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पाकिस्तान के 'अल-खालिद' का काल बनेंगी Javelin मिसाइलें, अमेरिका के साथ डील फाइनल

Indo-US Javelin Missile Deal: जेवलिन के अलावा अमेरिका ने एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी राउंड की बिक्री को भी मंजूरी दे दी है. DSCA ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि इस डील से इलाके (एशिया) में बेसिक मिलिट्री बैलेंस में कोई बदलाव नहीं आएगा.

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us to give javelin missile Excalibur precision guided artillery rounds to india in 93 million dollar deal
जेवलिन मिसाइल फायर करता अमेरिकी सैनिक (PHOTO-Lockheed Martin)
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मानस राज
20 नवंबर 2025 (अपडेटेड: 20 नवंबर 2025, 01:17 PM IST)
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अमेरिका ने भारत को 8 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक के हथियार और गोला-बारूद की बिक्री (Indo-US Defence Deal) पर मुहर लगा दी है. इस डील के तहत भारत को 100 FGM-148 जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल (Javelin Missile) और एक्सकैलिबर (Excalibur precision-guided artillery rounds) नाम के सटीक हमला करने वाले 216 तोप के गोले मिलेंगे. डील से जुड़ी सारी जानकारी डिफेंस सिक्योरिटी को-ऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने कांग्रेस को सौंप दी है.

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जेवलिन मिसाइल (PHOTO- Raytheon)

DSCA द्वारा जारी बयान के मुताबिक, भारत की ओर से उन्हें जो रिक्वेस्ट सौंपी गई है, उनमें लाइफसाइकल सपोर्ट, सिक्योरिटी इंस्पेक्शन, ऑपरेटर ट्रेनिंग, लॉन्च यूनिट्स के लिए रिफर्बिशिंग सर्विस और पूरी ऑपरेशनल क्षमता के लिए जरूरी बाकी चीजें भी शामिल हैं. DSCA ने कहा कि इस बिक्री से अमेरिका-भारत की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को मजबूती मिलेगी. साथ ही मौजूदा और भविष्य में आने वाले खतरों का मुकाबला करने की भारत की क्षमता बढ़ेगी. DSCA ने कहा, 

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जेवलिन के अलावा अमेरिका ने एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी राउंड की बिक्री को भी मंजूरी दे दी है. DSCA ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि इस डील से इलाके (एशिया) में बेसिक मिलिट्री बैलेंस में कोई बदलाव नहीं आएगा. ये कह कर अमेरिका अपनी बैलेंस दिखने वाली नीति का बचाव कर रहा है. इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार रोहित शर्मा के मुताबिक डील पर जानकारी देते हुए अमेरिकी सरकार ने कहा कि उसे बिक्री से जुड़े किसी भी ऑफसेट अरेंजमेंट के बारे में पता नहीं है. सरकार के मुताबिक ऐसा कोई भी एग्रीमेंट भारत और मैन्युफैक्चरर्स के बीच बाद में तय किया जाएगा.

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जेवलिन-टैंक उड़ाने में माहिर

जेवलिन मिसाइल पूरी दुनिया में अपने हल्के वजन और ईजी-टू-यूज सिस्टम के लिए मशहूर है. इसे अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन ने मिलकर बनाया है. ये एक ऐसी मिसाइल है जिसे 'Fire-and-Forget' की श्रेणी में रखा जाता है. माने इसे फायर करने के बाद सैनिक का काम खत्म. अमेरिका में बनी इस मिसाइल को सबसे बड़ी ख्याति मिली अफगानिस्तान में. अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान और सीरिया-इराक में भी इसका इस्तेमाल किया. खास बात ये है कि ये न सिर्फ हमला करने बल्कि सर्विलांस करने में भी काम आती है. इसका CLU यानी कमांड लॉन्च यूनिट टारगेट को ढूंढने में भी सहायक है. ये कोई ऐसी मिसाइल नहीं है कि टारगेट ढूंढने के बाद मिसाइल उठाई जाए. फायरिंग की बात करें तो अधिकतर ऐसी मिसाइलें जिन्हें कंधे पर रखकर फायर किया जाता है, उनमें पीछे काफी लंबी खुली जगह चाहिए होती है. अगर जगह न हो तो इसे चलाने वाला बुरी तरह झुलस सकता है. इसी को देखते हुए जेवलिन में तीन तरह के अटैक मोड दिए गए हैं.

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जेवलिन सिस्टम से टारगेट लॉक करता सैनिक (PHOTO-
  • टॉप अटैक: इस मोड में फायर होने के बाद मिसाइल टारगेट के ऊपर जाती है. वहां से मिसाइल टारगेट के उस हिस्से पर गिरती है जिसे भेदना सबसे आसान हो. ये मोड टैंक्स पर हमले में इस्तेमाल किया जाता है.
  • डायरेक्ट अटैक: बिल्डिंग में छिपे दुश्मनों,और हेलीकॉप्टर जैसे टारगेट्स पर हमला करने के लिए डायरेक्ट मोड का इस्तेमाल किया जाता है. अगर टारगेट के ऊपर पहुंचना संभव न हो, तो भी इस मोड का इस्तेमाल किया जाता है. 
  • सॉफ्ट अटैक: जैसा कि हमने बताया, अगर इस तरह के सिस्टम के पीछे खुली जगह न हो तो इसे चलाने वाला बुरी तरह झुलस सकता है. लेकिन जेवलिन का सॉफ्ट लॉन्च मोड इस मिसाइल को बिल्डिंग और बंकर जैसी बंद जगहों से फायर करने के काबिल बनाता है
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टैंक पर लगी जेवलिन मिसाइल (PHOTO-X)

