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इंडिया को मिलेगी Javelin मिसाइल, 'टैंकों का काल' कही जाती है, अमेरिका से सौदा पक्का!
भारत की सेना जल्द ही अमेरिकी Javelin एंटी-टैंक मिसाइल से लैस होगी. Fire-and-Forget तकनीक वाली ये मिसाइल टैंकों के खिलाफ बेहद खतरनाक मानी जाती है. आखिर Javelin में ऐसा क्या खास है और पाकिस्तान के टैंकों के खिलाफ ये कितनी कारगर हो सकती है?
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भारत की सेना जल्द ही जेवलिन को शामिल करेगी (PHOTO- First Brigade Combat Team)
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भारत ने अमेरिका से FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल और एक्सकैलिबर सटीक तोप के गोले खरीदने के लिए डील की पुष्टि की है, जिसमें लाइफसाइकल सपोर्ट और ऑपरेटर ट्रेनिंग भी शामिल है।
यह डील भारत- अमेरिका की स्ट्रेटेजिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए की गई है, ताकि भारत मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपट सके और क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ा सके।
जेवलिन मिसाइल के भारत में शामिल होने से सेना की क्षमता में सुधार होगा और सैनिकों को ज्यादा सुरक्षा और सटीकता के साथ टैंकों व दुश्मन ठिकानों पर हमला करने का मौका मिलेगा।
28 अगस्त 2026 (पब्लिश्ड: 28 अगस्त 2026, 10:51 PM IST)
भारत के सेना जल्द ही जेवलिन एंटी टैंक मिसाइल (Javelin Anti Tank Missile) से लैस होंगी. इस डील की खबर पहले ही आ चुकी थी. ऑपरेशन सिंदूर के कुछ ही समय बाद 29 से 31 मई 2025 को सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग्स का आयोजन हुआ था. उसी दौरान खबर आई थी कि भारत अमेरिका से FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल (Javelin Missile) और एक्सकैलिबर (Excalibur precision-guided artillery rounds) नाम के सटीक हमला करने वाले 216 तोप के गोले मिलेंगे. नवंबर 2025 में डील से जुड़ी सारी जानकारी डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने कांग्रेस को सौंप दी थी. और अब भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस बात पर मुहर लगा दी है.
राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर पोस्ट कर जेवलिन डील की जानकारी दी है (PHOTO- X)
DSCA की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भारत की ओर से उन्हें जो रिक्वेस्ट सौंपी गई थी, उनमें लाइफसाइकल सपोर्ट, सिक्योरिटी इंस्पेक्शन, ऑपरेटर ट्रेनिंग, लॉन्च यूनिट्स के लिए रिफर्बिशिंग सर्विस और पूरी ऑपरेशनल क्षमता के लिए जरूरी बाकी चीजें भी शामिल थीं. DSCA ने कहा कि इस बिक्री से अमेरिका-भारत की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को मजबूती मिलेगी. साथ ही मौजूदा और भविष्य में आने वाले खतरों का मुकाबला करने की भारत की क्षमता बढ़ेगी. DSCA ने कहा,
प्रस्तावित बिक्री से मौजूदा और भविष्य के खतरों का सामना करने, अपने देश की सुरक्षा को मजबूत करने और क्षेत्रीय खतरों को रोकने की भारत की क्षमता में सुधार होगा. भारत की सेनाओं को इन चीजों और सेवाओं को शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी.
जेवलिन टैंकों का काल
जेवलिन मिसाइल पूरी दुनिया में अपने हल्के वजन और ईजी-टू-यूज सिस्टम के लिए मशहूर है. इसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन ने मिलकर बनाया है. ये एक ऐसी मिसाइल है जिसे 'Fire-and-Forget' की श्रेणी में रखा जाता है. मतलब कि इसे फायर करने के बाद सैनिक का काम खत्म. अमेरिका में बनी इस मिसाइल को सबसे बड़ी प्रसिद्धि मिली अफगानिस्तान में. अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान और सीरिया-इराक में भी इसका इस्तेमाल किया.
