The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Comparing Donald Trump and Barack Obama Iran Deals Islamabad MoU vs JCPOA

ट्रंप ने ईरान से जो समझौता किया, वो ओबामा की डील से कितना अलग है?

Donald Trump के ईरान के साथ समझौते का नाम इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (MoU) है. Barack Obama का JCPOA पैक्ट एक फाइनल एग्रीमेंट था, जिसमें 160 से भी ज्यादा पन्ने थे. दोनों में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बात की गई.

Advertisement
pic
19 जून 2026 (पब्लिश्ड: 02:53 PM IST)
Donald Trump, Barack Obama, Donald Trump deal, Donald Trump iran deal, barack obama iran deal, us iran deal, JCPOA, islamabad mou
डॉनल्ड ट्रंप (बाएं) ने बराक ओबामा (दाएं) के समय के अमेरिका-ईरान JCPOA समझौते को रद्द कर दिया था. (Truth Social/X)
Quick AI Highlights
Click here to view more

28 फरवरी 2026 से वेस्ट एशिया में भड़की आग थम रही है. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग (MoU) पर साइन हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने MoU पर हस्ताक्षर किए. 2015 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी ईरान के साथ एक अहम समझौता किया था. ट्रंप ने नई डील साइन की तो ओबामा के एग्रीमेंट से उसकी तुलना शुरू हो गई है. नाप-तोल की जा रही है कि ट्रंप-ओबामा में किसकी डील सबसे बेहतर है. दोनों समझौतों के बीच फर्क समझते हैं.

इस्लामाबाद MoU और JCPOA

डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ कोई फाइनल एग्रीमेंट नहीं, बल्कि एक MoU साइन किया है. इसका नाम 'ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग' है. इसमें दोनों देशों के बीच परमाणु, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वेस्ट एशिया में सिक्योरिटी समेत 14 पॉइंट्स पर सहमति बनी है. MoU मात्र डेढ़ पेज का है. 60 दिन में फाइनल डील बनाने पर सहमति बनी है. दोनों देश आपसी सहमति से फाइनल डील के लिए मियाद बढ़ा सकते हैं.

2015 में बराक ओबामा ने ईरान के साथ एक समझौता किया था, जिसका नाम 'जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन' (JCPOA) था. ट्रंप की डील के उलट ओबामा का पैक्ट एक फाइनल एग्रीमेंट था. एक डिटेल्ड डॉक्यूमेंट, जिसमें 160 से भी ज्यादा पन्न थे. इसमें सबसे ज्यादा जोर ईरान की न्यूक्लियर एक्टिविटी को रोकने पर दिया गया था. डॉनल्ड ट्रंप ने इस समझौते को 'बेहद खराब' बताते हुए 2018 में इसे रद्द कर दिया था.

किन देशों की भूमिका?

डॉनल्ड ट्रंप के ईरान के साथ समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ है. दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने और एक डील पर पहुंचने में पाकिस्तान का अहम रोल रहा. इसलिए इस MoU का नाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर है. हालांकि, समझौता केवल दो देशों (अमेरिका-ईरान) के बीच का है. पाकिस्तान केवल मीडिएटर की भूमिका में है. जब फाइनल एग्रीमेंट होगा, तो उसे यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) मान्यता दिलाने की कोशिश की जाएगी.

बराक ओबामा के समय हुए JCPOA में कई देशों ने ना सिर्फ भूमिका निभाई, बल्कि वे सीधे तौर पर इस समझौते में शामिल भी थे. UNSC के पांच स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस के अलावा जर्मनी भी JCPOA का हिस्सा थे. इस समझौते में यूरोपियन यूनियन (EU) ने भी भूमिका निभाई थी.

