आधुनिक युद्ध अब केवल मिसाइलों, टैंकों या लड़ाकू विमानों से नहीं जीते जाते. युद्ध का फैसला अक्सर पहली मिसाइल दागे जाने से पहले ही हो जाता है. आजकल युद्धक्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) और डेटा का खेल चलता है. भारत भी अपने आप को इस वॉरफेयर के लिए तैयार कर रहा है. सैन्य रणनीति को प्लेटफॉर्म-केंद्रित से प्रोसेस-केंद्रित और तकनीक-आधारित बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
आधुनिक वॉरफेयर के लिए भारत है तैयार, AI और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर तगड़ा फोसक
AI एल्गोरिदम से कई UAV को नेटवर्क कर कोऑर्डिनेट किया जाता है. फॉर्मेशन फ्लाइंग, कोलिजन अवॉइडेंस, और टारगेट सर्च किया जाता है.


AI से लेकर साइबर वॉरफेयर के डोमेन में भारत खुद को कैसे इंटिग्रेट कर रहा है, आइए जानते हैं.
ऑपरेशन सिंदूर: AI का असली सबूतऑपरेशन में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल से हमला किया गया था. यहां AI ने प्लानिंग से लेकर एग्जीक्यूशन तक सेंट्रल रोल निभाया. सेना ने AI बेस्ड सिस्टम से कॉमन ऑपरेशनल पिक्चर बनाया. सैटेलाइट इमेज, हवाई सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट्स और पुराने इंटेलिजेंस डेटाबेस से डेटा फ्यूजन किया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 23 टास्क-स्पेसिफिक AI एप्लिकेशन्स ने डेटा प्रोसेस किया. AI ने मिलिशिया पैटर्न पहचाने, टारगेट्स की वैलिडिटी चेक की, सिविलियन एरिया के पास होने, कोलैटरल डैमेज और इंफ्रास्ट्रक्चर वैल्यू के आधार पर प्राथमिकता तय की. सिमुलेशन्स से 9 हाई-वैल्यू टारगेट्स चुने गए.
एग्जीक्यूशन के दौरान AI ने रीयल-टाइम सिचुएशन अवेयरनेस दी. हमले की प्रोग्रेस ट्रैक की, कोऑर्डिनेशन बनाए रखा. AI बेस्ड मौसम फोरकास्टिंग और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग से टाइमिंग और टारगेटिंग सटीक हुई. लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कुमार सहनी (EME के DG) ने कहा कि स्वदेशी सिस्टम जैसे ECAS (Electronic Intelligence Collation and Analysis System) को रीयल-टाइम अपग्रेड किया गया. जिससे थ्रेट प्रायोरिटी और "स्ट्रैटेजिक डोमिनेंस" मिला.
ट्रिनेत्र सिस्टम (प्रोजेक्ट संजय के साथ इंटीग्रेटेड) ने यूनिफाइड पिक्चर दिया, जिससे डिसीजन मेकिंग तेज हुई. ये ऑपरेशन भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक है. AI ने डिसीजन साइकिल छोटा किया, एक्यूरेसी बढ़ाई और विदेशी टेक पर निर्भरता घटी.
भारत में AI ऑगमेंटेशन का फोकस मानव डिसीजन को बेहतर बनाना है, न कि बदलना. आधुनिक सेंसर (ड्रोन, रडार, सैटेलाइट, थर्मल इमेजर) से डेटा की बाढ़ आती है, जिसे इंसान रीयल-टाइम में नहीं संभाल सकता. AI पैटर्न और एनॉमली डिटेक्ट करता है.
LoC और LAC पर AI सर्विलांस ऑटोमैटिकली संदिग्ध मूवमेंट फ्लैग करता है, ऑब्जेक्ट क्लासिफाई करता है और अलर्ट देता है. काउंटर-टेररिज्म में फेशियल रिकग्निशन और बिहेवियर एनालिसिस से संदिग्ध ट्रैक होते हैं (एथिकल कंट्रोल के साथ). वायुसेना और नौसेना में प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, टेम्प्रेचर डेटा से फेलियर प्रेडिक्ट कर फ्लीट उपलब्धता बढ़ाई जाती है, जिससे कॉस्ट कम होती है.
