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बलूचिस्तान हमलों के बाद भारत ने बड़ी बात याद दिला दी, पाकिस्तान के आरोप झूठे बताए

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्टी ने बताया कि 31 आम नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी मारे गए. ग्वादर में मजदूर कैंप पर हमले में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

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भारत का कहना है कि ये पाकिस्तान की पुरानी आदत है. वो अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसे झूठे आरोप लगाता है. (फोटो- AFP)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान राज्य में बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कई शहरों पर एक साथ हमले किए. अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में 150-200 लोगों की जान गई है. 80 से ज्यादा पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत की खबर भी है, जिसे पाकिस्तान ने खारिज कर दिया है. हमलों को लेकर भारत पर लगाए गए आरोपों को भारत सरकार ने निराधार बताया है.

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शनिवार, 31 जनवरी को हुए हमलों के लिए पाकिस्तान ने भारत को जिम्मेदार बताया था. भारत ने रविवार, 1 फरवरी को पाकिस्तान के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया. भारत का कहना है कि ये पाकिस्तान की पुरानी आदत है. वो अपनी नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसे झूठे आरोप लगाता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा,

“हम पाकिस्तान के बेबुनियाद आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं. पाकिस्तान ये आरोप अपनी कमियों और नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए लगा रहा है.”

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मंत्रालय ने आगे कहा,

“पाकिस्तान को बलूचिस्तान के लोगों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए. वहां दमन, बर्बरता और मानवाधिकारों का उल्लंघन बहुत समय से चला आ रहा है.”

क्या हुआ था?

शनिवार, 31 जनवरी 2026 को BLA के लड़ाकों ने बलूचिस्तान के कई जिलों में एक साथ समन्वित (कोऑर्डिनेटेड) हमले किए. इसे उन्होंने ऑपरेशन हेरोफ 2 नाम दिया. जिसका मतलब बलोची भाषा में "काला तूफान" है. पिछले साल 2024 में उनका पहला हेरोफ ऑपरेशन था, जो ज्यादातर सुरक्षाबलों पर केंद्रित था. लेकिन इस बार हमले बहुत बड़े पैमाने पर किए गए.

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हमले कई जगहों पर हुए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्वेटा में पुलिस स्टेशन, हॉकी चौक, सड़कें और मोबाइल यूनिट पर बम से हमला हुआ. मस्तुंग में सेंट्रल जेल पर हमला करके कम से कम 30 कैदियों को आजाद कराया गया. ग्वादर में प्रवासी मजदूरों के कैंप पर हमला हुआ, जहां महिलाएं और बच्चे भी मारे गए.

नुश्की में डिप्टी कमिश्नर हुसैन हजारा और उनके परिवार को अगवा कर लिया गया. कलात, पसनी, दल्बंदिन, खारान, पंजगुर, तुर्बत आदि कई इलाकों में पुलिस लाइन, कोस्ट गार्ड पोस्ट, हाईवे और रेलवे लाइन पर हमले किए गए. कई जगहों पर सुसाइड बॉम्बिंग (फिदायीन हमले) भी हुए, और रेलवे ट्रैक पर बम तक लगा दिए गए.

कितने लोग मारे गए?

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्टी ने बताया कि 31 आम नागरिक और 17 सुरक्षाकर्मी मारे गए. ग्वादर में मजदूर कैंप पर हमले में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

वहीं, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उन्होंने 145 BLA लड़ाकों को मार गिराया. BLA के प्रवक्ता जियंद बलोच ने कहा कि उनके हमलों में 84 पाकिस्तानी सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसी के जवान मारे गए. 18 को जिंदा पकड़ा गया है. और उनके सिर्फ 7 लड़ाके मारे गए, जिनमें से 4 फिदायीन थे.

दोनों तरफ से अलग-अलग आंकड़े हैं, लेकिन कुल मिलाकर 200 के आसपास मौतें हुई हैं.

अमेरिका और चीन के लिए क्यों वेक-अप कॉल?

बलूचिस्तान अमेरिका और चीन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. चीन का CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) इसी इलाके से गुजरता है. ग्वादर पोर्ट चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का बड़ा हिस्सा है, जो चीन को मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप से जोड़ता है. यहां रोड, रेल और पोर्ट बन रहे हैं. BLA इन प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाती है. उसका मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स से बलूच लोगों का शोषण होता है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने रेको डीक में सोना और तांबा खनन के लिए 1.25 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. साथ ही रेयर अर्थ मिनरल्स निकालने के लिए 500 मिलियन डॉलर का MoU भी साइन किया है. लेकिन BLA का कहना है कि ये विदेशी कंपनियां बलूच संसाधनों को लूट रही हैं.

अमेरिकी एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ये हमले उन लोगों के लिए चेतावनी हैं जो पाकिस्तान के मिनरल रिजर्व में निवेश करना चाहते हैं. अगर सुरक्षा की स्थिति ऐसी ही रही, तो दोनों देशों के बड़े प्रोजेक्ट और निवेश खतरे में पड़ सकते हैं.

वीडियो: पाकिस्तान के क्वेटा में ब्लास्ट, 10 की मौत, 32 घायल

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