20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘संसद मार्च’ के दौरान पुलिस एक्शन पर विवाद अब भी जारी है. दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की गोलीबारी नहीं हुई लेकिन झारखंड के गुमला जिले की रहने वाली 32 साल की नूतन टोप्पो का दावा इससे बिल्कुल अलग है. लल्लनटॉप के विकास वर्मा के साथ खास बातचीत में नूतन टोप्पो ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके दाहिने कान को चीरते हुए गोली निकली थी.
दिल्ली पुलिस कहती रही गोली नहीं चली, फिर मेडिकल रिपोर्ट में 'गनशॉट इंजरी' क्यों लिखी है?
नूतन बताती हैं कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और बाद में लाठीचार्ज किया. खदेड़े जाने के बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस (CP) की ओर पहुंच गए. लेकिन वहां सुरक्षाबलों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. इसी दौरान फायरिंग हुई और एक गोली उनके दाहिने कान को चीरते हुए निकल गई.

नूतन का कहना है कि उस समय वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थीं. इस दावे की पड़ताल करने के लिए लल्लनटॉप की टीम रांची पहुंची. रांची में नूतन टोप्पो से मुलाकात हुई. लल्लनटॉप की टीम ने टीम ने उनके मेडिकल दस्तावेज़ देखे. इलाज से जुड़े लोगों से बात की और पूरी घटना को समझने की कोशिश की. नूतन टोप्पो झारखंड के गुमला ज़िले के पुग्गू करमदीपा गांव की रहने वाली हैं. पिछले कई सालों से वह गुरुग्राम में रहकर पार्ट-टाइम नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं. छात्रों के आंदोलन से प्रभावित होकर वह 19 जुलाई को जंतर-मंतर पहुंचीं और अगले दिन 'चलो संसद' मार्च में शामिल हुईं.
नूतन बताती हैं कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और बाद में लाठीचार्ज किया. उनका दावा है कि लगातार खदेड़े जाने के बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस (CP) की ओर पहुंच गए. लेकिन कनॉट प्लेस पर सुरक्षाबलों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया. नूतन का दावा है कि इसी दौरान फायरिंग हुई और एक गोली उनके दाहिने कान को चीरते हुए निकल गई. उन्होंने बताया,
मुझे अच्छी तरह से पता है कि एक गोली मेरे दाहिने कान को छूकर निकली. जब मैंने कान पर हाथ लगाया तो सिर्फ़ खून ही खून था.
नूतन के अनुसार, उनके साथियों ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया. अस्पताल की डिस्चार्ज समरी में उनके कान में गनशॉट इंजरी का उल्लेख है. वहीं, रांची के सिनर्जी ग्लोबल अस्पताल की डिस्चार्ज समरी में चोट की वजह पैलेट गन बताई गई है.
पुलिस का दावा - गोली नहीं चलीहालांकि, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चलाई गई थी. ऐसे में नूतन का दावा और मेडिकल दस्तावेज इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े करते हैं. रांची में इलाज के दौरान नूतन का कान दोबारा जांचा गया. डॉक्टरों के अनुसार, उनके कान में 10 टांके लगे हैं, संक्रमण बढ़ गया था और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई है. आगे उनका हियरिंग टेस्ट किया जाना है.

लल्लनटॉप की टीम ने रांची में नूतन के परिवार और इलाज से जुड़े लोगों से भी बातचीत की. परिवार ने बताया कि नूतन की मां का निधन बचपन में ही हो गया था. घर में बीमार पिता और चार बहनें हैं. नूतन पार्ट-टाइम नौकरी करके अपनी पढ़ाई का खर्च उठाती रही हैं. नूतन का कहना है कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं हैं. वह सिर्फ़ छात्रों के समर्थन और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंची थीं. उनका मानना है कि आज के युवा गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने में विश्वास रखते हैं और इसी सोच के साथ वह आंदोलन का हिस्सा बनीं.
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कई सवाल, जिनके जवाब नहीं मिलेफिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पुलिस और सरकार के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान गोली नहीं चली, तो नूतन टोप्पो और अन्य घायल प्रदर्शनकारियों की मेडिकल रिपोर्ट में गनशॉट या पैलेट गन इंजरी का उल्लेख कैसे आया? इस सवाल का आधिकारिक जवाब अभी सामने आना बाकी है.
(नोट: इस रिपोर्ट में फायरिंग और गोली लगने से जुड़े दावे नूतन टोप्पो के बयान और उपलब्ध मेडिकल दस्तावेज़ों पर आधारित हैं. दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है.)
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