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'बाबूजी का हालचाल बा?' अमेरिकी हमले में मारे गए शिवानंद के पिता बेटे को याद कर रो पड़े

देवरिया के 37 साल के शिवानंद चौरसिया ओमान के पास तेल टैंकर पर हुए हमले में मारे गए. 6 महीने से घर से दूर काम कर रहे शिवानंद ने कुछ दिन पहले ही परिवार से जल्द लौटने का वादा किया था.

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अमेरिकी हमले में शिवानंद की मौत पर पिता रामजी फफक पड़े. (फोटो- X/india today)

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  • शिवानंद चौरसिया, जो ओमान के पास अमेरिकी हमले में मारे गए, छह महीनों से पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर शिप पर वेल्डिंग का काम कर रहे थे।
  • अमेरिका ने माना कि तेल टैंकर ने उनकी नाकाबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश की, जिसके चलते होर्मुज स्ट्रेट में उस पर हमला किया गया था।
  • भारत सरकार ने हमले की निंदा की है और मृतक के परिवार को मुआवजा व सहायता देने के लिए राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय कार्रवाई कर रहे हैं।

यूपी के देवरिया के रहने वाले शिवानंद चौरसिया ओमान के पास अमेरिकी हमले में मारे गए. वो पलाऊ का झंडा लगे उस शिप पर सवार थे, जो होर्मुज स्ट्रेट में कथित तौर पर अमेरिकी नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था. शिवानंद 6 महीने से शिप पर थे. हमले से पहले उन्होंने परिवार से फोन पर कहा था कि जल्द ही घर आ जाएंगे. लेकिन उससे पहले ही अमेरिकी हमले में उनकी मौत हो गई.

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37 साल के शिवानंद के दो बच्चे हैं. एक बेटा और एक बेटी. गुरुवार, 11 जून की सुबह 8 बजे रामजी चौरसिया को फोन पर खबर मिली कि उनका बेटा शिवानंद जिस शिप पर था, उस पर बम गिर गया है, जिसमें उसकी मौत हो गई है.

परिवार पर वज्रपात करने वाली ये खबर जब मिली, उस समय शिवानंद की पत्नी सुशीला अपने मायके में थीं. पति की मौत की खबर मिली तो उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गई. रोते हुए सुशीला बताती हैं कि 9 जून की शाम को शिवानंद का फोन आया था तो सब कुछ अच्छा था. वो दिन में तीन बार फोन करते थे. 10 जून को एक बार भी फोन नहीं आया तो उन्हें चिंता हुई. उन्होंने अपने देवर और ननद से भी पूछा कि उनके भैया (शिवानंद) फोन नहीं कर रहे. उनसे ‘रिसिया’ (नाराज) तो नहीं गए. इसके बाद उन्हें शिवानंद की मौत की खबर मिली. तब से रो-रोकर सुशीला का बुरा हाल है.

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नौकरी से परिवार खुश था

देवरिया जिला मुख्यालय से 7-8 किमी की दूसरी पर एक गांव है सिरौली. शिवानंद इसी गांव के रहने वाले थे. उनके पिता रामजी चौरसिया को आज भी याद है जब पिछले साल नवंबर में शिवानंद ने उन्हें फोन करके बताया था कि एक बड़े तेल टैंकर पर उन्हें वेल्डिंग की नौकरी मिल गई है. पूरा परिवार खुश हो गया. 

रामजी के पास कुल 5 से 6 कट्ठा (तकरीबन 0.187 एकड़) खेती की जमीन है. इसमें फसल की बेहद कम पैदावार होती है. रामजी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि परिवार की आर्थिक हालत बहुत ठीक नहीं थी. जैसे-तैसे उन्होंने घर को संभाला था और बुनियादी जरूरतें पूरी की थीं. कुछ साल पहले शिवानंद परिवार का सहारा बनने के लिए घर छोड़कर पुणे चले गए. वहां वह वेल्डिंग का काम करने लगे. नवंबर 2025 में जब उन्हें तेल टैंकर पर नौकरी मिली तो लगा कि अब घर की हालत सुधर जाएगी. 

