कुछ दिनों से देश में एक आशंका थी कि कहीं तेल की किल्लत न हो जाए. कहा जा रहा था कि ईरान ने हॉर्मुज जल क्षेत्र से तेल ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही रोक दी है. इसके बाद से सबसे ज्यादा संकट भारत को होने वाली तेल की आपूर्ति पर दिखने वाला था. लेकिन अब इस संकट से मुक्ति मिलती दिख रही है, क्योंकि अमेरिका ने भारत को रियायत देते हुए रूस से तेल खरीदने पर लगी रोक हटा दी है. अमेरिका का तर्क है कि इससे तेल के बढ़ते दामों को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.
देश में पेट्रोल-डीजल की नहीं होगी किल्लत, अमेरिका ने संकट दूर कर दिया, पर टाइम फिक्स है
अमेरिका से ये खबर ऐसे समय आई है, जब भारत मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई में रुकावटों के प्रति कमजोर बना हुआ है. भारत के पास सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल बचा है. भारत अपना अपना लगभग 40 प्रतिशत तेल ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ इलाके से आयात करता है.
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक 30 दिन के लिए दी गई ये छूट उन ऑयल टैंकर्स पर लागू होगी जिनमें पहले से ही भारत आने वाला तेल लदा हुआ है. यानी खास तौर पर उन रूसी तेल टैंकरों को ये छूट मिलेगी, जो US की नई पाबंदियों के लागू होने से पहले लोड हो चुके थे, लेकिन पाबंदियां लागू होने के कारण वो भारत नहीं आ सके थे. अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से इन टैंकरों में लदे तेल को भारत में बेचा जा सकेगा. इससे देश में तेल की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आएगी.
इस बात की पुष्टि करते हुए US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा,
‘भारत अमेरिका का एक जरूरी पार्टनर है. यह कामचलाऊ कदम ईरान की ग्लोबल एनर्जी पर पैदा हुए दबाव को कम करेगा. हमें उम्मीद है कि भारत अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाएगा. ग्लोबल मार्केट में तेल का फ्लो जारी रखने के लिए अमेरिका भारतीय रिफाइनर को रूसी तेल खरीदने की इजाज़त देने के लिए 30 दिन की छूट दे रहा है.’

यह छूट ऐसे समय में मिली है जब भारत मिडिल ईस्ट में एनर्जी सप्लाई में रुकावटों के प्रति कमजोर बना हुआ है. रॉयटर्स के मुताबिक, भारत के पास सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल बचा है. भारत अपना अपना लगभग 40 प्रतिशत तेल ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ इलाके से आयात करता है. रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकारी रिफाइनर जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड पहले से ही ट्रेडर्स से रूसी क्रूड ऑयल खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं, ताकि जल्द से जल्द डिलीवरी हो सके.
एक सूत्र ने कहा कि भारतीय सरकारी रिफाइनर पहले ही ट्रेडर्स से लगभग 20 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद चुके हैं. कुछ रिफाइनरों के लिए, यह कदम रूसी सप्लाई में वापसी का संकेत है. इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, HPCL और MRPL को आखिरी बार नवंबर में रूसी क्रूड शिपमेंट मिला था.
अमेरिका के बयान पर भारत में विपक्ष का सवाल है कि अमेरिका होता कौन है भारत को इजाज़त देने वाला? विपक्ष का सरकार से सवाल है, अब क्या अमेरिका तय करेगा कि हमें किसके साथ और कितने दिनों के लिए व्यापार करना है? अमेरिका का बयान आते ही विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया. कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा,
अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारत को 30 दिन के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी है. ये हमारी स्वतंत्रता और संप्रभुता पर करारा तमाचा है. अमेरिका कौन होता है हमें अनुमति देने वाला? इसी एनर्जी सिक्योरिटी के बारे में राहुल गांधी लगातार आगाह कर रहे हैं.

कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने लिखा,
बीजेपी सरकार में भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता को प्रतिदिन खतरे में डाला जा रहा है. रूस से तेल खरीदने के लिए भारत को अमेरिका की अनुमति की आवश्यकता क्यों है?
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका युद्ध विराम की घोषणा करेगा.
- अमेरिका भारत को ईरान से तेल ना खरीदने का निर्देश देगा.
- अमेरिका भारत को रूस से तेल ना खरीदने का निर्देश देगा और तब तक प्रतिबंध लगाएगा जब तक मोदी सरकार झुककर रूस से तेल नहीं खरीदने की घोषणा न कर दे.
- क्या अब अमेरिका मोदी सरकार को 30 दिनों की अवधि के लिए रूस से तेल खरीदने की अनुमति देगा?
- अमेरिका पहले भारत के साथ 'फ्रेमवर्क व्यापार समझौता' की घोषणा करेगा.
- क्या दिल्ली में कोई सरकार है?'

राज्यसभा सांसद कपिल सिबल ने तंज कसते हुए लिखा,
भारत लोकतंत्र की जननी है. अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए तेल खरीदने की अनुमति दी. हमारा आत्मनिर्भर भारत! हमारी स्वतंत्र विदेश नीति!

अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया था. 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और बाकी का 25% पेनाल्टी के तौर पर क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदता था. फिर इसी साल टैरिफ को घटाकर 50 से 15% कर दिया गया. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदने पर राज़ी हो गया है इसलिए ट्रेड डील की जा रही है, और टैरिफ को कम किया जा रहा है. ट्रंप के इसी दावे के दम पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाते हैं कि वो अमेरिका के दबाव में झुक गए हैं.
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