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कनाडा में 2018 से अब तक 17 भारतीय छात्रों की जान गई, सब पर बुरी तरह हमला किया गया

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि साल 2018 से 2025 के बीच कनाडा में 17 भारतीय स्टूडेंट्स की जान गई है. ये सभी स्टूडेंट्स हिंसक हमलों का शिकार हुए थे. और कहां-कहां भारतीय छात्र हिंसा का शिकार हुए? सब बताया है.

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भारतीय छात्रों की मौत और उन्हें डिपोर्ट किए जाने पर विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने जवाब दिया है (PHOTO-India Today)

भारत सरकार ने कनाडा में भारतीय स्टूडेंट्स की मौत पर जानकारी साझा की है. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि साल 2018 से 2025 के बीच कनाडा में 17 भारतीय स्टूडेंट्स की जान गई है. ये सभी स्टूडेंट्स हिंसक हमलों का शिकार हुए थे. विदेश राज्य मंत्री ने AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के लिखित जवाब के तौर पर संसद में ये जानकारी दी है.

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किस देश में कितने भारतीय मारे गए?

विदेश राज्य मंत्री ने कनाडा के अलावा अन्य देशों में हिंसक हमलों में जान गंवाने वाले भारतीयों की जानकारी भी दी है. इस जानकारी के मुताबिक कनाडा में 17, अमेरिका में 9, ऑस्ट्रेलिया में 3, किर्गिस्तान में 2 और ब्रिटेन, चीन, डेनमार्क, जर्मनी और ग्रेनाडा में 1 भारतीय नागरिक की जान गई है. AIMIM सांसद ओवैसी ने पूछा था कि क्या सरकार विदेशों में भारतीय छात्रों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं से अवगत है और क्या इन घटनाओं की समय पर जांच की गई है?

सवाल का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री ने कहा,

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सरकार विदेशों में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देती है और उनके खिलाफ हिंसा की घटनाओं की निगरानी करती है. हिंसक घटनाओं को तुरंत भारतीय मिशनों और पोस्ट्स द्वारा मेजबान देश के संबंधित अधिकारियों के साथ साझा किया जाता है. इसलिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन घटनाओं की ठीक से जांच की जाए और अपराधियों को सजा मिले.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि विदेश में भारतीय मिशन हमेशा आने-जाने वाले स्टूडेंट्स के संपर्क में रहते हैं. जाने से पहले और आने के बाद छात्रों का ओरिएंटेशन होता है. उन्हें बताया जाता है कि बाहर रहने के दौरान उन्हें क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही उन्हें संबंधित देश में मिलने वाली चुनौतियों, खतरों और जोखिमों के बारे में भी जानकारी दी जाती है. किसी भी जोखिम के समय उनकी मदद हो सके, इसके लिए उन्हें भारतीय मिशनों में खुद को रजिस्टर करने को कहा जाता है. साथ ही उन्हें विदेश मंत्रालय के 'मदद' पोर्टल पर लॉगिन करने की सलाह भी दी जाती है. विदेश राज्य मंत्री के मुताबिक छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप्स, कॉन्सुलर कैंप्स से जोड़ा जाता है जिससे वो किसी इमरजेंसी में मदद ले सकें.

तो इसलिए डिपोर्ट होते हैं भारत के छात्र! 

एक अलग सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री ने कहा कि कनाडा, अमेरिका और खाड़ी देशों में कुछ भारतीय नागरिकों और छात्रों को वीजा नियमों के कथित उल्लंघन, मेजबान देशों के नियमों का पालन न करने और एकेडमिक संस्थानों में जाली एडमिशन लेटर जमा करने के आरोप में डिपोर्ट किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2021 और 2025 के बीच, ऑस्ट्रेलिया से 114, ब्रिटेन से 170, रूस से 82, अमेरिका से 45 और यूक्रेन से 13 छात्रों को डिपोर्ट किया गया है.

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