वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने नई दिल्ली को भी टेंशन में डाल दिया है. अंतरराष्ट्रीय कानूनों का समर्थक रहा भारत इस अमेरिकी दुस्साहस पर क्या रिएक्शन देगा, ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की नजरें इसी पर थीं. घटना के कई घंटों तक नई दिल्ली से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. रविवार, 4 जनवरी को भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी किया, जिसमें कहा गया कि वेनेजुएला के घटनाक्रम चिंता का विषय हैं. भारत ने ये भी कहा कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और सभी 'संबंधित पक्षों' से अपील करता है कि वो बातचीत से मुद्दों का समाधान करें. भारत ने वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई के प्रति अपना समर्थन भी जताया.
कच्चे तेल के लिए ट्रंप ने जिस वेनेजुएला पर हमला किया, वहां से भारत कितना तेल खरीदता है?
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज जारी किया, जिसमें कहा गया कि वेनेजुएला के घटनाक्रम चिंता का विषय हैं.
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इस मामले में दुनिया भर के देशों की ‘पक्षधरता’ वाले स्टैंड के मुकाबले भारत का रियेक्शन काफी संतुलित दिखा. ट्रंप के ‘टैरिफ कांड’ के बाद भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील लंबे समय से फंसी है. ऐसे में वह इस मामले में अपने कदम फूंक-फूंककर रखना चाहता है.
वेनेजुएला और अमेरिका से तुलना करें तो भारत के रिश्ते वेनेजुएला से फिलहाल उतने ज्यादा अहम नहीं हैं, जितने अमेरिका से हैं. हालांकि एक समय था, जब भारत वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता था. दोनों देशों के बीच तेल व्यापार का एक मजबूत इतिहास रहा है लेकिन TOI की एक रिपोर्ट में थिंक टैंक ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (GTRI) के एक नोट के हवाले से कहा गया है कि वेनेजुएला संकट का भारत पर आर्थिक या एनर्जी के लिहाज से कोई खास असर पड़ने की संभावना बेहद कम नज़र आती है.

थिंक टैंक का कहना है कि 2000 और 2010 के दशक में ‘ONGC-विदेश’ जैसी भारतीय कंपनियों की वेनेजुएला के ओरिनोको बेल्ट में हिस्सेदारी थी और वहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भारत लाया जाता था लेकिन 2019 के बाद अमेरिका के प्रतिबंधों के चलते भारत को आयात और व्यावसायिक गतिविधियां कम करनी पड़ीं. फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार काफी सीमित है और लगातार घटता जा रहा है.
भारत-वेनेजुएला व्यापारइंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय व्यापार साल 2019-20 में 6 हजार 397 मिलियन अमेरिकी डॉलर (तकरीबन 57 हजार करोड़) का था. इसमें से भारत का आयात 6 हजार 057 मिलियन डॉलर का था. ज्यादातर व्यापार तेल से जुड़ा हुआ था. लेकिन अमेरिका के वेनेजुएला पर लगाए प्रतिबंधों (सैंक्शंस) के बाद व्यापार में लगातार गिरावट देखने को मिली.
साल 2020-21 में भारत-वेनेजुएला व्यापार घटकर 1 हजार 271 मिलियन डॉलर रह गया, जिसमें भारत का आयात 714 मिलियन डॉलर का था.
साल 2021-22 में यह और गिरकर 424 मिलियन डॉलर हो गया. भारत का आयात सिर्फ 89 मिलियन डॉलर रहा.
वहीं 2022-23 में कुल व्यापार 431 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का आयात 253 मिलियन डॉलर का था.
TOI की रिपोर्ट कहती है कि साल 2024–25 में भारत ने वेनेजुएला से सिर्फ 364.5 मिलियन डॉलर का सामान आयात किया, जिसमें से 255.3 मिलियन डॉलर कच्चे तेल का था. वहीं भारत का निर्यात 95.3 मिलियन डॉलर रहा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा दवाइयों का था.
GTRI का कहना है कि कम व्यापार, पहले से मौजूद प्रतिबंधों और दोनों देशों के बीच बड़ी भौगोलिक दूरी को देखते हुए वेनेजुएला संकट का भारत की अर्थव्यवस्था या ऊर्जा सुरक्षा पर कोई ठोस असर पड़ने की उम्मीद नहीं है लेकिन भारत को इससे सतर्क इसलिए रहना चाहिए क्योंकि आने वाले समय में कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों के लिए दुनिया में कंपटीशन और तेज हो सकता है. ऐसे में भारत को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए. अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहिए और किसी भी जियोपॉलिटिकल प्रेशर में आए बिना जरूरी संसाधनों और ऊर्जा तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करना चाहिए.
वेनेजुएला से डिप्लोमेटिक रिश्तेभारत और वेनेजुएला के कूटनीतिक रिश्ते भी कभी बहुत गहरे नहीं रहे. हालांकि, वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज भारत जरूर आए थे. उस समय देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे. ये 2005 का साल था और यही वो वक्त था, जब नई दिल्ली और कराकस के बीच राजनीतिक रिश्ते अपने चरम पर थे. शावेज ने अपने राजकीय दौरे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से द्विपक्षीय बातचीत की थी.

