चुनाव आयोग की व्यवस्था को लेकर इस वक्त कई सवाल उठ रहे हैं. अब गोवा में जो हुआ उसके बाद आयोग और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. हुआ ये कि अगर चुनाव अधिकारी किसी शख्स की जांच करने के बाद पाते हैं कि वोटर लिस्ट में नाम होना चाहिए. इसके बावजूद फिर उन वोटर्स का नाम फाइनल वोटर लिस्ट से बाहर कैसे रह सकता है? गोवा में 97 वोटरों के साथ ऐसा ही हुआ. अब इस मामले में गोवा चीफ इलेक्टोरल अफसर के दफ्तर ने सफाई दी है.
97 वोटरों के नाम कटने पर बवाल के बाद गोवा CEO ऑफिस की सफाई, 'कुछ नाम जोड़े गए'
CEO office clarification: 23 सितंबर को सामने आया कि गोवा SIR प्रक्रिया के दौरान 97 वोटरों के नाम योग्य होने के बावजूद फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं जुड़े. इसके बाद चुनाव आयोग की व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे. अब गोवा CEO ऑफिस ने नई जानकारी दी है.

24 सितंबर को गोवा के CEO दफ्तर ने एक्स पर एक प्रेस नोट शेयर किया. इसमें बताया गया है कि इनमें से कई लोगों के नाम बाद में वोटर लिस्ट में जोड़ दिए गए हैं. बाकी मामलों पर अभी काम चल रहा है.
लेकिन सवाल ये है कि जब अधिकारियों ने इन 97 लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल करने योग्य मान लिया था, तो फिर इनके नाम फाइनल लिस्ट में क्यों नहीं आए?
ये मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान सामने आया. SIR में वोटर लिस्ट की जांच की जाती है. इसी जांच के दौरान इन 97 वोटरों के रिकॉर्ड में कुछ ऐसी बातें मिलीं, जिन्हें 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' यानी रिकॉर्ड में गड़बड़ी या बेमेल जानकारी माना गया.
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मामले की सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर यानी ERO और असिस्टेंट EROs ने पाया कि ये 97 लोग वोटर लिस्ट में शामिल होने के योग्य हैं. मतलब कि जांच के बाद अधिकारियों का फैसला इनके पक्ष में था. इसके बाद चुनाव अधिकारियों की तरफ से दिल्ली मेल भेजे गए. एक हफ्ते में आठ मेल भेजे गए फिर भी उनपर कोई एक्शन नहीं लिया गया.
मेल में बताया गया कि ECINet में एक बार Form 7 के जरिए किसी नाम को हटाने का प्रोसेस शुरू होने के बाद उसे वापस लेने के लिए रोलबैक का विकल्प नहीं है. अगर सिस्टम में किसी वोटर का नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई, तो उसी सिस्टम में उसे तुरंत वापस लाने का कोई रोलबैक बटन मौजूद नहीं था. ये काम केवल दिल्ली से ही हो सकता था. इस केन्द्रीकरण पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी सवाल उठाया था.
इसी वजह से सवाल उठा कि जब ERO इन 97 लोगों को योग्य मान चुके थे, तो फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से पहले उनके नाम वापस क्यों नहीं जोड़े गए? गोवा CEO ऑफिस ने अब इस पर स्पष्टीकरण दिया है. सीईओ ऑफिस ने कहा कि इन 97 मामलों को अलग से देखा गया. Booth Level Officers यानी BLOs को घर-घर जाकर इन लोगों की जानकारी और Form 6 पूरा करने की प्रक्रिया करने को कहा गया.
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