जेवलिन मिसाइल (PHOTO- Raytheon)
खास बात ये है कि ये न सिर्फ हमला करने बल्कि सर्विलांस करने में भी काम आती है. इसका CLU यानी कमांड लॉन्च यूनिट टारगेट को ढूंढने में भी सहायक है. ये कोई ऐसी मिसाइल नहीं है कि टारगेट ढूंढने के बाद मिसाइल उठाई जाए. फायरिंग की बात करें तो अधिकतर ऐसी मिसाइलें जिन्हें कंधे पर रखकर फायर किया जाता है, उनमें पीछे काफी लंबी खुली जगह चाहिए होती है. अगर जगह न हो तो इसे चलाने वाला बुरी तरह झुलस सकता है. इसी को देखते हुए जेवलिन में तीन तरह के अटैक मोड दिए गए हैं.
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टॉप अटैक: इस मोड में फायर होने के बाद मिसाइल टारगेट के ऊपर जाती है. वहां से मिसाइल टारगेट के उस हिस्से पर गिरती है जिसे भेदना सबसे आसान हो. ये मोड टैंक्स पर हमले में इस्तेमाल किया जाता है.
डायरेक्ट अटैक: बिल्डिंग में छिपे दुश्मनों,और हेलीकॉप्टर जैसे टारगेट्स पर हमला करने के लिए डायरेक्ट मोड का इस्तेमाल किया जाता है. अगर टारगेट के ऊपर पहुंचना संभव न हो, तो भी इस मोड का इस्तेमाल किया जाता है.
सॉफ्ट अटैक: जैसा कि हमने बताया. अगर इस तरह के सिस्टम के पीछे खुली जगह न हो तो इसे चलाने वाला बुरी तरह झुलस सकता है. लेकिन जेवलिन का सॉफ्ट लॉन्च मोड इस मिसाइल को बिल्डिंग और बंकर जैसी बंद जगहों से फायर करने के काबिल बनाता है.
फायर होती जेवलिन मिसाइल (PHOTO- Lockheed Martin)
जेवलिन के फीचर्स
देश: अमेरिकन मेड
श्रेणी (क्लास): एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM)
बेसिंग: पोर्टेबल, कंधे से फायर होने वाली
लंबाई: 1.2 मीटर
लॉन्च के समय वजन: 22.1 किलोग्राम
पेलोड: 8.4 किलोग्राम का टैंडम चार्ज से लैस हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वॉरहेड
प्रोपल्शन सिस्टम: शुरुआत में सॉफ्ट लॉन्च, फिर फ्लाइट के दौरान आगे बढ़ने के लिए सॉलिड प्रोपेलेंट वाला फ्लाइट मोटर
रेंज: 2.5 किलोमीटर (हल्के वॉरहेड के साथ 4.5 किलोमीटर)
स्पीड: 140 मीटर प्रति सेकेंड
टैंक पर लगी जेवलिन मिसाइल (PHOTO-X)अपने आप टारगेट पर पहुंच जाती है जेवलिन
लॉन्च के बाद जेवलिन अपने आप टारगेट तक पहुंच जाता है, जिससे गनर कवर ले सकता है और जवाबी फायर से बच सकता है. फायरिंग के तुरंत बाद सैनिक अपनी जगह बदल सकते हैं, या किसी दूसरे खतरे से निपटने के लिए इसे रीलोड कर सकते हैं. टॉप-अटैक प्रोफाइल का इस्तेमाल करके जेवलिन बेहतर विजिबिलिटी के लिए अपने टारगेट के ऊपर चढ़ता है और फिर वहां हमला करता है जहां आर्मर सबसे कमजोर होता है. फिर फायर करने के लिए, गनर चुने हुए टारगेट पर कर्सर रखता है.
जेवलिन कमांड लॉन्च यूनिट फिर मिसाइल को लॉन्च से पहले लॉक-ऑन सिग्नल भेजती है. अपने सॉफ्ट लॉन्च डिजाइन के साथ, जेवलिन को बिल्डिंग या बंकर के अंदर से सुरक्षित रूप से फायर किया जा सकता है. जेवलिन को सबसे पहले यूएस आर्मी और मरीन कॉर्प्स के लिए लॉकहीड मार्टिन-रेथियॉन के जॉइंट वेंचर द्वारा डेवलप और प्रोड्यूस किया गया था.
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