यमुना एक्सप्रेसवे और मल्टी-मॉडल ट्रांजिट लिंक से जुड़ा है.
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जेवर स्थित एयरपोर्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए डेवलप किया गया है. इसमें ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG की सब्सिडियरी कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड और UP के संबंधित प्राधिकरण शामिल है.
नोएडा एयरपोर्ट के कंस्ट्रक्शन में कुल 4 फेज हैं. पहले फेज में 3300 एकड़ जमीन पर टर्मिनल और रनवे बनाए गए हैं. इस पर 11 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. ये हर साल लगभग 12 मिलियन यानी 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल कर सकता है. अगले 30 सालों में चारों फेज का काम पूरा होने का टारगेट रखा गया है.
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