न्यूक्लियर प्रोग्राम

डॉनल्ड ट्रंप और बराक ओबामा, दोनों की डील में ईरान के कभी परमाणु हथियार बनाने की बात शामिल है. ट्रंप ने तो खासकर इसी मुद्दे पर ईरान पर 2025 और फिर फरवरी 2026 में हमला बोला था. ओबामा के JCPOA में ईरान की परमाणु हथियार बनाने के काबिल यूरेनियम बनाने पर सख्त पाबंदी का जिक्र था.

JCPOA में ईरान को 15 साल तक 3.67 फीसदी तक यूरेनियम एनरिच करने की इजाजत दी गई थी, जो न्यूक्लियर पावर प्रोग्राम बनाने के लिए काफी है. लेकिन, न्यूक्लियर हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 फीसदी एनरिचमेंट से काफी कम था.

डॉनल्ड ट्रंप के MoU में यह नहीं बताया गया है कि ईरान को यूरेनियम एनरिच करने की इजाजत दी जाएगी या नहीं या कब तक. इसमें तेहरान की तरफ से 60 दिन के टाइम पीरियड में न्यूक्लियर मुद्दों पर बात करने के अलावा कोई खास वादा नहीं किया गया है.

इससे पता चलता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर वेपन ग्रेड परमाणु जखीरे पर विवाद को सुलझाने के लिए तैयार है. इसमें UN न्यूक्लियर वॉचडॉग 'इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी' (IAEA) की देखरेख की संभावना भी शामिल है, लेकिन यह फैसला फाइनल डील के लिए छोड़ दिया गया है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रीजनल सिक्योरिटी

डॉनल्ड ट्रंप की डील में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आजाद आवाजाही को जगह मिली है. ईरान के साथ तय हुआ है कि वो इस अहम समुद्री रास्ते से जहाजों को आने-जाने देगा. बदले में डॉनल्ड ट्रंप ने भी होर्मुज के पास ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों पर यूएस नेवी का ब्लॉकेड हटा दिया है.

यह भी पढ़ें: अमेरिका तुम्हारा अकेला दोस्त और तुम उसे ही... जेडी वेंस ने इजरायल को अच्छे से सुनाया है

इस्लामाबाद MoU में लेबनान समेत वेस्ट एशिया में सैन्य विवाद खत्म करने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. लेकिन, हिजबुल्लाह जैसे ईरानी प्रॉक्सी संगठनों पर लगाम जैसी कोई बात नहीं है. यह इजरायल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. बराक ओबामा के समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या ब्लॉकेड आदि पर बातचीत नहीं थी. यह ईरान के साथ एक फुल न्यूक्लियर एग्रीमेंट था.

सैंक्शंस हटाना और फंड देना

डॉनल्ड ट्रंप ने 60 दिनों की समयसीमा की शुरुआत में ही ईरान को रियायत देने पर हामी भरी है. जैसे ईरान के तेल एक्सपोर्ट पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है. हालांकि, इस टाइम पीरियड में अमेरिका देखेगा कि ईरान किस तरह समझौते पालन कर रहा है. अमेरिका को सही लगा तो ईरान की अरबों डॉलर की जब्त संपत्तियों को रिलीज किया जाएगा. ईरान को 'रीकंस्ट्रक्शन', एक तरह के डेवलपमेंट फंड के तौर पर 300 अरब डॉलर देने का भी जिक्र है.

ओबामा की डील में भी आर्थिक प्रतिबंधों से राहत दी गई थी. हालांकि, ईरान को धीरे-धीरे रियायत मिलतीं. पहले ईरान को समझौते की शर्तें पूरी करनी थीं, उसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में राहत मिलती रहती. JCPOA में सीमित आर्थिक राहत और कुछ संपत्तियों की वापसी का भी जिक्र था. JCPOA के तहत, ईरानी सरकार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए आतंकवाद से जुड़े बैन लागू रहे थे.

वीडियो: US-Iran डील पर ट्रम्प और पेजेशकियान ने किए साइन, ईरान को क्या-क्या फायदा मिलेगा?

Advertisement

Advertisement

()