फिर 2012 में निकोलस मादुरो भी भारत आए थे लेकिन तब वो राष्ट्रपति नहीं वहां के विदेश मंत्री की हैसियत से थे. 7 अगस्त 2012 को नई दिल्ली में भारत-CELAC (लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों का संगठन) की मीटिंग हुई थी. इस मीटिंग में उन्होंने तत्कालीन भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से वार्ता की थी.
मार्च 2013 में जब ह्यूगो शावेज का निधन हो गया, तब तत्कालीन यूपीए सरकार ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तत्कालीन राज्य मंत्री सचिन पायलट को भेजा था. सचिन पायलट ने वहां शावेज की मां एलेना फ्रियास डी शावेज के अलावा निकोलस मादुरो से भी मुलाकात की थी. मादुरो उस समय वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति थे.
यूपीए की सरकार जाने और नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद वेनेजुएला से भारत के संबंध और सीमित हो गए. सितंबर 2016 में भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वेनेजुएला गए थे. मादुरो के बाद वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति बनीं डेल्सी रोड्रिग्ज भी भारत आ चुकी हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के न्योते पर कार्यकारी उपराष्ट्रपति की हैसियत से डेल्सी रोड्रिगेज अगस्त 2023 में भारत आई थीं.
नई दिल्ली की दुविधाभारत और वेनेजुएला राजनीतिक रूप से उतने गहरे संबंधी नहीं रहे, जितने आर्थिक तौर पर थे. इनमें भी तेल का व्यापार ही वो कड़ी थी, जिसने दोनों देशों को आर्थिक रिश्तों में बांध रखा था. हालांकि, वेनेजुएला संकट से नई दिल्ली दुविधा में है. एक तरफ तो मादुरो पर ट्रंप का एकतरफा एक्शन है और दूसरी तरफ भारत की अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानून पर आधारित विश्व व्यवस्था को लेकर प्रतिबद्धता है. भारत अक्सर भौगोलिक दूरी वाले देशों के मामले में टिप्पणी से बचता है लेकिन यहां मामला किसी देश की ‘संप्रभुता पर अतिक्रमण’ का है, जिसके लिए ट्रंप की उनके ही देश में आलोचना हो रही है. ऐसे में विकासशील देश भारत से इस मसले पर एक मजबूत स्टैंड की अपेक्षा रखते हैं.
वेनेजुएला में कितने भारतीयवेनेजुएला में भारतीयों की संख्या भी बहुत ज्यादा नहीं है. एक्सप्रेस की रिपोर्ट भारतीय दूतावास के रिकॉर्ड के हवाले से बताती है कि वेनेजुएला में 100 से भी कम भारतीय रहते हैं. इनमें करीब 50 एनआरआई हैं और 30 पीआईओ हैं. पीआईओ यानी पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन. यानी जिनके पूर्वज भारतीय थे लेकिन अब किसी और देश के नागरिक हैं.
वीडियो: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की पूरी कहानी













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