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बिहार में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में होगा बड़ा बदलाव, चुनाव आयोग शुरू कर रहा विशेष जांच

Bihar Electoral Rolls: वोटर लिस्ट की सत्यनिष्ठा पर सवाल ना उठें. और उसमें ग़लतियां ना जाएं. इस काम के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) वेरिफिकेशन के लिए घर-घर जाकर सर्वे करेंगे.

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चुनाव आयोग ने बिहार में वोटर लिस्ट के जांच की बात कही है. (प्रतीकात्मक फ़ोटो- PTI)

चुनाव आयोग ने चुनावी राज्य बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की बात कही है. आसान भाषा में कहें, तो वोटर लिस्ट की जांच और फिर उसमें कांट-छांट. इसका मकसद है सभी पात्र लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल करना. और अयोग्य नामों को हटाया जाना. इसके तहत, 2003 के मतदाता सूची में जो लोग शामिल नहीं थे, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए फिर से डॉक्यूमेंट्स उपलब्ध कराने होंगे.

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चुनाव आयोग के मुताबिक़, बहुत तेज़ी से शहरीकरण और पलायन हो रहा है. वहीं, मौतों की ख़बर और युवा वोटर्स की संख्या में हुई बढ़ोतरी की ख़बर भी नहीं मिल पाती. इसके अलावा, विदेशी घुसपैठियों के नाम भी लिस्ट में आ रहे हैं. इसीलिए ये स्पेशल इंटेंसिव रिविजन किया जा रहा है. ताकि वोटर लिस्ट की सत्यनिष्ठा पर सवाल ना उठे. और उसमें ग़लतियां ना जाएं. इस काम के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) वेरिफिकेशन के लिए घर-घर जाकर सर्वे करेंगे. 

चुनाव आयोग ने मंगलवार, 24 जून को ये आदेश जारी किया है. इसके मुताबिक़, वोटर्स को तीन कैटेगरी में बांटा गया है. पहला, 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे वोटर्स. इन्हें अपनी जन्म तिथि या जन्म की जगह का डॉक्यूमेंट पेश करना होगा. दूसरा, 1 जुलाई 1987 और 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्म लेने वाली जनता. इन्हें अपने माता या पिता की जन्म तिथि या जन्म की जगह का डॉक्यूमेंट पेश करना होगा.

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तीसरा, 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाली पब्लिक. इन्हें अपने माता और पिता, दोनों की जन्म तिथि या जगह का डॉक्यूमेंट पेश करना होगा. इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इन कैटेगरी को नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुरूप तैयार किया गया है.

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक़, ये प्रक्रिया बुधवार, 25 जून से शुरू होगी. जो 1 अगस्त को ड्राफ्ट लिस्ट पेश करने के साथ ख़त्म होगी. इसके बाद एक सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए एक महीने का समय होगा. उसके बाद, आख़िरी लिस्ट 30 सितंबर को प्रकाशित की जाएगी.

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चुनाव आयोग ने कहा कि उसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत वोटर लिस्ट की जांच का निर्देश देने का अधिकार है. जिसमें नए सिरे से वोटर लिस्ट तैयार करने का अधिकार भी शामिल है. आदेश के अनुसार, चुनाव आयोग ने 1952-56 से 2004 तक 13 बार इस शक्ति का प्रयोग किया था.

बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं. ये पहला मौक़ा है, जब चुनाव आयोग ने राज्य की वोटर लिस्ट में अवैध अप्रवासियों के नाम होने की बात कही है. बता दें, बिहार में पिछली बार 2003 में यानी 22 साल पहले स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) किया गया था.

चुनाव आयोग का कहना है कि बिहार के बाद, बाक़ी जगहों पर भी ये किया जाएगा. जिससे वोटर लिस्ट में सुधार हो सकें.

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