ड्रोन और स्वार्मAI अगर दिमाग है, तो ड्रोन आंखें और हाथ हैं. भारत के अनमैन्ड सिस्टम अब रेकॉन्स से लेकर लॉइटरिंग मुनिशंस, आर्म्ड ड्रोन और स्वार्म तक पहुंच गए हैं. ड्रोन सस्ते और एक्सपेंडेबल हैं. महंगे प्लेन या ग्राउंड पैट्रोल का काम कर सकते हैं. स्वार्म ड्रोन अगला बड़ा कदम हैं. AI एल्गोरिदम से कई UAV को नेटवर्क कर कोऑर्डिनेट किया जाता है. फॉर्मेशन फ्लाइंग, कोलिजन अवॉइडेंस, और टारगेट सर्च किया जाता है. स्वार्म डिफेंस सैचुरेट करते हैं, रडार कन्फ्यूज करते हैं, मल्टी-वेक्टर अटैक करते हैं. कोई सिंगल फेलियर पॉइंट नहीं, कुछ ड्रोन गिरें तो भी स्वार्म एडाप्ट हो जाता है.
भारत स्वार्म को पारंपरिक एयर पावर का कॉम्प्लिमेंट मानता है. ये डिफेंस डिग्रेड करने, इंटेलिजेंस लेने और गैप बनाने के लिए इस्तेमाल होता है, न कि डिसाइसिव स्ट्राइक के लिए.
साइबर वॉरसाइबर को नए वॉरफेयर में पांचवां डोमेन माना जाता है. डिफेंस साइबर एजेंसी ने इसे फॉर्मल रिकग्निशन दिया. साइबर ऑपरेशन कंटीन्यूअस, गोपनीय और प्लॉजिबल डिनायबिलिटी वाले होते हैं. आधुनिक प्लेटफॉर्म नेटवर्क्ड कंप्यूटर होते हैं, और विमान, जहाज, मिसाइल सॉफ्टवेयर पर चलते हैं. भारत फोकस करता है रेजिलिएंस पर. जिसमें नेटवर्क सेगमेंटेशन, एन्क्रिप्शन, स्वदेशी सॉफ्टवेयर, रेड-टीम एक्सरसाइज शामिल है. ऑफेंसिव कैपेबिलिटी से दुश्मन के कमांड एंड कंट्रोल को डिसरप्ट किया जा सकता है.
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW)EW इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम पर लड़ाई है. स्पेक्ट्रम कंट्रोल करने वाला युद्ध का टेम्पो तय करता है. भारत स्वदेशी EW सिस्टम तेजी से इंडक्ट कर रहा है. इसमें रडार वॉर्निंग रिसीवर, जैमर, डेकोय डिस्पेंसर का इस्तेमाल किया जाता है. जहाज वाइड एरिया एमिशन डिटेक्ट करते हैं, ग्राउंड यूनिट सेंसर और कम्युनिकेशन डिसरप्ट करते हैं. AI से EW में सिग्नल क्लासिफिकेशन और थ्रेट सेपरेशन तेज होता है.
इंटीग्रेशन और आत्मनिर्भरतासफलता की कुंजी है जॉइंटनेस, माने एक साथ काम करना. आर्मी, नेवी, एयरफोर्स का डेटा शेयरिंग, कॉमन स्टैंडर्ड्स और यूनिफाइड कमांड होना. DRDO सिस्टम जैसे ECAS, ट्रिनेत्र बना रहा है. आत्मनिर्भर भारत के तहत DAP 2020, TDF (प्रोजेक्ट कैप Rs 50 करोड़ तक), iDEX से इनोवेशन को फंडिंग मिल रही है. डिफेंस एक्सपोर्ट 2014 में 1000 करोड़ से बढ़कर 24,000 करोड़ हो गए हैं. इसका टारगेट 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये का है.
इसलिए इनोवेशन से ज्यादा जरूरी है इंटीग्रेशन, ट्रेनिंग और डॉक्ट्रिन. ऑपरेशन सिंदूर जैसे उदाहरण साबित करते हैं कि स्वदेशी टेक लाइव कंडीशंस में काम करती है. भविष्य के युद्ध नेटवर्क और स्पेक्ट्रम में होंगे. जो अल्गोरिदम, सिग्नल और डेटा में मास्टर होगा, वही बिना गोली चलाए डिटरेंस या शेपिंग कर सकेगा. भारत इन अदृश्य युद्धक्षेत्रों में मजबूत हो रहा है. और AI, साइबर और EW से रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है. ये सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का नया पैराडाइम है.
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