अभिषेक बनर्जी की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ये मामले बन सकते हैं जी का जंजाल
West Bengal News: बंगाल की राजनीति में इस वक्त अभिषेक बनर्जी चर्चा में हैं, घर पर रेड के बाद अब उन पर कई और मामलों में भी जांच शुरू हो सकती है. इसमें स्कूल की नौकरी के बदले घूस, मनी लॉन्ड्रिंग, फेक सिग्नेचर समेत कई मामले हैं.

बंगाल की राजनीति में इस समय पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है. तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ सकती हैं. उनके घर पर हुई हालिया रेड के बाद ये चर्चा जोरों पर है कि केंद्रीय और राज्य की एजेंसियां अब उन पर चौतरफा शिकंजा कसने की पूरी तैयारी में हैं.
गजब है भाई! एक समय था जब बंगाल में टीएमसी विरोधी नेताओं पर ही जांच की तलवार लटकती थी. लेकिन इस बार का सीन थोड़ा अलग और पेचीदा है. अभिषेक बनर्जी पर अब सिर्फ दिल्ली से चलने वाली एजेंसियां ही नहीं, बल्कि कई मामलों में खुद कोलकाता पुलिस और राज्य की सीआईडी भी नकेल कसने की फिराक में है.
आखिर वो कौन से मामले हैं जिनकी वजह से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की रातों की नींद उड़ी हुई है? उन पर अब तक कुल कितने केस दर्ज हो चुके हैं और कानूनी शिकंजा कितना मजबूत है? हम इस पूरी कहानी का एक-एक पुर्जा अलग करके समझते हैं. आइए, देखते हैं कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कौन-कौन सी फाइलें दोबारा खुलने वाली हैं.
स्कूल की नौकरी के बदले घूस का वो सबसे बड़ा चक्रव्यूह
पश्चिम बंगाल की सियासत को करीब से जानने वाले कह रहे हैं कि अभिषेक बनर्जी के लिए इस समय सबसे बड़ी आफत बंगाल का बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाला बना हुआ है. जिसे 'School Jobs-for-Bribe Scam' भी कहा जा रहा है. इस मामले में आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों से मोटी रकम वसूल कर उन्हें सरकारी स्कूलों में गैर-कानूनी तरीके से नौकरियां बांटी गईं.
ये खेला सिर्फ कुछ लाख रुपयों का नहीं बल्कि करोड़ों का बताया जाता है. सीबीआई और ईडी दोनों ही एजेंसियां इस घोटाले की जड़ों को खोदने में लगी हैं. सीबीआई ने तो अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कथित फोन कॉल्स के हवाले से सीधे अभिषेक बनर्जी का नाम भी घसीट लिया है.
आरोप है कि इस पूरे लेन-देन में करीब 15 करोड़ रुपये की मांग की गई थी. हालांकि अभिषेक बनर्जी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं. उनका कहना है कि ये सब उन्हें बदनाम करने की एक राजनीतिक साजिश है. लेकिन कोर्ट और एजेंसियों के चक्करों ने उनकी सियासी रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक तो जरूर लगा दिया है.
कोयला चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का वो पुराना पेंच
इसके बाद नंबर आता है उस मामले का जिसने पिछले कुछ सालों में अभिषेक बनर्जी को सबसे ज्यादा परेशान किया है. वो है कोयला चोरी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस घोटाला. ईडी ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत अपनी जांच का दायरा काफी बड़ा कर दिया है.
आरोप ये है कि कोयला चोरी और राशन घोटाले से जो भी अवैध काली कमाई हुई, उसे सफेद करने के लिए अलग-अलग शेल कंपनियों और वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल किया गया. इस जांच की आंच अभिषेक बनर्जी की कंपनी और उनके बेहद करीबियों तक भी पहुंची है.
ईडी इस सिलसिले में अभिषेक बनर्जी से कई दौर की लंबी पूछताछ कर चुकी है. उनके बैंक खातों से लेकर पुरानी बैलेंस शीट तक को खंगाला जा चुका है. केंद्रीय एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के तार काफी ऊपर तक जुड़े हुए हैं और इसी वजह से इस केस की फाइल कभी बंद नहीं होती.
जाली हस्ताक्षर का नया जिन्न और दर्ज मुकदमों का पूरा लेखा-जोखा
अब बात करते हैं उस नए मामले की जिसने हाल ही में बंगाल के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. ये मामला है कथित जाली हस्ताक्षर और कट-मनी की वसूली का. इस केस में खास बात ये है कि इस बार सिर्फ केंद्रीय एजेंसियां नहीं, बल्कि राज्य की सीआईडी भी एक्टिव नजर आ रही है.
आरोप है कि कुछ अहम सरकारी या राजनीतिक दस्तावेजों पर फर्जी और जाली साइन किए गए. इस मामले की तफ्तीश के सिलसिले में सीआईडी की टीम ने हाल ही में उनके कालीघाट वाले आवास का दौरा भी किया था. घर तक पहुंची इस जांच ने अभिषेक बनर्जी की कानूनी लड़ाइयों को और ज्यादा उलझा दिया है.
अभिषेक क्यों, ममता क्यों नहीं?
शुभेंदु अधिकारी सरकार के लिए पूर्व सीएम और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी बड़ा खतरा बन सकती हैं. ऐसे में उन्हें छोड़कर सरकार अभिषेक बनर्जी पर दर्ज मामले क्यों खोल रही है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसके पीछे बीजेपी की सोची समझी रणनीति है. ममता आंदोलन और संघर्ष से बनी हुई नेता हैं. उन पर सख्ती करने से सियासी फायदे के बजाए नुकसान की संभावना ज्यादा है.
वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार का मानना है कि अभिषेक बनर्जी पर कानूनी शिकंजा कसने से 'सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे' वाली कहावत चरितार्थ होगी. प्रेम कुमार कहते हैं,
अभिषेक बनर्जी के बहाने शुभेंदु सरकार टीएमसी के परिवारवाद पर निशाना साधने का काम करेगी. अगर सीधा ममता पर हाथ डाला तो जन विरोध की संभावना बनती है. मगर अभिषेक के मामले में ऐसा डर नहीं है. दूसरा कई सारे आपराधिक मामलों का बैकअप पहले ही तैयार किया जा चुका है.
अगर दर्ज मामलों की कुल संख्या की बात करें, तो अभिषेक बनर्जी और उनके करीबियों के खिलाफ सीबीआई और ईडी की तरफ से कई एफआईआर और ईसीआईआर दर्ज हो चुकी हैं. इसके अलावा लोकल पुलिस और सीआईडी के नए केस भी इस लिस्ट में जुड़ते जा रहे हैं. इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट तक में वकीलों की भारी-भरकम फौज खड़ी की जा चुकी है.
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अब देखना ये है कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां इन फाइलों से क्या नया सबूत निकालती हैं. या फिर ये मामला भी सिर्फ एक लंबी कानूनी नूराकुश्ती बनकर रह जाता है. वक्त ही बताएगा कि अभिषेक बनर्जी इस चक्रव्यूह से बेदाग बाहर निकल पाते हैं या उनकी मुश्किलें और ज्यादा गंभीर रूप ले लेती हैं.
वीडियो: अभिषेक बनर्जी पर हमला, बीजेपी और टीएमसी ने एक-दूसरे पर की आरोपों की बौछार

