खुद को हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता कहने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की एक अदालत से रेगुलर बेल मिल गई है. इससे पहले वह अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर था. उस पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा कार्यकर्ता के पिता पर हमला करने का आरोप है. हमले की बात उसने खुद एक वीडियो पॉडकास्ट में बड़े गर्व के साथ स्वीकार की थी. इसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई थी. 10 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत दे दी थी.
स्वतंत्र भारद्वाज अब जेल नहीं जाएगा, छात्रा के पिता का सिर फोड़ने का आरोप
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा के पिता पर कथित हमले और जातिसूचक गालियां देने के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है.

15 सितंबर 2026 को तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत पर रिहा करते हुए कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज पर कई शर्तें लगाई थीं. कोर्ट ने कहा था कि भारद्वाज जेल से बाहर जाने के बाद किसी भी सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर केस से जुड़ा कोई पोस्ट नहीं करेगा. न तो सफाई देगा और न ही शिकायतकर्ता के परिवार के बारे में कुछ लिखेगा. जिस लड़की ने उन पर आरोप लगाया, उससे या उसके परिवार से संपर्क करने की भी कोशिश नहीं करेगा. कोर्ट ने उसे केस से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ न करने का भी निर्देश दिया.
कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि अंतरिम जमानत पर रहते हुए स्वतंत्र भारद्वाज का बर्ताव जैसा होगा, उसी के आधार पर रेगुलर बेल देने के बारे में सोचा जाएगा. मंगलवार, 6 अक्टूबर को एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने स्वतंत्र भारद्वाज के ‘व्यवहार’ को देखते हुए उसे नियमित जमानत दे दी.
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अंतरिम और रेगुलर बेल क्या है?किसी आरोपी को अंतरिम जमानत तब दी जाती है, जब आरोपी की बेल रिट पर सुनवाई हो रही होती है. यानी जब तक बेल पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक आरोपी को जेल जाने से छूट मिल जाती है. रेगुलर जमानत में व्यक्ति को मुकदमा चलने तक पुलिस हिरासत से राहत मिलती है. जमानत की दोनों प्रक्रियाएं ‘शर्तों के साथ’ होती हैं.
क्या मामला है?बता दें कि स्वतंत्र भारद्वाज पर एससी-एसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज है. उस पर आरोप है कि उसने जुलाई 2026 में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान एक प्रदर्शनकारी लड़की के पिता पर न सिर्फ हमला किया, बल्कि उन्हें जातिसूचक गालियां भी दीं. सितंबर की शुरुआत में भारद्वाज का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह खुद पीड़ित की ‘खोपड़ी फोड़ने’ का दावा कर रहा था.
इसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया और उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई थी. पीड़ित परिवार और सीजेपी ने आरोपी पर केस दर्ज कराने को लेकर थाने के सामने प्रदर्शन भी किया था. इसके बाद केस दर्ज करते हुए 5 सितंबर को स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया.
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