जेवलिन के फीचर्स पर नजर डालें तो-

  • देश: अमेरिकन मेड 
  • श्रेणी(क्लास): एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) 
  • बेसिंग: पोर्टेबल, कंधे से फायर होने वाली 
  • लंबाई: 1.2 मीटर 
  • लॉन्च के समय वजन: 22.1 किलोग्राम 
  • पेलोड: 8.4 किलोग्राम का टैंडम चार्ज से लैस हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वॉरहेड 
  • प्रोपल्शन सिस्टम: शुरुआत में सॉफ्ट लॉन्च, फिर फ्लाइट के दौरान आगे बढ़ने के लिए सॉलिड प्रोपेलेंट वाला फ्लाइट मोटर 
  • रेंज: 2.5 किलोमीटर (हल्के वॉरहेड के साथ 4.5 किलोमीटर) 
  • स्पीड: 140 मीटर प्रति सेकेंड

लॉन्च के बाद जेवलिन अपने आप टारगेट तक पहुंच जाता है, जिससे गनर कवर ले सकता है और जवाबी रफायर से बच सकता है. फायरिंग के तुरंत बाद सैनिक अपनी जगह बदल सकते हैं, या किसी दूसरे खतरे से निपटने के लिए इसे रीलोड कर सकते हैं. टॉप-अटैक प्रोफाइल का इस्तेमाल करके, जेवलिन बेहतर विजिबिलिटी के लिए अपने टारगेट के ऊपर चढ़ता है और फिर वहां हमला करता है जहाँ आर्मर सबसे कमजोर होता है. फायर करने के लिए, गनर चुने हुए टारगेट पर कर्सर रखता है. जेवलिन कमांड लॉन्च यूनिट फिर मिसाइल को लॉन्च से पहले लॉक-ऑन सिग्नल भेजती है. अपने सॉफ्ट लॉन्च डिजाइन के साथ, जेवलिन को बिल्डिंग या बंकर के अंदर से सुरक्षित रूप से फायर किया जा सकता है. जेवलिन को सबसे पहले यूएस आर्मी और मरीन कॉर्प्स के लिए लॉकहीड मार्टिन-रेथियॉन के जॉइंट वेंचर द्वारा डेवलप और प्रोड्यूस किया गया था.

एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी राउंड

रेथियॉन और BAE सिस्टम्स बोफोर्स द्वारा मिलकर बनाया गया एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल, एक सटीक हथियार है. एक्सकैलिबर हथियार हर मौसम में सभी रेंज पर सटीक पहला राउंड असर देता है. यह हथियार सिस्टम 39-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 40 किलोमीटर, 52-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 50 किलोमीटर और 58-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 70 किलोमीटर तक बढ़ा देता है. एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल के सटीक लेवल का इस्तेमाल करके, दूसरे आर्टिलरी हथियारों में भी समय, लागत और लॉजिस्टिकल बोझ में काफी कमी आती है. रेथियॉन का दावा है कि औसतन, एक एक्सकैलिबर हथियार, 10 पारंपरिक हथियार के बराबर काम करता है.

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एक्सकैलिबर का इस्तेमाल करते सैनिक (PHOTO- US Marine Corps)

एक्सकैलिबर गोला-बारूद हर उस हॉवित्जर (एक तरह की तोप) के साथ कम्पैटिबल है जिसके साथ इसका टेस्ट किया गया है. यह हथियार M777, M109 सीरीज, M198, आर्चर और PzH2000 सहित कई सिस्टम में पूरी तरह से क्वालिफाइड है. भारत के पास M777 हॉवित्जर है. एक्सकैलिबर को अमेरिकी सेना एक्सटेंडेड रेंज कैनन आर्टिलरी, या ERCA से सफलतापूर्वक फायर किया गया है, और इसे दूसरे मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करने की प्लानिंग भी चल रही है. 

(यह भी पढ़ें: AI, लेजर और हाइपरसोनिक तकनीक: भारत के 5 फ्यूचर हथियार जो बदल देंगे जंग का अंदाज़)

एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल की सटीकता, और कई गन सिस्टम पर इंटीग्रेट होने की इसकी क्षमता इसे एक शानदार हथियार बनाती है. अमेरिका और उसके पार्टनर्स, दोनों को अलग-अलग तरह के लड़ाई के माहौल में ये हथियार जमीनी टारगेट के खिलाफ ऐसी क्षमता देती है जिसकी बराबरी मुश्किल है. भारत के अलावी स्वीडन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जॉर्डन, स्पेन और नीदरलैंड्स ने भी अपनी सेनाओं के लिए एक्सकैलिबर प्रिसिजन-गाइडेड प्रोजेक्टाइल को चुना है.

वीडियो: पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मिसाइल डील होने वाली है, भारत पर क्या असर होगा?

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