आसमान में कोई Satellite देखकर अक्सर लगता है कि वो बस हवा में टंगा हुआ है. लेकिन असल में Satellite लगातार धरती की तरफ गिर रहा होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि उसकी रफ्तार इतनी सही होती है कि वो धरती तक पहुंचने से पहले उसके चारों ओर घूमता रहता है. ISRO के नए EOS-05 मिशन को समझने के लिए इसी बात को समझना सबसे जरूरी है.
ISRO ने EOS-05 को ऐसी ऑर्बिट में क्यों भेजा जहां सैटेलाइट धरती के साथ चलता दिखता है?
ISRO के EOS-05 Satellite को Geosynchronous Orbit में क्यों रखा गया, Geostationary और Geosynchronous Orbit में क्या फर्क है और Satellite धरती पर गिरता क्यों नहीं, आसान भाषा में पूरा विज्ञान समझिए.

4 सितंबर 2026 को ISRO ने GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 को अंतरिक्ष में भेजा. ये भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह है जिसे Geosynchronous Orbit में काम करने के लिए तैयार किया गया है. 7 सितंबर की रात तीसरी और अंतिम कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसकी कक्षा लगभग 34,903 किलोमीटर गुणा 35,884 किलोमीटर हो गई. ISRO के मुताबिक उपग्रह की सेहत सामान्य है.
EOS-05 आखिर है क्या?
EOS-05 एक पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रह है. आसान भाषा में कहें तो ये अंतरिक्ष से धरती की लगातार तस्वीरें लेने वाली एक बेहद ऊंचाई पर तैनात आंख है. इसे GSLV-F17 ने पहले सीधे अंतिम कक्षा में नहीं पहुंचाया. रॉकेट ने इसे Sub-Geosynchronous Transfer Orbit में छोड़ा और इसके बाद Satellite के अपने Liquid Apogee Motor यानी LAM इंजन ने अलग-अलग चरणों में इसकी कक्षा ऊपर उठाई.
5 सितंबर को पहली कक्षा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी हुई. इसके बाद कक्षा करीब 20,000 × 31,129 किलोमीटर हुई. अगली प्रक्रिया में इसकी सबसे ऊंची दूरी करीब 35,786 किलोमीटर तक पहुंचाई गई और 7 सितंबर के अंतिम अभियान के बाद निचली दूरी भी लगभग 34,903 किलोमीटर तक बढ़ गई.
Geosynchronous Orbit क्या होती है?
अब आते हैं असली खेल पर. Geosynchronous का मतलब है ऐसी कक्षा जिसमें Satellite को धरती का एक चक्कर पूरा करने में लगभग उतना ही समय लगता है जितना धरती को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में लगता है.
इसे ऐसे समझिए. आप किसी घूमते हुए झूले पर बैठे हैं और आपके हाथ में एक गेंद है. अगर गेंद को सही गति और सही दिशा से घुमाया जाए तो वो आपके साथ तालमेल में घूमती दिखाई दे सकती है. अंतरिक्ष में भी कुछ ऐसा ही होता है. Satellite की गति, ऊंचाई और कक्षा को इस तरह तय किया जाता है कि उसका घूमने का समय धरती के घूर्णन से मेल खाए.
लेकिन Geosynchronous और Geostationary एक ही चीज नहीं हैं.
Geostationary और Geosynchronous में फर्क क्या है?
Geostationary Orbit को Geosynchronous Orbit का एक खास रूप समझिए. अगर Satellite धरती के भूमध्य रेखा के ऊपर बिल्कुल गोलाकार कक्षा में घूम रहा हो और उसका घूर्णन काल धरती के घूर्णन से मेल खाता हो, तो वो धरती से देखने पर आसमान में लगभग एक ही जगह स्थिर दिखाई देता है. यही Geostationary Orbit है.
