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IDBI बैंक बेचने पर अखिलेश यादव ने किया तंज, वित्त मंत्री बोलीं- 'घड़ियाली आंसू न बहाएं!'

केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी और LIC की कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दी है. सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव सोशल मीडिया पर भिड़ गए.

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ट्विटर पर अखिलेश और निर्मला एक -दूसरे से भिड़ गए (COURTSEY- ITG)

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  • केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया, जिसमें कनाडाई कंपनी Fairfax को 52,878.08 करोड़ रुपये में सौंपने की मंजूरी दी गई।
  • सरकार के इस फैसले के पीछे दो चरणों में खरीददारों के चयन की प्रक्रिया थी, जिसमें पांच कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी और अंतिम रूप से कनाडाई कंपनी ने बेहतर बोली लगाई।
  • इस हिस्सेदारी बिक्री के फैसले को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर आलोचना की, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्षी दलों के पुराने कार्यकाल में बैंकिंग सिस्टम की स्थिति पर अपने तर्क पेश किए हैं।

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया. सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक बवाल भी शुरू हो गया है. विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच सोशल मीडिया पर ही इस फैसले को लेकर जंग शुरू हो गई. 

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इस खबर की जानकारी देते हुए दी लल्लनटॉप ने एक्स पर एक कार्ड शेयर किया था. इसे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाथों-हाथ लिया और मोदी सरकार पर सवाल उठाए. अखिलेश ने सरकार पर राष्ट्रीय बैंकों को बेचने का आरोप लगाया. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए UPA सरकार में बैंकों की बदहाली का दावा किया. उन्होंने सीधे तौर पर अखिलेश यादव पर कई सवाल दागे.

लल्लनटॉप के कार्ड पर भिड़ गए अखिलेश-निर्मला

तो सबसे पहले बात कार्ड की. दी लल्लनटॉप का जो कार्ड अखिलेश ने शेयर किया था, उस पर लिखा था- 

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सरकार ने IDBI बैंक बेचने की मंजूरी दी. Fairfax बनेगी नई मालिक.

इस कार्ड को 14 अक्टूबर की रात 8 बजे शेयर करते हुए, अखिलेश ने एक्स पोस्ट में लिखा - 

बस अब सरकार बेचनी बाक़ी है. लगता है भाजपा सरकार ने अपनी दुकान बंद होते देख ‘Season End Sale’ लगाकर सब बेचकर निकलने का प्रोग्राम बना लिया है.

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लल्लनटॉप की पोस्ट पर दोनों लीडर्स में बहस हो गई
सरकार की ओर से क्या जवाब आया?

इतने गंभीर आरोप लगे तो सत्ता पक्ष की ओर से जवाब भी आया. वो भी खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का. अखिलेश की पोस्ट पर जवाब देते हुए उन्होंने लिखा,

अखिलेश जी, 2004 से आपकी पार्टी ने यूपीए का समर्थन किया था. यूपीए ने बैंकों को बदहाल स्थिति में छोड़ा था. उसे देखते हुए आश्चर्य होता है कि आज आप बैंकों की बात कर रहे हैं, जबकि उस समय आपने अपने सहयोगी दलों से सवाल तक नहीं पूछा.

वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि आज INDIA गठबंधन में शामिल दलों ने यूपीए सरकार के दौरान 'फोन बैंकिंग' और 'क्रोनी कैपिटलिज्म' के जरिए सरकारी बैंकों को नुकसान पहुंचाया था. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के समर्थन वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में IDBI बैंक ने ऐसे लोगों को कर्ज दिए, जिनसे मूलधन और ब्याज की वसूली करना आज भी मुश्किल है. निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार ने पारदर्शी नीतियों पर फोकस किया. पूंजी निवेश के जरिए IDBI बैंक समेत पूरे बैंकिंग सेक्टर को जीवनदान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के प्रयासों से बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है.

अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए उन्होंने आगे कहा, 

कमाल है, अब जब बैंकों की स्थिति मजबूत हो चुकी है, तो आप यह झूठी सहानुभूति क्यों दिखा रहे हैं? ये घड़ियाली आंसू क्यों?

IDBI बैंक बेचने का फैसला, ये है डील की खास बातें

14 अक्टूबर को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने एक फैसला लिया. जिसमें ने IDBI बैंक में अपनी और LIC की 60.72% हिस्सेदारी बेचने का फैसला हुआ. कनाडा के वित्तीय समूह फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी M/s 10955230 Canada Inc को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी है.

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक इस सौदे में IDBI बैंक में सरकार की 30.48% हिस्सेदारी और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 30.24% हिस्सेदारी बेची जाएगी. इस तरह सरकार कुल मिलाकर IDBI बैंक में कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचेगी. हालांकि, इस सौदे के बाद भी IDBI बैंक में सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% शेयर रहेंगे. यानी कुल हिस्सेदारी 34% बनी रहेगी. 

(यह भी पढ़ें: मोदी सरकार ने IDBI बैंक को बेचने की मंजूरी दी, नए मालिक का नाम सामने आया)

IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हुई थी. इसकी शुरुआत सबसे पहले 7 अक्टूबर 2022 को हुई थी. सरकार ने इसके लिए बैंक खरीदने के इच्छुक खरीदारों से आवेदन मंगाए थे. शुरुआत में 5 बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई. सरकार ने जब सभी के दस्तावेजों और नियमों की जांच की, तो इनमें से 4 कंपनियां ही योग्य पाई गईं. इसके बाद आखिरी दौर में दो कंपनियों ने अपने तकनीकी कागजात और बोली जमा की. सबसे बेहतर बोली लगाकर कनाडाई कंपनी ने यह डील अपने नाम कर ली. अब इसी डील को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है. सत्ता पक्ष इसका जवाब देते हुए विपक्ष को पुराने दिन याद दिला रहा है.

वीडियो: खर्चा-पानी: LTCG पर से टैक्स हटेगा? वित्त मंत्री ने क्या कह दिया?

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