परिवार से आखिरी मुलाकात

शिवानंद के शिप को मुंबई से सिंगापुर जाना था. जहाज पर सवार होने से पहले वह अपने गांव सिरौली गए थे. यही उनकी आखिरी मुलाकात साबित हुई. 5 दिसंबर को शिवानंद का जहाज, यानी तेल टैंकर ‘एमटी सेट्टेबेलो’ मुंबई से सिंगापुर के लिए रवाना हुआ. वहां से वापस लौटते हुए शिप जब ओमान के पास था, तभी 10 जून को अमेरिकी सेना ने उस पर हमला कर दिया. 

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अमेरिका ने कहा कि जहाज ने अमेरिकी नाकाबंदी का ‘उल्लंघन करने की कोशिश’ की थी. इस हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई, जिनमें शिवानंद शामिल थे. 

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उनके पिता रामजी ने कहा, 

हमने अपने बेटे को आखिरी बार 6 महीने पहले देखा था. हमले से दो दिन पहले उन्होंने अपनी पत्नी सुशीला को फोन किया था. तब उनकी अपने 6 साल के बेटे समर और 2 साल की बेटी वामिका से बात हुई थी. 

जल्दी लौटने की बात कही थी

रामजी ने कहा कि उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के बारे में पता था. इसलिए पूरा परिवार टेंशन में था. उन्हें सुशीला ने बताया कि फोन पर शिवानंद ने जल्द लौटने की बात कही है. लेकिन 6 महीने बाद घर वापस लौटते, इससे पहले ही वह दो ऐसे देशों के बीच चल रही जंग का शिकार हो गए, जिससे उनका कोई वास्ता नहीं था. 

रामजी के मुताबिक, शिवानंद ने अपने छोटे भाई राम प्रवेश की भी नौकरी पाने में मदद की थी. तीन महीने पहले ही राम प्रवेश को दुबई में वेल्डिंग का काम मिला था. 

रामजी ने बताया कि राम प्रवेश का गुरुवार, 11 जून की सुबह 9 बजे के आसपास फोन आया. उसने बताया कि भैया के जहाज पर बम गिर गया है. शिवानंद लापता हैं. बाद में खबर आई कि हमले में शिप पर सवार 24 में से तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई. शिवानंद उनमें से एक हैं. हालांकि, बाकी 21 लोगों को बचा लिया गया.  

रामजी ने कहा कि 9 जून को उनकी शिवानंद से आखिरी बार बात हुई थी. तब वह ओमान तट के पास थे. क्या बात हुई थी, पूछने पर रामजी ने बस इतना कहा, ‘पूछन ए बाबूजी का हालचाल बा? (पिताजी क्या हालचाल है).’ इसके बाद रामजी फफक पड़े. दादाजी को रोते देख उनकी गोद में बैठी शिवानंद की मासूम बच्ची भी सहम गई.

सरकार से क्या मांग करते हैं? 

इस सवाल पर रामजी ने कहा कि जो भी नियमसंगत हो वो सरकार करे. इंडिया टुडे से जुड़े राम प्रताप सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, सिरौली गांव के रहने वाले अजय कुमार शाही ने बताया कि शिवानंद बहुत ही अच्छा लड़का था. उनके परिवार की मांग है कि एक करोड़ रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी दी जाए. उन्होंने बेटे का शव भी मांगा है.

सरकार ने क्या कहा?

इस बीच भारत सरकार ने अमेरिकी सेना के इस हमले की निंदा कर दी है. साथ ही होर्मुज के इलाके में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता भी जताई है. इधर देवरिया के डीएम मधुसूदन हुल्गी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि वो शिवानंद के परिवार के संपर्क में हैं. मृतक के शव के संबंध में राज्य सरकार के जरिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया जा रहा है. उन्होंने परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिया है. 

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