दूसरी तरफ Geosynchronous Orbit में Satellite का कक्षीय झुकाव या कक्षा की हल्की अंडाकार आकृति हो सकती है. ऐसे में Satellite का एक दिन का चक्कर तो धरती के घूमने से तालमेल रखता है, लेकिन जमीन से देखने पर उसकी स्थिति थोड़ी बदलती हुई दिखाई दे सकती है.
EOS-05 की कक्षा इसी वजह से दिलचस्प है. ये बिल्कुल पारंपरिक गोलाकार Geostationary Orbit नहीं है. ISRO ने इसे थोड़ी अलग Geosynchronous कक्षा में रखा है, जिसकी मौजूदा ऊंचाई लगभग 35 हजार किलोमीटर है.
फिर Satellite नीचे गिरता क्यों नहीं?
क्योंकि Satellite को सिर्फ ऊपर फेंकना नहीं होता, उसे सही क्षैतिज गति भी देनी होती है. धरती का गुरुत्वाकर्षण लगातार उसे अपनी तरफ खींचता है. लेकिन Satellite की आगे की गति इतनी ज्यादा होती है कि वो धरती की सतह से टकराने के बजाय लगातार धरती के चारों ओर घूमता रहता है.
इसे पहाड़ की चोटी से गेंद फेंकने के उदाहरण से समझ सकते हैं. कम गति से फेंकेंगे तो गेंद नीचे गिर जाएगी. ज्यादा क्षैतिज गति देंगे तो वो दूर जाएगी. अंतरिक्ष में सही गति और सही ऊंचाई मिलने पर Satellite लगातार धरती के चारों ओर चक्कर लगाता रहता है.
यानी Satellite गुरुत्वाकर्षण से बचा हुआ नहीं है. बल्कि गुरुत्वाकर्षण ही उसे कक्षा में बनाए रखने का एक अहम हिस्सा है.
EOS-05 को ऐसी कक्षा में रखने का फायदा क्या है?
EOS-05 की सबसे बड़ी ताकत उसका लगातार बड़े इलाके पर नजर रखने की क्षमता है. सामान्य कम ऊंचाई वाली कक्षा के पृथ्वी अवलोकन Satellite किसी इलाके के ऊपर से गुजरते हैं और फिर अगली बार वापस आने में समय लगता है. लेकिन लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करने वाला Geosynchronous Satellite एक बड़े इलाके को लगातार अपने देखने के क्षेत्र में रख सकता है.
इसका फायदा मौसम की निगरानी, चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग, कृषि, वन क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी में हो सकता है. India Today के मुताबिक EOS-05 के मिशन प्रोफाइल में बड़े इलाकों की तस्वीरें लगभग 30 मिनट के अंतराल पर लेने और प्राथमिकता वाले इलाकों को करीब 5 मिनट में दोबारा देखने जैसी क्षमताओं का उल्लेख है.
भारत के लिए ये मिशन इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
EOS-05 सिर्फ एक और Satellite नहीं है. ये भारत की पृथ्वी निगरानी क्षमता में एक नया विकल्प जोड़ता है. ISRO के मुताबिक ये भारत का पहला Imaging Satellite है जिसे Geosynchronous Orbit से काम करने के लिए तैयार किया गया है. इससे कम ऊंचाई वाली कक्षाओं में घूमने वाले पुराने ढांचे के साथ एक ऐसी क्षमता जुड़ती है जो बड़े क्षेत्र पर ज्यादा लगातार नजर रख सकती है.
यही वजह है कि EOS-05 को सिर्फ अंतरिक्ष की उपलब्धि के तौर पर देखना अधूरा होगा. इसके पीछे मौसम से लेकर आपदा प्रबंधन और रणनीतिक निगरानी तक कई संभावित उपयोग जुड़े हैं.
और सबसे दिलचस्प बात यही है कि Satellite वास्तव में आसमान में टंगा नहीं है. वो लगातार धरती की तरफ गिर रहा है, लेकिन उसकी रफ्तार और कक्षा ऐसी है कि वो हर बार धरती को मिस करता हुआ आगे निकल जाता है. EOS-05 इसी बेहद सटीक संतुलन का एक नया भारतीय उदाहरण है.
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