E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल आया तो लोगों के मन में तमाम सवाल उठे. कई लोगों ने दावा किया कि इससे उनकी गाड़ी के माइलेज में गिरावट हुई है. किसी ने कहा कि एथेनॉल उनकी गाड़ी के पुर्जों को नुकसान पहुंचा रहा है. हाल ही में एक सर्वे में 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के 66 प्रतिशत मालिकों से बात की गई. इसमें उन्होंने माना कि 2025 की शुरुआत से उनकी गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी में 10 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है.
'एथेनॉल मिलाकर पेट्रोल दे रहे तो पैसे कम करो?', सरकार का जवाब, 'इसका खर्चा ज्यादा है'
Govt admits E20 can reduce Mileage : हाल ही में हुए एक सर्वे में पाया गया कि 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के 66 प्रतिशत मालिकों ने बताया कि 2025 की शुरुआत से उनकी गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) में 10 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है.


इस बीच सरकार ने भी मान लिया है कि एथेनॉल वाले पेट्रोल से गाड़ी का माइलेज गिरता है. यह फ्यूल इकॉनमी को 3-5% तक कम कर सकता है. सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम से जुड़े तमाम सवालों का जवाब दिया है. इसी में उसने ये बात कही है.
माइलेज पर हामी भरी, फिर फायदे गिना दिएक्या E20 से माइलेज कम होता है? ये सवाल सबसे अहम है. क्योंकि अधिकतर लोग माइलेज को देखकर ही गाड़ी लेते हैं और उसमें भी गिरावट आने लगे तो फिर फायदा ही क्या? सरकार ने माना है कि एथेनॉल वाले पेट्रोल से कुछ गाड़ियों में फ्यूल इकॉनमी यानी माइलेज में 3-5 प्रतिशत की कमी आ सकती है. साथ में सरकार ने E20 में ज्यादा ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर कंबशन, स्मूद एक्सेलरेशन, साफ इंजन और कम एमिशन जैसे फायदे भी गिना दिए. सरकार का तर्क है कि ये फायदे माइलेज में होने वाली मामूली कमी से कहीं ज्यादा अहम हैं.
कई लोगों की मांग है कि सरकार पेट्रोल चुनने का ऑप्शन दे. ताकि वह अपनी पसंद से गाड़ी में फ्यूल भरवा सकें. मगर सरकार का कहना है कि पूरे देश में अलग-अलग फ्यूल सप्लाई चेन बनाए रखना व्यावहारिक नहीं होगा. एक लाख के ज्यादा फ्यूल स्टेशनों, डिपो, टर्मिनल और पाइपलाइनों पर शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 के लिए अलग-अलग डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम चलाना लॉजिस्टिक्स से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पैदा करेगा.
गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने का सबूत नहींकई लोगों के मन में डर है कि एथेनॉल उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचा सकता है. मगर सरकार का कहना है कि इन दावों का समर्थन करने वाला कोई ठोस सबूत नहीं है. E20 को ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), SIAM और तेल कंपनियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर टेस्टिंग करने के बाद ही पेश किया गया था. अगर सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता होती, तो बनाने वाली कंपनियां E20 के अनुकूल गाड़ियों को मंजूरी नहीं देतीं या वारंटी सपोर्ट जारी नहीं रखतीं.
एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं?अगर आप मिलावटी पेट्रोल परोस रहे हैं तो फिर कीमत कम कीजिए. कई लोगों का यह कहना है. मगर सरकार का तर्क है कि एथेनॉल बनाने में तो और भी ज्यादा पैसा लगता है. किसानों को सही दाम दिलाने के लिए एथेनॉल को अच्छे दाम पर खरीदा जाता है. कच्चे तेल की मौजूदा कीमतों को देखें तो E20 को बनाने में शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा खर्च आ सकता है.
ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने शख्स ने CJI को 'गाली' दी, पेपर्स फेंके, फिर…
एथेनॉल मिलाने का मकसद पंप पर मिलने वाली पेट्रोल की कीमतें कम करना नहीं, बल्कि एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) को बेहतर बनाना है. हालांकि, सरकार ने कहा कि इस प्रोग्राम से कच्चे तेल का इंपोर्ट कम हुआ है. विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. कार्बन उत्सर्जन घटा है और किसानों को काफी आमदनी हुई है.
E20 पर सरकार ने ग्राहकों को क्या सलाह दी?सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल की नीति लागू करने में कोई जल्दबाजी नहीं की गई है. 2001 में शुरू हुई ये लंबी प्रक्रिया का नतीजा है. और E20 वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सुरक्षित ईंधन है. उसकी क्वालिटी की निगरानी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के नियमों के तहत की जाती है. सरकार ने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे बिना पुष्टि वाले दावों पर भरोसा न करें.
वीडियो: करूर भगदड़ पीड़ितों से मिले सीएम विजय, पुलिस पर क्या आरोप लगाया?












