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'बहन के इलाज के लिए चाहिए पैसे...' इमोशनल पोस्ट कर जुटाए 1.58 लाख, एक चूक से खुली पोल!

छोटी बहन के इलाज के लिए Crowdfunding के जरिए एक शख्स ने 24 घंटे में ₹1.58 लाख से ज्यादा रकम जुटा लिए. बाद में पता चला कि फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल कर लोगों को चूना लगाया गया था. पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट कर लिया.

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आगरा पुलिस ने जय को गिरफ्तार कर लिया है (COURTSEY- Agra Police)

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  • आगरा पुलिस ने जय सिंह राठौड़ को गिरफ्तार किया है, जिस पर अपनी बहन के इलाज के लिए फर्जी दस्तावेज बनाकर 1.58 लाख रुपये की क्राउड फंडिंग करने का आरोप है।
  • जय सिंह राठौड़ ने अपनी 12 साल की बहन के इलाज के लिए सोशल मीडिया पर फर्जी अस्पताल के दस्तावेज दिखाकर क्राउड फंडिंग की थी, लेकिन असली इलाज पिता के लिए था।
  • शराब अस्पताल ने दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए ठगी का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

अपनी छोटी बहन के लिए इलाज के नाम पर एक शख्स ने क्राउड फंडि‍ंग कर 1.58 लाख रुपये जुटा लिए थे. बाद में पता चला कि फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को ठगा गया है. आगरा पुलिस ने इस मामले में आरोपी जय सिंह राठौड़ को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने क्राउड फंडि‍ंग के जर‍िए डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई थी. आरोपी ने एक अस्पताल का पर्चा द‍िखाकर ये रकम जुटाई थी. बाद में उस अस्पताल ने ही इन मेडिकल डॉक्यूमेंट्स को फर्जी बता दिया. 

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25 सितंबर को आगरा पुलिस ने X पर एक पोस्ट शेयर की थी. पुलिस ने लिखा कि आगरा में अजयवीर सिंह उर्फ जय सिंह राठौड़ पर अपनी 12 साल की बहन को ग्लूकोमा और विट्रियस हेमरेज जैसी बीमारी से पीड़ित बताया गया. इन बीमारियों से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्राउड फंडिंग जुटाने का आरोप लगा है. शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

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आंखों के इलाज के नाम पर जुटाए 1.58 लाख

इस केस का बैकग्राउंड बड़ा ही दिलचस्प है. ये सबकुछ शुरु हुआ 21 सितंबर को. इस दिन X पर जय सिंह राठौर नाम के अकाउंट ने सोशल मीडिया पर क्राउड फंडिंग की अपील की थी. यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अपनी 12 साल की छोटी बहन के आंखों का इलाज कराना है. पोस्ट में यह भी लिखा गया कि अगर समय पर इलाज नहीं हुआ, तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. अपील के साथ आधार कार्ड, मेडिकल डॉक्यूमेंट्स और पेमेंट डिटेल्स शेयर की गईं. पोस्ट वायरल हुई, तो लोगों ने मदद करना भी शुरू कर दिया.

जय लगातार पोस्ट कर बताता रहा कि उसके अकाउंट में कितना पैसा आ गया है. पैसे देने वाले लोगों के लिए आरोपी ने थैंक्यू की पोस्ट भी डाली. फिर 22 सितंबर की सुबह यानी करीब 24 घंटे के अंदर उसने एक और पोस्ट किया. इसमें जय ने बताया कि उसके अकाउंट में 1 लाख 58 हजार 282 रूपए आ गए हैं. उसने खुशी जाहिर की और मदद करने वालों के लिए बहुत अच्छी-अच्छी बातें लिखीं. जैसे कि…

'WHAT ARE YOU GUYS?: ‘WHO ARE YOU ALL?’ 'ARE YOU EVEN REAL?:

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इलाज के लायक रकम मिलने के बाद जय ने पोस्ट अपडेट की. डोनेशन देने वाले लोगों को धन्यवाद कहा और अपनी बैंक डिटेल्स भी हटा दीं. पहली नजर में कहानी सोशल मीडिया पर अक्सर शेयर होने वाली क्राउड फंडिंग की पोस्ट जैसी ही थी. एक परिवार को इलाज के लिए पैसों की जरूरत थी और अजनबी लोग मदद के लिए आगे आ गए.

अस्पताल ने ही पोल खोल दी

इस पूरी कहानी में एक अस्पताल का भी जिक्र था. वो अस्पताल जिसके कागजात जय ने एक्स पर पोस्ट किए थे. यहीं से पूरी कहानी पलट गई. हुआ ये कि अस्पताल ने ही पोस्ट में शेयर किए गए मेडिकल डॉक्युमेंट्स की सत्यता पर सवाल उठाए. Shroff Eye Centre ने बताया कि उसके लेटरहेड का इस्तेमाल करके कथित तौर पर फर्जी मरीज, प्रिस्क्रिप्शन और इलाज का एस्टीमेट तैयार किया गया था. अस्पताल ने लोगों को सावधान रहने और इस तरह की अपील के जरिए होने वाली ठगी से बचने की अपील की.

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इसके बाद X पर ही लोगों ने जय सिंह राठौर से सवाल पूछने शुरू कर दिए. लोगों के सवालों के बीच जय ने कहा कि उसने अपनी बहन का नाम इस्तेमाल किया था. लेकिन, असल में पैसे अपने बीमार पिता के इलाज के लिए चाहिए थे. जय की दलील थी कि अगर वो पिता के इलाज के लिए मदद मांगता, तो शायद उतने लोग मदद नहीं करते. इसलिए उसने अपनी बहन का नाम इस्तेमाल किया. उसने ये भी माना कि उससे गलती हुई. लेकिन अब इस मामले में पुलिस की एंट्री हो चुकी है. पुलिस ने जय सिंह राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है. 

वीडियो: X पर बहन के इलाज के नाम पर जुटाए ₹1.58 लाख, अस्पताल ने बताया फर्जी

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