चीन कई सालों से धरती पर एक आर्टिफिशियल सूरज बनाने की तैयारी में है. वह इसके एक कदम और नजदीक पहुंच गया है. उसने दुनिया का सबसे शक्तिशाली चुंबक तैयार कर लिया है, जो इस सूरज को लगाम में रखेगा.
चीन ने अपने 'आर्टिफिशियल सूरज' पर लगाम लगाने वाला मैग्नेट बना लिया, साइज देखकर ही डर जाएंगे
China artificial sun project: चीन धरती पर आर्टिफिशियल सूरज बनाने की तैयारी के एक कदम और नजदीक पहुंच गया है. उसने दुनिया का सबसे शक्तिशाली चुंबक तैयार कर लिया है, जो इस सूरज को लगाम में रखेगा.

अपने को एनर्जी चाहिए? घर की लाइट, सड़क पर गाड़ियां, फैक्ट्री में भट्ठी, सबको ज्यादातर एनर्जी फॉसिल फ्यूल से मिलती है. यानी कहीं कोयला जलता है, बिजली बनती है, पेट्रोल-डीजल वगैरा खर्च होता है. लेकिन चीन फोसिल फ्यूल की जगह ऐसा कुछ इस्तेमाल करेगा, जिससे कार्बन एमिशन ना हो. ना रहेगा बांस, ना बजेगी बांसुरी.
चुंबक, सूरज को लगाम में रखेगा?बस समझ लीजिए कि चीन यही कर रहा है. उसने दुनिया के सबसे बड़े एनर्जी के सोर्स (सूरज) को ही टीप लिया है. सूरज के अंदर हाइड्रोजन गैस होती है. इसके एक ऐटम, यानी परमाणु में न्यूक्लियस होता है.
समझिए कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन नाम के और छोटे पार्टिकल्स का घर. जब दो हल्के ऐटम्स के न्यूक्लियस आपस में चिपक जाते हैं और एक भारी ऐटम बनाते हैं तो एनर्जी रिलीज होती है. यह है न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्शन यानी चिपकना.
ब्रह्मांड में जितने सितारे हैं, उन सबके कोर में न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्शन चलता है. यही इन सितारों को जिंदा रखता है. जब चिपकने के लिए और एनर्जी रिलीज करने के लिए ईंधन यानी न्यूक्लियस नहीं बचते, तब ये सितारे मरने लगते हैं.
अब समझ लीजिए, ऐसा रिएक्शन जो सितारों को जिंदा रखे है, तो वो कितना एनर्जेटिक होगा. इस एनर्जी का बड़ा हिस्सा होती है हीट.
अपने सूरज को ही ले लीजिए. इसके कोर का टेंपरेचर 15 मिलियन यानी 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस होता है. 100 डिग्री सेल्सियस पर पानी उबलने लगता है. और उबलता पानी शरीर पर गिर जाए तो… अब अंदाजा लगा लीजिए कि 1.5 करोड़ डिग्री सेल्सियस क्या ही होगा.
मुद्दे की बात ये है कि चीन को एनर्जी बनानी है. जैसे सूरज पर बनती है. यानी न्यूक्लियर फ्यूजन से. एनर्जी बनेगी तो टेंपरेचर भी बढ़ेगा. तो अब इस तापमान को कंट्रोल करना है. यहां पर ही दुनिया के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट की एंट्री होती है.
क्या है सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट?न्यूक्लियर रिएक्टर के अंदर हाइड्रोजन गैस इतनी गर्म हो जाती है कि प्लाज्मा में कन्वर्ट हो जाती है. प्लाज्मा चार्ज्ड पार्टिकल्स का सूप मान लीजिए. इसका ही टेंपरेचर करोड़ों डिग्री पर होता है. चुंबक की जो मैग्नेटिक फील्ड होती है, वो शील्ड की तरह काम करती है और इस प्लाज्मा को आउट ऑफ कंट्रोल जाने से रोकती है. यानी रिएक्टर की दीवारों को छूने से रोकती है. ठीक वैसे ही जैसे धरती की मैग्नेटिक फील्ड सूरज से आने वाले प्लाज्मा पर ब्रेक मार देती है, इससे पहले कि वो हम तक पहुंचे.
असली सूरज में और इस मेड इन चाइना वाले में डिफरेंस ये है कि असली सूरज की ग्रैविटी ही प्लाज्मा को पकड़े रहती है. चीन को ऐसा करने के लिए चुंबक बनाना पड़ा है.
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चीन का प्लान है 2030 तक फ्यूजन पावर से क्लीन एनर्जी बनाना स्टार्ट कर देना. एक बार ये हो गया तो वर्चुअली लिमिटलेस एनर्जी का रास्ता खुल जाएगा. इस रास्ते पर एक माइलस्टोन मैग्नेट था, जो उसने बना लिया है. उसके इंस्टीट्यूट ऑफ प्लाज्मा फिजिक्स ने 21 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा ये मैग्नेट तैयार किया है जिसका वजन 582 टन है. यानी करीब 100 हाथियों के बराबर.
बाकी चीन का ये आर्टिफिशियल सूरज का प्रोग्राम ठीक-ठाक स्पीड से प्रोग्रेस कर रहा है. इसी साल इसने एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. 100 मिलियन डिग्री का टेंपरेचर 1066 सेकंड के लिए होल्ड किया था. यानी इतनी देर तक सक्सेसफुली फ्यूजन के लिए जरूरी कंडीशन्स को मेंटेन किया जा सका.
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