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अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं, CID के बाद ED ने किया तलब, शिक्षक भर्ती घोटाले में होगी पूछताछ

West Bengal Teacher Recruitment Case में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल सांसद Abhishek Banerjee को समन जारी किया है. इससे पहले CID ने उन्हें Fake Signature Case में पूछताछ के लिए समन जारी किया था.

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी. (फाइल फोटो: आजतक)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में समन जारी किया है. अधिकारियों ने बुधवार, 3 जून को यह जानकारी दी. उन्हें 15 जून को ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस में पेश होने के लिए कहा गया है. इससे पहले, क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने बनर्जी को ‘विधायकों के फेक सिग्नेचर मामले’ में पूछताछ के लिए समन जारी किया था.

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आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी अधिकारियों की एक टीम बुधवार शाम कालीघाट रोड पर अभिषेक बनर्जी के आवास (शांतिनिकेतन) पहुंची. बनर्जी उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थे, इसलिए समन उनके स्टाफ के एक सदस्य को सौंपा गया. इसके साथ ही, कालीघाट पुलिस ने बनर्जी के घर के बाहर सुरक्षा हटा दी. अधिकारियों ने घर के बाहर रखे पुलिस कियोस्क, बैरिकेड्स, स्कैनर मशीनें और दूसरे सर्विलांस इक्विपमेंट हटा दिए हैं.

क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला?

साल 2014 और 2016 में पश्चिम बंगाल के स्कूलों में टीचर और स्टाफ की भर्ती के लिए परीक्षा हुई थी. लेकिन योग्य और परीक्षा पास करने वाले युवाओं को छोड़ दिया गया और उनकी जगह लाखों रुपये की घूस लेकर अयोग्य लोगों को नौकरियां दे दी गईं. यहां तक कि कई लोगों ने परीक्षा की कॉपी (OMR Sheet) पूरी तरह खाली छोड़ी थी, फिर भी कंप्यूटर में उनके नंबर बढ़ाकर उन्हें पास कर दिया गया.

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जब योग्य और हकदार उम्मीदवारों को नौकरियां नहीं मिलीं, तो उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. इससे बाद कोर्ट ने जांच के आदेश दिए कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय जांच एजेंसियों (CBI और ED) ने कार्रवाई की. छापेमारी के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से लगभग 21 करोड़ रुपये से ज्यादा का नकद कैश और भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ. 

इसके बाद राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी सहित कई बड़े अधिकारियों और बिचौलियों को जेल भेजा गया. अब ईडी ने इस मामले में पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी को भी समन जारी किया है.

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क्या है फेक सिग्नेचर मामला?

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर विधायकों के नकली हस्ताक्षर (फर्जी दस्तखत) करवाने का आरोप लगा है. दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेताओं और चीफ व्हिप (सचेतक) के नॉमिनेशन के लिए बनर्जी ने विधानसभा सचिवालय को एक प्रस्ताव पत्र भेजा था. इसमें करीब 70 नवनिर्वाचित विधायकों के हस्ताक्षर शामिल थे.

जब विधानसभा के स्पीकर ने उन हस्ताक्षरों को जांचा, तो कई विधायकों के साइन आपस में मैच नहीं हुए. ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह जैसे विधायकों ने आरोप लगाया कि अटेंडेंस शीट से उनके साइन चुराकर नकली दस्तखत बनाए गए हैं. इस जालसाजी की जांच के लिए सीआईडी ने एक खास टीम (SIT) बनाई है. सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को 8 जून 2026 को पूछताछ के लिए समन जारी किया है. 

इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. टीएमसी सांसद ने कोर्ट में अंतरिम सुरक्षा की मांग करते हुए याचिका दायर की. इस याचिका में उन्होंने सीआईडी के समन को चुनौती दी और फेक सिग्नेचर मामले में किसी भी जबरदस्ती वाली कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की. इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को होने की संभावना है.

वीडियो: फेक सिग्नेचर विवाद में CID ने अभिषेक बनर्जी को तलब किया, आगे क्या होगा?

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