दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने दिल्ली के कई इलाकों में कुल 2,453 PG (पेइंग गेस्ट) बिल्डिंगों का सर्वे किया, जिसके बाद बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. पता चला है कि लगभग 99 फीसदी बिल्डिंगों के पास फायर सेफ्टी NOC सर्टिफिकेट है ही नहीं. इसके अलावा करीब 30 फीसदी बिल्डिंगों के ही PG प्लान को मंजूरी मिली है, यानी 70 फीसदी का प्लान ही मंजूर नहीं हुआ. और मात्र आठ PG ऐसे हैं जिनके पास स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट है.
दिल्ली के 99% PG के पास फायर NOC नहीं, 70% के पास तो... इस सर्वे ने धागे खोल दिए
Delhi buildings MCD action: MCD ने दिल्ली की PG (पेइंग गेस्ट) बिल्डिंगों का सर्वे किया और पता चला कि 90 फीसदी के पास फायर NOC है ही नहीं. मात्र आठ PG ऐसे हैं जिनके पास स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट है. किन इलाकों में हुआ ये सर्वे, और क्या पता लगा? सब जानिए

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, MCD ने दिल्ली के सभी 12 जोन में आने वाले PGs की समीक्षा की है. 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला बॉयज PG की बिल्डिंग गिर गई, जिसमें सात मासूम लोगों की मौत हो गई. इनमें से पांच छात्र थे. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने MCD को फटकार लगाई थी. इसी के बाद MCD एक्शन में आ गई है.
MCD की जांच के दौरान देखा गया कि PG स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी (ढांचे की मजबूती), ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और दिल्ली मास्टर प्लान के नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं. इसके अलावा कुछ और भी ज़रूरी दस्तावेज़ देखे गए. स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफ़िकेट का मकसद ये पक्का करना है कि कोई इमारत अपने निर्माण और इस्तेमाल से जुड़े भार और दबाव को सुरक्षित रूप से झेल सकती है या नहीं.
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ज़ोन के हिसाब से बिल्डिंगों की जांचसर्वे के अनुसार, 12 MCD ज़ोन में से सिविल लाइन्स ज़ोन, जहां दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैंपस स्थित है, में सबसे ज़्यादा प्रॉपर्टीज़ (608 PG) दर्ज की गईं. इनमें से केवल 364 के पास मंज़ूर बिल्डिंग प्लान हैं, सिर्फ़ 28 के पास फ़ायर NOC हैं, 27 के पास रेगुलराइज़ेशन की मंज़ूरी है और किसी के पास भी स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफ़िकेट नहीं हैं.

MCD के सर्वे में केशवपुरम PG प्रॉपर्टीज के मामले में दूसरा सबसे बड़ा ज़ोन है. 410 में से सिर्फ़ 54 के पास मंज़ूर बिल्डिंग प्लान हैं, दो के पास फ़ायर NOC है, दो के पास स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफ़िकेट हैं और किसी के पास भी ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट नहीं है.
साउथ ज़ोन में DU का साउथ कैंपस, IIT दिल्ली और JNU आते हैं. इस इलाके में करीब 390 PG प्रॉपर्टीज़ में से किसी के पास भी फायर NOC, स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी, बिल्डिंग-प्लान की मंज़ूरी या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट नहीं है. किसी भी प्रॉपर्टी को मास्टर प्लान के तहत PG चलाने की मंज़ूरी नहीं मिली है.
रिपोर्ट के मुताबिक, MCD ने 13 सितंबर तक सर्वे पूरा करने को कहा था, मगर MCD का कहना है कि वो एक से दो दिन और सर्वे करेगी.
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