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भारत में तेल की किल्लत की आशंकाओं के बीच दोस्त रूस ने दिया बड़ा ऑफर, लेकिन दिक्कत बस एक है

भारत अरब देशों से कच्चा तेल और नेचुरल गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगवाता है. अगर यह रूट लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत हो सकती है.

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भारत जरूरत के मुताबिक रूस से तेल की खरीदारी बढ़ा सकता है. (ITG)

अमेरिका-इजरायल से जंग के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. भारत की ऊर्जा जरूरतों को लेकर भी टेंशन बढ़ गई है. भारत अरब देशों से कच्चा तेल और नेचुरल गैस का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से मंगवाता है. अगर यह रूट लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत हो सकती है. ऐसे में क्या ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत एक बार फिर अपने पुराने दोस्त रूस की ओर रुख करेगा?

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रूस से तेल खरीदना भी आसान नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने की वजह से ही पेनल्टी के तौर पर भारत पर 25 फीसदी एस्क्ट्रा टैरिफ ठोका था, जिससे कुल टैरिफ 50 फीसदी हो गया था. भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम डील में रूस से तेल ना खरीदने की शर्त पर ही भारत को पेनल्टी से छुटकारा मिला है. अगर रूस से तेल खरीद बढ़ाई जाती है, तो अमेरिका की नजर तिरछी होने का खतरा है.

रॉयटर्स ने इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि रूस संकट की घड़ी में भारत को कच्चा तेल देने के लिए तैयार है. अगर भारत सरकार कहे तो भारतीय जल सीमा के पास जहाजों में करीब 95 लाख बैरल रूसी तेल है, जो कुछ ही हफ्तों में पहुंच सकता है.

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हालांकि, सूत्र ने यह बताने से मना कर दिया कि गैर-रूसी फ्लीट का कार्गो असल में कहां जा रहा था, लेकिन कहा कि वे कुछ हफ्तों में भारत पहुंच सकते हैं. इससे भारतीय रिफाइनरी को तुरंत राहत मिल सकती है. रिपोर्ट में बताया गया कि रूस भारत को लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) देने का भी इच्छुक है. भारत के लिए LNG का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर कतर है, जिसने हालिया जंग के चलते अपना प्रोडक्शन बंद कर दिया है.

NDTV प्रॉफिट ने भी अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा कि तेल की किल्लत से बचने के लिए भारत रूस से और ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल खरीद सकता है. इससे भारत में तेल की सप्लाई तो हो जाएगी, लेकिन अमेरिका के साथ एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है. वही, अंतरिम डील और पेनल्टी टैरिफ विवाद.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों अहम?

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक समुद्री रास्ता है, जो ईरान और ओमान के बीच है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. फिर आगे अरब सागर आ जाता है. इस समुद्री रास्ते से भारत अपनी जरूरतों का करीब 40 फीसदी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. पश्चिम एशिया के सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत आदि इसी रास्ते से भारत को कच्चा तेल भेजते हैं.

भारत कच्चे तेल का अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है. देश की रिफाइनरी रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करती हैं. नाम ना छापने की शर्त पर इंडस्ट्री के सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि रूस भारत की कच्चे तेल की 40 फीसदी तक जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार है.

इंडस्ट्री डेटा से पता चला कि जनवरी 2026 में भारत का रूसी क्रूड ऑयल का इंपोर्ट घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है. नई दिल्ली ने अमेरिकी टैरिफ से राहत मांगी, जिससे कुल तेल इंपोर्ट में मॉस्को का हिस्सा घटकर 21.2 फीसदी रह गया. फरवरी 2026 में यह हिस्सा वापस बढ़कर लगभग 30 फीसदी हो गया.

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