The Lallantop

50 अफसरों ने जहां जमीन खरीदी, वहीं निकला बायपास, 5 करोड़ की प्रॉपर्टी 65 करोड़ की हो गई

MP land scam: मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव से एक मामला सामने आया है. यहां करीब 5 एकड़ कृषि जमीन की खरीद हुई. डॉक्युमेंट्स में दिखाया गया कि इस जमीन को 50 हिस्सों में खरीदा गया. मतलब 50 लोगों ने मिलकर इंवेस्ट किया लेकिन जब कागजों को थोड़ा गहराई से देखा गया तो पता चला कि असल में इसके पीछे 41 अलग - अलग खरीदार थे.

Advertisement
post-main-image
कई IAS और IPS अफसर ने मिलकर जमीन खरीदी थी. (फोटो-सांकेतिक फोटो)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • मध्य प्रदेश के कोलार इलाके में करीब 5 एकड़ कृषि जमीन 41 अलग-अलग खरीदारों द्वारा खरीदी गई जिसमें कई IAS और IPS अफसर शामिल थे।
  • यह भूमि खरीदी गई अप्रैल 2022 में, जबकि अगस्त 2023 में उस क्षेत्र से गुजरने वाले 3200 करोड़ रुपये के वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दी गई।
  • जून 2024 में उस जमीन का लैंड यूज कृषि से आवासीय में बदला गया, जिससे उसकी कीमत लगभग 11 गुना बढ़कर 55 से 65 करोड़ रुपये हो गई।

इंसान जीवन से क्या चाहता है? खेती की जमीन से बायपास निकल जाए. न निकले तो प्लॉट के बगल से हाइवे निकल जाए. कभी निकला? नहीं? मुआवजे के पैसे से SUV आई! नहीं. अब चलिए एमपी. मध्य प्रदेश में जमीन का एक ऐसा खेल सामने आया है जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर अफसर लोग कितने दूर की चाल चलते हैं. मामला भोपाल के कोलार इलाके के गराड़ी घाट गांव का है. यहां करीब 5 एकड़ कृषि जमीन की खरीद हुई. लेकिन कहानी सिर्फ जमीन खरीदने की नहीं. असली कहानी है उसकी टाइमिंग की.

Advertisement

मामले की शुरुआत 4 अप्रैल 2022 से होती है. दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक इस दिन एक जमीन की रजिस्ट्री की जाती है. कुल जमीन करीब 2.023 हेक्टेयर यानी लगभग 5 एकड़ की थी. डॉक्युमेंट्स में दिखाया गया कि इस जमीन को 50 हिस्सों में खरीदा गया. मतलब 50 लोगों ने मिलकर इंवेस्ट किया. लेकिन जब कागजों को थोड़ा गहराई से देखा गया तो पता चला कि असल में इसके पीछे 41 अलग-अलग खरीदार थे.

रिपोर्ट के मुताबिक ये कोई आम खरीदार नहीं थे. इनमें कई IAS और IPS अफसर शामिल थे. सिर्फ मध्य प्रदेश कैडर के ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा और दिल्ली में तैनात अफसरों के नाम भी सामने आए. यानी पूरा ऑफिसर्स क्लब मिलकर जमीन में इन्वेस्ट कर रहा था. इस जमीन की रजिस्ट्री उस वक्त करीब 5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी जबकि बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ 78 लाख रुपए बताई गई. वहीं IPR में इसे लाइक माइंडेड ऑफिसर्स का इंवेस्टमेंट बताया गया. 

Advertisement

अब तक सब कुछ लीगल इंवेस्टमेंट जैसा लग रहा था लेकिन असली मामला कुछ और ही निकला.

जमीन खरीदने के करीब 16 महीने बाद यानी 31 अगस्त 2023 को मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 3200 करोड़ रुपए के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी. ये जो नया बायपास बनने वाला है वो इन अफसरों की खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर दूर गुजरने वाला है.

अब यहीं से मामले में कुछ गड़बड़ लगनी शुरू हो गई. क्योंकि आम आदमी को तो सड़क बनने की खबर तब पता चलती है, जब जेसीबी उसके मोहल्ले में पहुंच जाती है. लेकिन यहां जमीन पहले खरीद ली गई और फिर उसके पास से बायपास गुजरने की मंजूरी आ गई. फिर आया जून 2024. इस जमीन का लैंड यूज बदल दिया गया. यानी जो जमीन पहले कृषि भूमि थी उसे आवासीय जमीन बना दिया गया. बस यहीं से खेल पूरी तरह पलट गया.

Advertisement

जो जमीन पहले खेती की थी, वो अब कॉलोनी काटने लायक हो गई. नतीजा? उसकी कीमत में जबरदस्त उछाल आया. रिपोर्ट के मुताबिक अब उसी जमीन की कीमत 55 करोड़ से 65 करोड़ रुपए के बीच पहुंच चुकी है. यानी करीब 11 गुना तक फायदा. अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या अफसरों को पहले से जानकारी थी कि यहां बायपास आने वाला है? क्या इसी जानकारी के आधार पर ही इंवेस्टमेंट किया गया? या फिर ये सिर्फ सही समय पर सही जगह इंवेटमेंट वाली कहानी है?

फिलहाल यही बहस चल रही है. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि सरकारी सिस्टम के भीतर बैठे लोग जमीन में ऐसा दांव खेल गए कि करोड़ों का फायदा हो गया. अब मामला सिर्फ जमीन का नहीं रह गया है. सवाल सिस्टम की पारदर्शिता, अंदरूनी जानकारी और अफसरों की जवाबदेही पर भी खड़े हो रहे हैं. 

वीडियो: उर्विल पटेल ने आईपीएल में कौन सा रिकॉर्ड तोडा? LSG के खिलाफ खेली ऐतिहासिक पारी

Advertisement