जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में कथित तौर पर एक ऐसी किताब पहुंच गई है जिनमें आतंकियों की तारीफ की गई है. इन किताबों में भारत के हिस्से पर ही भारत का कब्जा बताया गया. साथ ही मकबूल भट्ट जैसे आतंकियों को 'शहीद' कहा गया. ये मामला सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर में नया विवाद खड़ा हो गया है. भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि इस किताब में आतंकियों और अलगाववादी नेताओं की तारीफ की गई है.
मकबूल भट को बताया 'शहीद', हाफिज सईद की तारीफ! कश्मीर के स्कूलों में ये किताब किसने पहुंचाई?
किताब का नाम 'Personalities and Legends of J&K' है. इसमें Maqbool Bhat को शहीद बताया गया है. साथ ही अलगाववादी नेताओं जैसे Syed Ali Shah Gilani, Masarat Alam और Mirwaiz Umar Farooq को भी पॉजिटिवली पेश किया गया है.


किताब में जम्मू-कश्मीर को ‘इंडियन हेल्ड कश्मीर’ और ‘इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर’ कहा गया है. इस किताब पर समग्र शिक्षा, जम्मू-कश्मीर का लोगो भी छपा हुआ है. इन आरोपों के बाद मामले ने तूल पकड़ा और इसकी वजह से राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. बीजेपी का कहना है कि ये किताब जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी स्कूलों में बांटी गई है. किताबें किसके आदेश पर बांटी गईं, इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
उधर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज ने भी इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है.

जिस किताब पर विवाद हो रहा है, उसका नाम 'Personalities and Legends of J&K' है. लेकिन विवाद की वजह सिर्फ जम्मू कश्मीर नहीं है. बल्कि इसमें मकबूल भट्ट को शहीद बताया गया है. साथ ही अलगाववादी नेताओं जैसे सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम और मीरवाइज उमर फारूक को भी पॉजिटिवली पेश किया गया है.
बीजेपी का ये भी आरोप है कि किताब में हाफिज सईद की भी तारीफ की गई है. हाफिज सईद को 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड है. अब किताब पर चूंकि समग्र शिक्षा, जम्मू-कश्मीर का लोगो है तो ये सवाल भी उठ रहे हैं कि इसे सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक पहुंचने की मंजूरी कैसे मिली? जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि इस किताब की प्रतियां जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई थीं. उन्होंने कहा,
जो किताब 2008 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की तारीफ करे और जम्मू-कश्मीर को 'इंडियन ऑक्यूपाइड कश्मीर' बताए, ऐसी किताब बेहद आपत्तिजनक है. इस पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.
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सुनील शर्मा ने कहा कि इस किताब को मंजूरी देने वाले हर व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लेखक, प्रकाशक, एक्सपर्ट कमेटी और यहां तक कि शिक्षा मंत्री से भी जवाब मांगा जाना चाहिए. उन्होंने मुख्यमंत्री से शिक्षा मंत्री को तुरंत हटाने की भी मांग की है. साथ में आरोप लगाया कि ये सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. यहां तक कि इस पूरे मामले में उन्होंने सरकार की भूमिका की जांच कर डाली. जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने भी किताब को लेकर सवाल उठाए और इसे बैन करने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस किताब में पाकिस्तान की भाषा बोली गई है. उन्होंने कहा,
अफसोस ये है कि हमारे जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार, जिसने भारत के संविधान की शपथ ली है. उसने इसकी मंजूरी दी. राज्य सरकार ने ऑर्डर इशू किया कि ये किताब सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और लाइब्रेरी में रखी जाएगी. जिस किताब में ये जिक्र है कि एक टेररिस्ट मकबूल भट्ट, जो कि कश्मीर को भारत से अलग करना चाहता था, जो पाकिस्तान के इशारे पर यहां टेररिज्म स्टार्ट करना चाहता था, उसको कानून की हिसाब से सजा-ए-मौत दी गई. उसको शहीद-ए-आजम बताया जाता है.
विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने इस किताब को सरकारी स्कूलों से वापस लेने का फैसला किया है. साथ ही ये पता लगाने के लिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं कि आखिर इस किताब को मंजूरी कैसे मिली और इसे सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी तक कैसे पहुंचाया गया. जांच में किताब के प्रकाशन, मंजूरी और वितरण से जुड़े सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी. साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी लगातार उठ रही है.
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