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'ज्ञानेश कुमार को पद से हटाएं', पूर्व IAS-IPS ने लगाए 6 आरोप

जनता की ओर से महाभियोग नोटिस और चार्जशीट में ज्ञानेश कुमार पर कुल छह आरोप लगाए गए हैं. पूर्व नौकरशाहों और एक्टिविस्ट्स के डेलीगेशन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार के कामकाज से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है.

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पूर्व अफसरों और एक्टिविस्ट्स ने ज्ञानेश कुमार पर 6 गंभीर आरोप लगाए. (Courtesy: @_YogendraYadav /X)

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  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पूर्व नौकरशाहों और सोशल एक्टिविस्ट्स ने संविधान के आर्टिकल 324(5) के तहत उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग नोटिस और चार्जशीट पेश की है।
  • यह कार्रवाई ऐसे आरोपों के कारण की गई है कि ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को प्रभावित किया, फॉर्म-6 में बिना कानूनी अनुमति के बदलाव किए और SIR प्रक्रिया में त्रुटि की।
  • महाभियोग नोटिस के बाद चुनाव आयोग कार्यालय के रास्तों पर पुलिस बैरिकेडिंग की गई और अब इस मामले का राजनीतिक और कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग तेज हो गई है. पूर्व नौकरशाहों और सोशल एक्टिविस्टस के एक डेलीगेशन ने सोमवार, 5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जनता की तरफ से महाभियोग नोटिस' और 'चार्जशीट' पेश की. डेलीगेशन ने ज्ञानेश कुमार पर 'सिद्ध कदाचार या अक्षमता' (Proved Misbehaviour or Incapacity) का आरोप लगाते हुए संविधान के आर्टिकल 324(5) के तहत उन्हें पद से हटाने की मांग की.

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नोटिस पर इन लोगों ने साइन किए

ये कदम ऐसे समय पर उठाया गया, जब डेलीगेशन के चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचने से पहले, वहां जाने वाले रास्तों पर पुलिस बैरिकेडिंग किए जाने की खबर सामने आई. जनता की ओर से दिए गए इस महाभियोग नोटिस और चार्जशीट पर इन पूर्व नौकरशाहों और एक्टिविस्ट्स ने साइन किए-

  • नजीब जंग, IAS (रिटायर), पूर्व उपराज्यपाल, दिल्ली
  • गोपाल कृष्ण पिल्लै, IAS (रिटायर), पूर्व गृह सचिव, भारत सरकार
  • अमिताभ पांडे, IAS (रिटायर), पूर्व सचिव, भारत सरकार
  • जयश्री मुखर्जी, IAS (रिटायर)
  • अशोक शर्मा, IFS (रिटायर), पूर्व राजदूत
  • यशोवर्धन आजाद, पूर्व विशेष निदेशक, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त (CIC)
  • आशीष जोशी, पूर्व सिविल अधिकारी
  • योगेंद्र यादव
  • आइशी घोष
  • एन साई बालाजी
  • दिनेश श्रीरंगराजन
  • संदीप यादव
  • अमृता जोहरी
  • अंजलि भारद्वाज

चार्जशीट में ज्ञानेश कुमार पर कुल छह आरोप लगाए गए हैं. डेलीगेशन का कहना है कि उनके कामकाज से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है. नोटिस में आरोप लगाया गया कि उन्होंने कानून और संवैधानिक जिम्मेदारियों की अनदेखी की और अपने पद का गलत इस्तेमाल किया.

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पहला आरोप: - चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करना

आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कई बड़े फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों से ठीक से बात किए बिना लिए. इससे चुनाव आयोग के मिलकर और निष्पक्ष तरीके से काम करने पर सवाल उठे.

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दूसरा आरोप: फॉर्म-6 में जानबूझकर और बिना कानूनी इजाजत के बदलाव

आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने वाले फॉर्म-6 में बिना सही इजाजत के बदलाव किया गया. इससे लोगों के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाना मुश्किल होने का आरोप है.

तीसरा आरोप: ECINET के जरिए वोटर लिस्ट पर अवैध कंट्रोल और हेराफारी

आरोप है कि ECINET के जरिए मतदाता सूची से जुड़े काम का कंट्रोल सेंट्रल लेवल पर कर दिया गया. इससे इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की भूमिका कमतर करने का आरोप है, जिनके पास कानून के तहत वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार करने की जिम्मेदारी है.

चौथा आरोप: SIR के कारण बड़ी संख्या में लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करना

आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने बिना पर्याप्त तैयारी, सलाह-मशविरा, नियम, ट्रेनिंग और गलत तरीके से SIR प्रक्रिया शुरू की. वोटर पर ही उनकी एलिजिबिलिटी साबित करना बोझ डाला. इससे 13.3 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं. इसमें गरीब, प्रवासी, महिलाएं और बुजुर्ग जैसे लोग ज्यादा प्रभावित होने की आशंका बताई गई.

पांचवां आरोप: चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने राजनीतिक पक्षपात किया. उन्होंने कथित तौर पर विपक्षी नेताओं के खिलाफ बयानबाजी, पक्षपात वाली राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया. आरोप है कि उनके फैसलों से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठे. नोटिस में कहा गया है कि इससे आयोग की निष्पक्ष छवि प्रभावित हुई.

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छठा आरोप: कानूनी दायित्वों का बार-बार उल्लंघन

आरोप है कि ज्ञानेश कुमार बार-बार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे. कई मामलों में चुनाव से जुड़े कानून और तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया. नोटिस में इसे मुख्य चुनाव आयुक्त की कानूनी जिम्मेदारियों के उल्लंघन के रूप में बताया गया है.

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