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बंदर आए और यूपी पुलिस से एक करोड़ के गहने उड़ा ले गए, पता है ये सुनकर जज साहब क्या बोले?

बात अजीब है लेकिन पुलिस की मानें तो सच है. ये मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले का है. एक महिला की मौत के बाद उसके जेवर पुलिस के स्टोर रूम में रखे गए थे, जो अब गायब हैं.

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यूपी के लखीमपुर में बंदर करोड़ों का सोना उड़ा ले गए. (फोटो- स्क्रीनग्रैब)

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  • उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पुलिस के स्टोर रूम में रखे लगभग 1 करोड़ रुपए मूल्य के गहने बंदरों द्वारा छत से चोरी कर लिए जाने की घटना सामने आई है।
  • सोने को भारी बारिश में भीगने से बचाने के लिए पुलिस ने गहने छत पर सुखाने के लिए रखे थे, उसी समय बंदर आए और सोना लेकर फरार हो गए, जिससे मामले की जटिलता बढ़ गई।
  • कोर्ट ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और सोना गायब होने के लिए जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही पीड़ित को मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है।

1 करोड़ रुपए का सोना बंदर ले गए. अब इंसान के खिलाफ तो केस किया जा सकता है. लेकिन बंदर की हाज़िरी कैसे लगाई जाए? समस्या है तो जटिल. पुलिस के स्टोर रूम में सोना बारिश से भीग गया था. फिर पुलिस ने 1 करोड़ के गहने छत पर सुखाने के लिए छोड़ दिए. अब बंदर पर किसका ज़ोर? बंदर आए और सोना लेकर फुर्र हो गए. बात अजीब है लेकिन पुलिस की मानें तो सच है. कोर्ट में भी पुलिस ने यही दलील दी है कि सोना तो बंदर ले गए. और जिसका सोना था, वो कानूनी कागज़ पकड़े रह गए.

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मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी का है. साल 2007 में एक महिला ने अपनी जान दे दी थी. मौत के वक्त महिला ने अंगूठी, नोज़पिन, चूड़ियां और गले का हार पहना हुआ था. आज के समय में जिसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपए है. मौत के बाद दहेज प्रताड़ना का केस बना था. आरोप मृतका के पति मुदित अग्रवाल और ससुराल वालों पर लगा था. पोस्टमार्टम के बाद महिला के शरीर में जितने गहने थे, उसे पुलिस थाने के स्टोर रूम में रख दिया गया. कई सालों तक केस चलता रहा.

चोरी का मामला कैसे खुला?

साल 2024 में आरोपी को निर्दोष मानते हुए केस बंद कर दिया गया. बरी होते ही मुदित अग्रवाल ने कोर्ट में अर्जी लगाई कि उनका फैमिली गोल्ड यानी जो सोना पुलिस स्टोर में रखा हुआ है, उसे वापस किया जाए. उस अर्जी पर पुलिस ने जो जवाब दिया, उससे कोर्ट भी हैरान हो गया. पुलिस ने कोर्ट के सामने 2013 का एक डॉक्यूमेंट रखा. उस कागज़ में लिखा था, 

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‘भारी बारिश में गहने भीग गए थे. और DIG निरीक्षण के लिए आने वाले थे. इसलिए गहनों को सुखाने के लिए छत पर रखा गया था. उसी समय बंदर आए और गहनों को इधर-उधर फेंक कर चले गए.’

ये तर्क सुनते ही कोर्ट ने पहले तो फटकार लगाई. फिर कहा कि एक क्राइम केस से जुड़े करोड़ों के गहनों को खुली छत पर कैसे रखा जा सकता है. साथ में बंदर वाली बात भी फर्ज़ी लगती है. इसके बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए. साथ में कहा कि मुदित अग्रवाल को गायब हुए गहनों की भरपाई की जाए.  

पुलिस ने बताया कि सोना साल 2007 से 2009 के बीच गायब हुआ है. और उस वक्त चंद्रिका प्रसाद और रामबक्श पाल स्टोर रूम के इंचार्ज थे. और अब दोनों की ही मौत हो चुकी है. इसलिए मामला लटका हुआ है.

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याचिकाकर्ता ने क्या बताया? 

पीड़ित मुदित अग्रवाल का आरोप है कि उनके परिवार का सोना गायब कर दिया गया. और अब भरपाई भी नहीं की जा रही है. साथ में ये भी आरोप लगाया कि उस समय के स्टोर रूम इंचार्ज के नाम भी गलत बताए जा रहे हैं. मुदित के वकील शैलेंद्र गौड़ ने बताया कि केस में अभी तक उन्हें मुआवज़ा नहीं मिला है.  

इसी तरह का एक और केस साल 2017 में बिहार में सामने आया था. बताया गया कि शराब बैन करने के बाद पुलिस ने जो शराब जब्त की वो चूहे पी गए. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, चूहों ने कुल 9 लाख लीटर की शराब पी थी. 

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