क्या साल 2027 में होने वाली जनगणना के लिए केंद्र की मोदी सरकार निजी क्षेत्र के लोगों की मदद लेगी? एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कम से कम समय में जनगणना से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए केंद्र सरकार निजी क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की मदद ले सकती है. अगर ये हुआ तो आजादी के बाद से ये पहला मौका होगा जब जनगणना के लिए निजी क्षेत्र से कमर्चारियों को नियुक्त किया जाएगा.
जनगणना 2027 में प्राइवेट कर्मचारियों की मदद लेगी सरकार? लेकिन क्या?
साल 2027 में होने वाली Population Census का फर्स्ट फेज 1 अप्रैल से शुरू होगा और 30 सितंबर तक चलेगा. Register General and Census Commissioner of India मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि केंद्र सरकार जनगणना के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मदद से संविदा पर कर्मचारियों की नियुक्ति करेगी.


‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार जनगणना के लिए प्राइवेट टेक्निकल स्टाफ की नियुक्ति करेगी, जिससे जनगणना से जुड़े डेटा जुटाने में कम से कम समय लगे. साल 2027 में होने वाली जनगणना का फर्स्ट फेज 1 अप्रैल से शुरू होगा और 30 सितंबर तक चलेगा. यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी. इसमें सरकारी शिक्षक समेत दूसरे कर्मचारी अपने पर्सनल फोन या मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से डिटेल्स इकट्ठा करेंगे.
भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त (RG & CCI) मृत्युंजय कुमार नारायण ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर बताया है कि जनगणना से जुड़े डेटा जुटाने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS), वेब एप्लिकेशन हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (HLBC) और स्व गणना पोर्टल जैसी कई पहलें की गई हैं. इन तकनीकों का उद्देश्य फील्ड से ही डिजिटल डेटा जुटाना है.
इस पत्र में कथित तौर पर ये भी कहा गया है कि जनगणना अधिकारियों की सहायता के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जाएगी. इसके अलावा राज्य और जिला स्तर पर ऑफिस से जुड़े कामों के लिए मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) भी उपलब्ध कराए जाएंगे. RG & CCI ने बताया कि जनवरी 2026 से लेकर अधिकतम 18 महीने की अवधि के लिए कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी.
राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि डिजिटल एप्लिकेशन को संभालने वाले तकनीकी रूप से सक्षम लोगों की ही नियुक्ति की जाए. RG & CCI की तरफ से जारी पत्र में बताया गया है कि तकनीकी सहायक को अधिकतम हर महीने 25 हजार रुपये और MTS को 18 हजार रुपये दिए जाएंगे. इसके अलावा उनको किसी भी तरह की कोई आर्थिक भत्ता या सहायता नहीं दी जाएगी. केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को ये सहायता अधिकतम 18 महीने के लिए ही दी जाएगी. इसके बाद यह सहायता बंद कर दी जाएगी.
जनगणना में मदद के लिए तकनीकी कर्मचारियों और MTS स्टाफ की भर्ती आउटसोर्सिंग एजेंसी की मदद से की जाएगी. साथ ही आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से ही उनको मासिक भुगतान भी किया जाएगा.
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