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भारत का होगा अपना स्पेस स्टेशन, ISRO ने पहला कदम बढ़ा दिया, कब तक होगा तैयार?

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के अभी पहले मॉड्यूल पर काम शुरू होने की तैयारी हो गई है. इस स्टेशन के कुल 5 मॉड्यूल तैयार किए जाने हैं.

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भारत के अपने स्पेश स्टेशन पर काम शुरू हो गया है (india today)

ओडिशा की सेंचुरियन यूनिवर्सिटी के दिसंबर 2025 में हुए कन्वोकेशन में ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने ऐलान किया था कि 2028 तक भारत के अपने देशी स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल अंतरिक्ष में स्थापित हो जाएगा. अब खबर है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने चुपके से इस दिशा में अपना काम शुरू भी कर दिया है. एजेंसी ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल (BAS-01) को विकसित करने के लिए एयरोस्पेस कंपनियों से आवेदन मांगे हैं.

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इस आवेदन को ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट’ यानी EOI कहते हैं. न्यूज-18 की रिपोर्ट के अनुसार, ISRO के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) की ओर से 8 जनवरी 2026 को जारी इस EoI में कहा गया है कि स्पेस स्टेशन के लिए जो पहला मॉड्यूल बनेगा, उसके लिए कंपनियां अपना प्रपोजल एजेंसी के सामने रखें. इसमें दावेदार कंपनियों के लिए कुछ शर्तें भी बताई गई हैं. कहा गया है कि इस काम में बोली लगाने वाली कंपनियां पूरी तरह भारतीय होनी चाहिए. क्योंकि यह सिर्फ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का मामला नहीं है बल्कि इसका मकसद संवेदनशील तकनीक की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना है. 

इन कंपनियों के पास कम से कम 5 साल का एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग का अनुभव होना चाहिए. इसके अलावा, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसतन सालाना 50 करोड़ रुपये का टर्नओवर, जरूरी क्वालिटी सर्टिफिकेशन और ब्लैकलिस्ट होने का कोई रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए. 

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BAS-01 मॉड्यूल स्ट्रक्चर के दो सेट तैयार किए जाएंगे, जो पूरे अंतरिक्ष स्टेशन की रीढ़ होंगे. इनके निर्माण में बेहद सटीक मैन्युफैक्चरिंग, स्पेस-ग्रेड सामग्री का इस्तेमाल और सख्त क्वालिटी स्टैंडर्ड्स का पूरी तरह पालन करना होगा. 

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के अभी पहले मॉड्यूल पर काम शुरू होने की यह तैयारी है. इसी तरह इस स्टेशन के कुल 5 मॉड्यूल तैयार किए जाने हैं. जो पहला मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है, उसे नाम दिया गया है  BAS-01. इसे स्पेस स्टेशन का पहला काम करने वाला हिस्सा माना जा रहा है. BAS-01 को साल 2028 तक पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने की योजना है. कहा ये भी जा रहा है कि साल 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के सभी पांच मॉड्यूल विकसित कर लिए जाएंगे.

यह अंतरिक्ष की पड़ताल की दिशा में भारत की एक लंबी छलांग होगी. अभी तक भारत का स्पेस सेक्टर केवल सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल तक सीमित था, लेकिन अब इसकी नजरें एक ऐसा स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर हैं, जो लंबे समय तक चलने वाले मिशनों, वैज्ञानिक रिसर्च और अंतरिक्ष में इंसानों के रहने की भी व्यवस्था कर सके. 

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TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने स्पेस स्टेशन के पहले मॉड्यूल के लिए 720 करोड़ रुपये का बजट दिया है. इसके लिए जरूरी उपकरणों (लॉन्ग लीड आइटम्स) की खरीद प्रक्रिया भी शुरू हो गई है.

स्पेस स्टेशन कैसा होगा?

TOI की एक रिपोर्ट बताती है कि 2019 की शुरुआती योजना के अनुसार, BAS एक 20 टन वजनी मॉड्यूलर स्पेस स्टेशन होगा, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्रियों के रहने की व्यवस्था होगी. हालांकि ISRO ने अभी इसके अंतिम डिजाइन को लेकर कोई पक्की घोषणा नहीं की है.

अभी तक कितने स्पेस स्टेशन?

बता दें कि अभी तक अंतरिक्ष में सिर्फ दो स्टेशन हैं जो पूरी तरह से काम कर रहे हैं और जहां लाइफ सपोर्ट सिस्टम एक्टिव है. इनमें से एक और सबसे पुराना इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) है, जो नवंबर 2000 से लगातार संचालन में है. यह अमेरिका, रूस, जापान, यूरोप, कनाडा की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों की मदद से चल रहा है. दूसरा चीन का तियांगोंग (Tiangong) स्पेस स्टेशन है, जो 2022 से पूरी तरह चालू है. इसका संचालन पूरी तरह से चीन करता है.

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