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चार दिन में निवेशकों को 2,40,00,00,00,00,000 का नुकसान, शेयर मार्केट का ये हाल क्यों?

सिर्फ 13 जनवरी को इन्वेस्टर्स की वेल्थ 12.61 लाख करोड़ रुपये नीचे गिर गई. फूड डिलीवरी कंपनी Zomato के शेयर्स 6.5 फीसदी गिरे. इसके अलावा Power Grid, Adani Ports, Tata Steel, NTPC, Tata Motors, Mahindra & Mahindra, Asian Paints, Tech Mahindra, UltraTech Cement, और Sun Pharma के शेयर्स में भी भारी गिरावट देखी गई.

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मार्केट में 3,562 कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट देखी गई. (फोटो- X)

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर होते रुपये और देश से विदेशी पूंजी बाहर जाने की वजह से भारतीय शेयर मार्केट पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. 13 जनवरी को सेंसेक्स 1049 पॉइंट गिरकर 76 हजार 330 पॉइंट्स पर बंद हुआ. वहीं Nifty 346 पॉइंट गिरकर 23 हजार 85 पॉइंट्स पर बंद हुआ. शेयर मार्केट में आई इस गिरावट के कारण इन चार दिनों में इन्वेस्टर्स को 24 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है.

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BSE में लिस्टेड फर्म्स को पिछले चार दिनों में 24 लाख 69 हजार 243.3 करोड़ रुपये की चपत लगी है. एनडीटीवी में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 13 जनवरी को इन्वेस्टर्स की वेल्थ 12.61 लाख करोड़ रुपये नीचे गिर गई. फूड डिलीवरी कंपनी Zomato के शेयर्स 6.5 फीसदी गिरे. इसके अलावा Power Grid, Adani Ports, Tata Steel, NTPC, Tata Motors, Mahindra & Mahindra, Asian Paints, Tech Mahindra, UltraTech Cement, और Sun Pharma के शेयर्स में भी भारी गिरावट देखी गई.

रिपोर्ट के अनुसार Axis Bank, Tata Consultancy Services, Hindustan Unilever और IndusInd Bank के लिए खबर अच्छी रही. इन कंपनियों के शेयर के दामों में इजाफा देखा गया. मार्केट में 3,562 कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट देखी गई. वहीं 555 कंपनियों के शेयर में बढ़त देखने को मिली. 131 के शेयर दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ. वहीं 508 स्टॉक्स पिछले 52 हफ्तों में अपने निचले स्तर पर थे, तो 120 स्टॉक्स पिछले एक साल में सबसे ऊपर पहुंचे.

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शेयर बाजार का ये हाल क्यों?

- तेल की कीमत आसमान पर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 13 जनवरी को तेल की कीमतें तीन महीने में सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. ये उछाल अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए प्रतिबंधों के कारण आई है. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का ट्रेड दोपहर 3:40 बजे के आसपास एक प्रतिशत से अधिक बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चला गया था. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत पर राजकोषीय दबाव डालती हैं, क्योंकि ये कमोडिटी के सबसे बड़े आयातकों में से एक है.

- रुपया नए निचले स्तर पर

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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मजबूत होने के बीच 13 जनवरी को इंट्राडे ट्रेड में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86.61 के लाइफटाइम लो पर पहुंच गया. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक 10 जनवरी को मजबूत पेरोल रिपोर्ट के बाद अमेरिकी डॉलर 14 महीने में सबसे ऊपर था. रुपया 86.58 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

- ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता

अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप 20 जनवरी को राष्ट्रपति पदभार ग्रहण करेंगे. अटकलें लगाई जा रही हैं कि वो भारत समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का प्रस्ताव कर सकते हैं. जिससे धारणा और खराब हो सकती है.

- FPI ने काफी इक्विटी बेची

इस महीने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 10 जनवरी तक 21 हजार 350 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के भारतीय शेयर बेचे हैं. जबकि दिसंबर में FPI निवेशकों ने 16 हजार 982 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे. पिछले साल अक्टूबर महीने से ही FPI सेलऑफ के मूड में हैं. अक्टूबर में उन्होंने 1 लाख 14 हजार 445 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे थे, और नवंबर में शेयर बाजार से 45 हजार 974 करोड़ रुपये निकाल लिए थे.

इन सब के अलावा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच, सभी की निगाहें 2025 के बजट पर टिकी हुई हैं. एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सरकार खपत को बढ़ावा देने और विकास को समर्थन देने के उपायों की घोषणा करेगी. एक्सपर्ट्स ने चेतावनी भी दी है कि अगर ये बजट पिछले बजट की तरह लोकलुभावन रहा, तो ये बाजार को निराश कर सकता है और आगे आने वाले समय में गिरावट का कारण बन सकता है.

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